सारंगढ़-बिलाईगढ़

प्रतिबंधित लाल ईटों के विषैला धुआं से ग्रामीणों का हुआ सांस लेना मुश्किल*

**प्रतिबंधित लाल ईटों के विषैला धुआं से ग्रामीणों का हुआ सांस लेना मुश्किल**
सारंगढ़ खबर,सारंगढ़—- सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला मुख्यालय सहित नगर के चारों ओर अवैध ईंट भट्टों का कारोबार जोरों पर है। ईंट भट्ठा संचालक शासन के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। बिना लाइसेंस के कई ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं। ईंट भट्ठों के संचालक मोटी रकम कमाई कर रहे हैं। इससे शासन प्रशासन को लाखों रुपये की राजस्व क्षति हो रही है। जिले में ईट भट्टे के कारोबार करने की होड़ मची हुई है।

जबकि शासन के निर्देशानुसार ईंट भट्टे लगाने के लिए बाकायदा शासन से अनुमति की आवश्यकता है मगर अनुमति नहीं ली जाती ।ईट भट्टों में लकड़ी और कंडे का उपयोग न कर चिमनी और कोयले से इन्हें पकाया जाता है। दर्जनों ईट भट्टे नियम विरूद्ध संचालित हो रहे हैं।

सारंगढ़ विकाशखण्ड अंतर्गत रापागुला,लेंधरा छोटे,केड़ार,भेड़वन, गोड़म, बंजारी, मचगोढ़ा,जसरा, सुलोनी, गोड़ीहारी,पचपेड़ी, डुमरडीह,और अन्य जगहों में प्रशासन की नाक के नीचे अवैध ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है और राजस्व और खनिज विभाग के अधिकारी मूक दर्शक बने बैठे हैं। यहां के लोगों का कहना है कि उनकी मिली भगत से अवैध ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं।

मचगोढ़ा में संचालीत ईंट भट्ठा से गांव के लोगों क़ो काफ़ी परेशानियों का सामना करना है, वहां के लोगों का कहना है कि ईंट भट्ठा से निकले प्रदूषित धुँआ से मचगोढ़ा गांव के साथ साथ क्षेत्र के वातावरण पूरी तरह से प्रदूषित हों रहा है, जिसके वजह से गांव के लोगो क़ो सांस लेने में मुश्किल हों रहा है कई लोग इससे वजह से अस्थमा शिकार भी हों चुके है! बाहर से आये व्यक्ति रमेश प्रजापति के द्वारा अवैध लाल ईंट भट्ठा का संचालन किया जा रहा है। रमेश प्रजापति लाल ईंट का धंधा करने के लिए ही मचगोढ़ा गांव में अपना जमावड़ा कर लिया है। रमेश प्रजापति क़ो यहाँ लाल ईंट भट्ठा का धंधा करते 8से 9वर्ष हों गया। इसके वजह से गांव में शुद्ध हवा लेने के लिए यहाँ लोग वंचित है।

**अवैध लाल ईंट का दाम 8500**

अवैध लाल ईंट भट्ठे वाले मन चाहे दाम पर ईंट कि बिक्री कर रहें है क्षेत्र के जनता क़ो, मानो एक प्रकार लूटने का काम कर रहें है। मन चाहे दामों पर प्रति ट्रेक्टर 8500 रूपये के दर से लाल ईंट बेचा जा रहा और ट्रेक्टर का किराया अलग से यह 8500 रूपये सिर्फ ईंट का है। मनचले दामों में ईंट का सौदा कर, ईंट का धंधा करने वाले व्यक्ति मोटी कमाई का जरिया बना लिए है। वही हम फ्लाइएस ईंट का बात करे तो उनका दाम लगभग 5500 रूपये है।
सुनोली,मचगोड़ा, गोड़ीहारी,पचपेड़ी, लेंधरा छोटे, केडार,भेड़वन, बंजारी,गोड़म अन्य जगहों पर ईंट के नाम से लूट मचा रखे है।

**आज तक नहीं हुई ठोस पहल**

प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आज तक इन अवैध कारोबारियों के विरूद्ध बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। इससे अवैध ईंट बनाने वालों के हौसले बुलंद हैं। कभी कभार छोटी मोटी कार्रवाई होती है मगर बड़े पैमाने पर ईंटों का कारोबार करने वालों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
प्रशासन द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने से प्रतिवर्ष ईंट भट्टा संचालकों की संख्या बढ़ती जा रही है। कई ठेकेदारों द्वारा एक जगह की अनुमति लेने के बाद कई जगहों पर ईंट भट्ठा संचालित किया जाता है। ऐसे ईंट भट्ठों को बंद कराने में खनिज व राजस्व विभाग के अधिकारी अक्षम साबित हो रहे हैं।

इन अवैध ईटों को पकाने के लिए अधिकांश जगहों पर अवैध कोयला खरीदी कर इसका उपयोग ईट भट्टा संचालकों द्वारा किया जाता है। साथ ही कई जगहों पर बड़े-बड़े वृक्षों की भी बलि चढ़ा दी जाती है। जिससे सीधा वातावरण क़ो प्रभाव पड़ ऱहा रहा।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी प्रशासन नहीं करवा पा रहा है नियम का पालन

पर्यावरण संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लाल ईटों पर 2012-13 में प्रतिबंध लगाया गया है। 13 सालों बाद भी प्रतिबंध का जिले में कोई असर नहीं है तथा धड़ल्ले से अवैध रूप से लाल ईटों का निर्माण चल रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button