सारंगढ़-बिलाईगढ़

खर्री बड़े पंचायत में अवैध खदानों का खेप–साम्राज्य! संरक्षण में चल रहा खेल, प्रशासन बना तमाशबीन*

खर्री बड़े प्रधानमंत्री सड़क में चल रहे हर रोज 40 टन फ्लाईएश वाहन

*खर्री बड़े पंचायत में अवैध खदानों का खेप–साम्राज्य! संरक्षण में चल रहा खेल, प्रशासन बना तमाशबीन**
**खर्री बड़े प्रधानमंत्री सड़क में चल रहे हर रोज 40 टन फ्लाईएश वाहन**

सारंगढ़ खबर न्यूज,सारंगढ—— जिले में अवैध खनन का ऐसा बेरोकटोक तांडव चल रहा है, मानो प्रशासन ने आंखों पर पट्टी बांधकर पूरे तंत्र को ताले में बंद कर दिया हो। कार्रवाई की जगह खुला संरक्षण, और संरक्षण के पीछे करोड़ों का खेल… यही कड़वी हकीकत अब सड़क से लेकर खेतों तक दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क, जिसका उद्देश्य गांवों को विकास की पटरी पर लाना था, आज रोजाना 40 टन फ्लाई ऐश से लोड भारी वाहनों की रफ्तार में टूट-टूटकर दम तोड़ रही है। सड़क की हालत ऐसी है कि जैसे किसी ने विकास को बुलडोज़र चलाकर कुचल दिया हो। न मॉनिटरिंग, न रोक-टोक, न कार्रवाई- जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पीएमजीएसवाई तीनों मिलकर अनजान बने बैठे हैं या जानकर भी अनजान बने हुए हैं… सवाल दोनों पर खड़े होते हैं।सारंगढ के खर्री बड़े पंचायत में अवैध खदानों को पाटने का खेल अब खुलेआम धंधे में बदल चुका है। फ्लाई ऐश की आड़ में मोटी कमाई, राजस्व की करोड़ों की लूट, और नियमों की ऐसा धज्जियाँ कि कागज़ों में विकास और ज़मीन पर विनाश।सूत्रों से पता चला है कि खर्री बड़े पंचायत में पंचायत को मिलने वाली रॉयल्टी नही पटाया जा रहा है जो सीधा सीधा संकेत कर रही है कि गांव के सामने में खदान को फ्लाईएश से पाटने का काम पूरी तरह से अवैध है। क्या नए जिले को राजस्व की जरूरत नहीं? या फिर कुछ लोगों की भूख इतनी बढ़ चुकी है कि सरकारी तंत्र सिर्फ दर्शक बन गया है? विभिन्न क्षेत्रों में बगैर अनुमति चल रही पटाई, नियम विरुद्ध ट्रक एंट्री, और फ्लाई ऐश के साथ मिट्टी का उपयोग नही जाना लोगों की सेहत से सीधा खिलवाड़ है। यहां न सुरक्षा की परवाह, न पर्यावरण की सुध—बस अवैध खनन को पाटने और पैसा कमाने की जल्दबाजी में पूरा सिस्टम घुटनों पर दिख रहा है। जिला प्रशासन की चुप्पी अब सवालों को जन्म नहीं दे रही—बल्कि शक को पुख्ता कर रही है कि कहीं न कहीं ऊपर तक सबकुछ मैनेज है। अगर यही हाल रहा तो सड़कें सिर्फ टूटेंगी नहीं… प्रशासन की विश्वसनीयता भी मलबे में ही मिल जाएगी।

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