रायगढ़

रायगढ़ का प्रसिद्ध राजा चक्रधर शाह पोर्ते समारोह

*राजा चक्रधर शाह पोर्ते समारोह*
(सुर -ताल, छंद, संगीत अउ घुंघरू के 40″बरस)
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सारंगढ खबर न्यूज/रायगढ़———आवव हमर छत्तीसगढ के बड़का “बिश्व संगीत सम्राट” राजा चक्रधर शाह (पोर्ते) के बारे मा जानन । जेकर छत्तीसगढ़ मा आजो 40 वां समारोह मनाय जावत हे।संवेदनशील जिला कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी  के द्वारा इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है।
महाराजा चक्रधर शाह छत्तीसगढ़ मा रायगढ़ रियासत के राजा अउ गोंडवाना वंश के गढ़पति, बरगढ़ के राजा भूपदेव सिंह के बेटा रिहिस। जेकर जनम 19अगस्त 1905 अउ देहांत 07अक्टूबर 1947 म होय रहिस। बरस 1924 मा ओकर बड़े भाई राजा नटवर सिंह के देहांत होय के पाछु चक्रधर हर राज गद्दी मा बइठिस। जेहर 1924 ले 1947तक राजगढ़ के रियासत ल अपन दम मा चलइस। राजा चक्रधर के सिक्छा रइपुर के राजकुमार महाविद्यालय मा होय रहिस। ओहर गायन, वादन, अभिनय अउ नाच कला के बिसेसग्य रिहिसे हे। जेनहर संगीत अउ नृत्य बिद्या के बड़का करम के रचना ला करिस। बर्तमान मा छत्तीसगढ़ सरकार (छ.गढ़ संस्कृति विभाग) के डहर ले महाराजा चक्रधर शाह के सुरता मा “चक्रधर सम्मान” संगीत नृत्य के नाव मा देय जाथे।
रायगढ़ के सांसकिरतिक बिरासत ला पोठ करे के काम इहाँ के राजा चक्रधर शाह हर करे हे। चक्रधर शाह बढ़िया तबला अउ सितार बजाय के संगे – संग “तांडव नृत्य” मा घलोक जब्बर सुजानिक रहिस हे। ओहर कत्थक मा लखनऊ अउ जयपुर घराना ले जुरे रहिस, त उहाँ के गुरुजी मन ला रायगढ़ मा बलाइस। कत्थक के दुनो शैली ल मिंझारे बर ओहर एकठीन नवा शैली “रायगढ़ शैली” के सुरुवात करिस। गोंडराजे चक्रधर हर संगीत अउ कबिता मा बहुत अकन गरंथ के रचना ला घलोक करे रहिसे जेमा मेन रचना _नर्तक सर्वस्व, तालतोय निधि , तलब पुष्पकर, राजरत्न मंजुस, पुराजपरन पुष्पकर। उरदू भाषा मा तको ओकर पकड़ जमगरहा रिहिसे, ओहर “फरहद”के उपनाव ले उरदू भाषा मा गजल लिखिस। संस्कृत, उरदू अउ हिंदी मा लिखे परकासित किताब हाबे _ रत्नहार, काव्य कानन, रम्यराज, बैरागढ़िया राजकुमार, निगोर फरहद, अलकापुरी -तीन भाग, जोशे फरहद, माया चक्र, प्रेम के तीर। “तालतोयनिधि ” नाव के किताब के वजन 32″किलो हाबे। ये सब्बो किताब ह आजो भी चाँदी के पेटारा मा धराय हे। गढ़ा मंडला” रियासत कालिन _खैरागढ़ सम्मिलन 1943 म कल्याण दास के नृत्य परदरसन म खैरागढ़ मा दुसरइया बार तबला तको बजाए रिहिस हे।राजा चक्रधर शाह पोर्ते के जनम गनेस चतुर्थी के दिन होय रिहीस हे। तेकर खुशी मा ओकर पिताजी हर सहर मा उसल मंगल (उत्सव) मनाय के सुरू करिस। इहि ला आगू बढ़ात राजा चक्रधर शाह के सुरता मा साल 1985 ले गनेस चतुर्थी के अउसर मा इहां के राजघराना के डाहर ले शास्त्रीय संगीत अउ नृत्य महोत्सव के रूप मा गनेस मेला, चक्रधर समारोह सुरू करिन। जेमा देश के बड़का- बड़का कलाकार मनहा अपन कला के परदरसन करथें ।
येकर पाछू साल 2001 मा जिला परसासन हर तिहार मनाए के जुम्मेदारी लेलिस। तब ले छत्तीसगढ़ के रायगढ़ मा गनेस मेला जोरपरहा तिहार बनगे हावे।

मदन मंडावी,ढार डोंगरगढ़, राजनांदगांव

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