
**सारंगढ़ जिला आबकारी अधिकारी सोनल नेताम निलंबित**
**सोनल नेताम पर आरोप है कि उन्होंने आबकारी विभाग में रहते हुए गंभीर अनियमितताएं और वित्तीय गड़बड़ियां कीं**
**22 आबकारी अफसर सस्पेंड.. 88 करोड़ कमीशन कमाया, इतने पैसे 60 साल की नौकरी में न मिलते**
**3200 करोड़ का शराब घोटाला मामला**
**ईओडब्ल्यू की चार्जशीट पेश होने के 85 घंटे बाद कार्रवाई**
सारंगढ़ खबर,सारंगढ़—— छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो ने जिला आबकारी अधिकारी सोनल नेताम के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। सोनल नेताम पर आरोप है कि उन्होंने आबकारी विभाग में रहते हुए गंभीर अनियमितताएं और वित्तीय गड़बड़ियां कीं। अपराध क्रमांक 04/2024 के तहत जांच के बाद 7 जुलाई 2025 को विशेष न्यायालय रायपुर में चालान प्रस्तुत किया गया। वर्तमान में सोनल नेताम सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में पदस्थ थीं, जहां से उन्हें निलंबित कर दिया गया है। इससे विभाग में हड़कंप मच गया है। यह कार्रवाई राज्य शासन की भ्रष्टाचार के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का संकेत है। मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशानुसार की जाएगी।
**इन अधिकारियों पर हुआ कार्यवाही**
विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार आबकारी आयुक्त अनिमेष नेताम, अरविंद कुमार पाटले, नीतू नोतानी, नोहर सिंह ठाकुर और विजय सेन शर्मा सहित आबकारी अधिकारी मोहित कुमार जायसवाल, गरीबपाल सिंह दर्दी, इकबाल अहमद खान, जनार्दन सिंह कौरव, नितिन खंडूजा, प्रमोद कुमार नेताम, विकास कुमार गोस्वामी, नवीन प्रताप सिंह तोमर, राजेश जायसवाल, मंजुश्री कसेर, दिनकर वासनिक, आशीष कोसम, सौरभ बख्शी, प्रकाश पाल, रामकृष्ण मिश्रा, अलेख राम सिदार और सारंगढ़ जिले से सोनल नेताम को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत निलंबित किया गया है।
पिछली सरकार में हुए 3200 करोड़ के शराब घोटाले में करीब 88 करोड़ रुपए का कमीशन पाने वाले 22 आबकारी अफसरों को आखिरकार निलंबित कर दिया गया। कोर्ट में ईओडब्ल्यू की चार्जशीट पेश होने के 85 घंटे के बाद सरकार ने इनका निलंबन आदेश जारी कर दिया। इतना ही नहीं इन सभी अफसरों की जगह नए अधिकारियों की भी नियुक्ति कर दी गई है। इनमें ज्यादातर अफसर परिवीक्षाधीन हैं। सभी से कहा गया है कि 24 घंटे के भीतर जहां तबादला हुआ है, वहां पहुंचकर कामकाज संभाल लें। राज्य के सबसे बड़े आबकारी घोटाले में 4 उपायुक्त, 13 सहायक आयुक्त, 9 जिला अधिकारी, 3 सहायक जिला आबकारी अधिकारी शामिल हैं। इन सभी को प्रति पेटी में औसतन 3.36 प्रतिशत कमीशन मिलता था। इसमें सात अफसर ऐसे भी हैं जो रिटायर हो गए हैं और एक ही मौत हो गई है। आबकारी उपायुक्त को हर महीने लगभग 2 लाख, सहायक उपायुक्त को 1.50 लाख, जिला आबकारी अधिकारी को 1.25 लाख और सहायक आबकारी अधिकारी को 1 लाख रुपए सैलरी मिलती है। ईओडब्ल्यू ने जो चार्जशीट पेश की है, उसके अनुसार है, वे आने वाले 60 साल तक भी काम इन अफसरों को जितना कमीशन मिला करते तो उन्हें इतनी सैलरी नहीं मिलती। उपायुक्त नोहर ठाकुर को सबसे ज्यादा चार्जशीट के अनुसार आबकारी कमीशन 11.55 करोड़ मिला है। उन्होंने 3 साल में इतना कमीशन पा लिया जितना उन्हें 60 साल नौकरी करने के बाद भी इतना वेतन नहीं मिलता। इसी तरह नीतू नोतानी का कमीशन 42 साल के वेतन के बराबर है।



