बिलासपुर रोड किसान राइसमिल के सामने छुट्टी के दिनों में चल रहा धड़ल्ले से निर्माण, प्रशासन मौन
बिना पार्किंग रोज़ाना जाम तय शिकायतें धूल खा रहीं, निर्माण लगभग पूरा—सटर लगने की तैयारी

*बिलासपुर रोड किसान राइसमिल के सामने छुट्टी के दिनों में चल रहा धड़ल्ले से निर्माण, प्रशासन मौन**
*NH-130 B से सटकर अवैध कॉम्प्लेक्स तैयार,स्टे सिर्फ काग़ज़ों में, ज़मीन पर मलाई
बिना पार्किंग रोज़ाना जाम तय शिकायतें धूल खा रहीं, निर्माण लगभग पूरा—सटर लगने की तैयारी*
सारंगढ़ खबर न्यूज,सारंगढ—-। नगर में इन दिनों कानून और व्यवस्था नहीं, बल्कि सुविधा अनुसार परंपरा चल रही है। काग़ज़ों में स्टे, फाइलों में शिकायतें और ज़मीन पर धड़ल्ले से निर्माण- वो भी शनिवार-रविवार की छुट्टियों में। डीपीसी पर शिकायत के बाद नजुल विभाग द्वारा स्टे लगाया गया, लेकिन हकीकत यह है कि बिलासपुर रोड एनएच-130बी किसान राइसमिल के सामने सटकर बन रहा कॉम्प्लेक्स अब लगभग पूरा होने को है। सबसे गंभीर बात यह है कि यह कॉम्प्लेक्स बिना किसी पार्किंग व्यवस्था के तैयार किया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग से सटकर दुकानों का संचालन शुरू हुआ तो रोज़ाना जाम तय है। आम जनता परेशान होगी, एंबुलेंस और आपात सेवाएं फंसेंगी, लेकिन जवाबदारों को इससे कोई लेना-देना नहीं। व्यवस्था सिर्फ अपनों के लिए सुरक्षित दिखती है। निर्माण में नियमों की खुली धज्जियां उड़ाई गईं। बिना अनुमति पेट कटाई की गई और हद तो तब हो गई जब डीएमओ कार्यालय की सुरक्षा दीवार को तोड़कर उसी पर निर्माण कर दिया गया। यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति पर सीधा हमला है। बावजूद इसके, प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। शनिवार, रविवार और शासकीय छुट्टी को निर्माण की शिकायतों पर नजूल अधिकारी ध्रुव का बयान भी सवालों के घेरे में है। उनका कहना है कि चलनी निकाल रहा है,निर्माण नहीं हो रहा, जबकि मौके से फोटो और वीडियो साफ़-साफ़ सच्चाई बयान कर रहे हैं। इन साक्ष्यों को भी सिरे से नकार दिया गया, मानो सच बोलना ही अपराध हो एक माह से अधिक समय से शिकायतें लंबित हैं। कार्रवाई शून्य है, लेकिन निर्माण लगभग पूरा। अब चर्चा है कि कुछ ही दिनों में दुकानों के सट्टर भी लग जाएंगे। सवाल साफ है – जब स्टे के बाद भी निर्माण पूरा हो सकता है, तो कानून और नियम आखिर किसके लिए हैं, क्या प्रशासन आंख मूंदकर मलाई बंटती देख रहा है, या फिर यह सब किसी मौन सहमति का नतीजा है? जनता जवाब चाहती।



