25 वर्षों से जमे डॉक्टर की कार्यशैली से टूटी लोगों की उम्मीदें, चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था बनी जनपीड़ा

*25 वर्षों से जमे डॉक्टर की कार्यशैली से टूटी लोगों की उम्मीदें, चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था बनी जनपीड़ा*
सारंगढ़ खबर न्यूज,सारंगढ़—— जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सारंगढ़ में पदस्थ डॉ. आर.एल. सिदार को लेकर अब सब्र का बांध टूटने लगा है। पूरे 25 साल से एक ही जगह जमे इस डॉक्टर पर इतने आरोप हैं कि अगर प्रशासन आंखें खोले, तो जांच की नहीं, कार्रवाई की ज़रूरत है। लेकिन अफसोस, यहां कार्रवाई नहीं हो रही- बल्कि चुप्पी साधी गई है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को अस्पताल में दवाइयां या इलाज नहीं, बल्कि रिफर पर्ची थमाई जाती है। गरीब मरीजों को इशारा किया जाता है –डॉक्टर साहब का घर उधर है, वहीं चले जाओ। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सारंगढ़ में बीते ढाई दशक से पदस्थ डॉ. आर.एल. सिदार पर लगते आरोप और बिगड़ती स्वास्थ्य सेवाएं अब केवल आंकड़े नहीं, बल्कि लोगों की पीड़ा बन चुकी है। डॉ. सिदार पर लगे गंभीर आरोपों में सरकारी संसाधनों का निजी हित में उपयोग, घर में निजी क्लिनिक का संचालन, अस्पताल के बजाय मरीजों को निजी क्लिनिक भेजना और ओपीडी में आए लोगों को बिना जांच ‘रिफर’ कर देना शामिल है। यह सब वर्षों से चल रहा है, लेकिन अब जनता का सब्र टूट चुका है। कई गरीब परिवारों की आवाज अब सामने आ रही है- कोई अपने बीमार बच्चे को लेकर सरकारी अस्पताल जाता है, लेकिन वहां इलाज के बजाय निराशा मिलती है। फिर वही परिवार अपनी जमीन गिरवी रखकर निजी अस्पताल की ओर भागता है। ऐसी कहानियां यहां आम हो गई हैं। जिले के बनने के बाद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद थी, लेकिन व्यवस्था वहीं ठहरी है – ठंडी, सुस्त और उपेक्षित। सबसे दुखद बात यह है कि इन सबके बावजूद शासन-प्रशासन ने आंखें मूंद रखी हैं। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी, अफसरों की अनदेखी और सत्ता संरक्षण के संदेह ने लोगों के विश्वास को गहरा आघात पहुंचाया है।जनता अब सवाल कर रही है- क्या स्वास्थ्य सेवाएं एक व्यक्ति के हाथों गिरवी रख दी गई हैं? क्या कोई डॉक्टर नियमों से ऊपर हो सकता है? क्या सारंगढ़ के लोगों को अच्छा इलाज पाने का अधिकार नहीं?



