छत्तीसगढ़रायपुर

कस्टम-मिलिंग स्कैम… 2700 मिलर्स से वसूले 140 करोड़ः प्रति क्विंटल 20 रुपए ‘कट’, मनोज करता था सिंडिकेट-ऑपरेट,

ढेबर के ऑर्डर पर 33 जिलों में वसूली, रामगोपाल था 'खजाना-किंग'

कस्टम-मिलिंग स्कैम… 2700 मिलर्स से वसूले 140 करोड़ः प्रति क्विंटल 20 रुपए ‘कट’, मनोज करता था सिंडिकेट-ऑपरेट,

ढेबर के ऑर्डर पर 33 जिलों में वसूली, रामगोपाल था ‘खजाना-किंग’

रायपुर

छत्तीसगढ़ में 140 करोड़ की कस्टम मिलिंग स्कैम केस में EOW ने रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर को रिमांड पर लिया है। 2700 मिलर्स से वसूली मामले में दोनों आरोपियों से 21 जुलाई तक पूछताछ होगी। अब तक 3500 पेज का चालान कोर्ट में पेश हो चुका है। EOW दूसरा चालान जल्द पेश करने की तैयारी में है।

EOW के सूत्रों के अनुसार मनोज सोनी ने 33 जिलों से वसूली का जिम्मा अनवर ढेबर को दिया था। वहीं अनवर ने शराब दुकान के लिए प्लेसमेंट एजेंसी चलाने वाले सिद्धार्थ सिंघानियां को जिम्मेदारी दी थी। सिद्धार्थ ने शराब दुकान के कर्मचारियों के माध्यम से कमीशन की वसूली कर पैसा रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा के पास रायपुर पहुंचाया।

EOW के मुताबिक टुटेजा के माध्यम से मनोज और रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचा। स्कैम के सिंडिकेट ने प्रति क्विंटल 20 रुपए ‘कट’ फिक्स किया था। इसमें मनोज सोनी सिंडिकेट ऑपरेट करता था। अनवर ढेबर के ऑर्डर पर 33 जिलों में वसूली हुई, जबकि कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के पास पैसा स्टोर होता था।

राइस मिलर्स को भुगतान के नाम पर की गई इस वसूली में अफसरशाही, दलाली और राजनीतिक नेटवर्क का सिंडिकेट काम कर रहा था।

जनवरी 2024 को EOW ने दर्ज की FIR

ED के खुलासे के बाद EOW ने कस्टम मिलिंग घोटाले में 29 जनवरी 2024 को पहली FIR दर्ज की। इसमें रोशन चंद्राकर, प्रीतिका, रिटायर सीनियर IAS अनिल टुटेजा, एजाज ढेबर, सिद्धार्थ सिंघानिया, रामगोपाल अग्रवाल के नाम शामिल हैं।

EOW की जांच में पता चला कि कस्टम मिलिंग राशि मिलर्स को देने के नाम पर यह वसूली की गई है।

2020-21 से पहले कस्टम मिलिंग के बदले मिलर्स को प्रति क्विंटल 40 रुपए भुगतान किया जाता था। मिलर्स की मांग पर कांग्रेस सरकार ने इस राशि को 3 गुना बढ़ाया।

अधिकारियों ने प्रति क्विंटल 20 रुपए कट लिया

इसके बाद मिलर्स को मार्कफेड से 40 रुपए की जगह 120 रुपए भुगतान किया जाने लगा। राशि बढ़ने पर मार्कफेड के अधिकारियों ने प्रति क्विंटल 20 रुपए ‘कट’ लेना शुरू किया, जो मिलर्स ‘कट’ देते थे, उसका भुगतान कर दिया जाता था, जो कट नहीं देते थे, उनका पैसा रोक दिया जाता था। इस पैटर्न पर मार्कफेड के अधिकारियों ने प्रदेश के 2700 मिलर्स से 140 करोड़ से ज्यादा की उगाही कर ली।

कस्टम मिलिंग, डीओ काटने, मोटा धान को पतला, पतले धान को मोटा करने, एफसीआई को नान में कंवर्ट करने का पैसा लिया जाता था। मनोज सोनी और उनके सहयोगियों का खेल 2 साल से चल रहा था। इस खेल में मार्कफेड के अफसर और छत्तीसगढ़ स्टेट इन मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी भी शामिल थे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button