छत्तीसगढ़ में बढ़ते लापता बच्चों के मामले,*

*छत्तीसगढ़ में बढ़ते लापता बच्चों के मामले,* *शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल*
*सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, परिजनों में बढ़ी चिंता*
सारंगढ़ – बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ राज्य में बच्चों के लापता होने के मामलों ने एक बार फिर शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 982 बच्चे लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें से 582 बच्चों का पता लगाया जा चुका है, जबकि अभी भी करीब 400 बच्चे लापता हैं। इन आंकड़ों ने प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताजनक स्थिति उजागर कर दी है।विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि बच्चों के लगातार लापता होने की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि जमीनी स्तर पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है। कई मामलों में शिकायत दर्ज होने के बाद भी पुलिस की जांच धीमी गति से चलती है, जिससे बच्चों को खोजने में देरी होती है।परिजनों को अपने बच्चों की तलाश में थानों और दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि प्रशासन द्वारा समय-समय पर अभियान चलाने और सख्ती के दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविकता में लापता बच्चों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती नजर आ रही है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार की नीतियों और योजनाओं का असर जमीन पर कितना है, यह भी सवालों के घेरे में है।समाज सेवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि शुरुआत में ही मामलों को गंभीरता से लेकर त्वरित कार्रवाई की जाए, तो कई बच्चों को जल्द सुरक्षित बरामद किया जा सकता है। इसके लिए पुलिस, बाल संरक्षण इकाइयों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। इधर बच्चों के परिजन और समाज के जागरूक लोगों ने शासन से मांग की है कि लापता बच्चों को ढूंढने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, मानव तस्करी और बाल अपराध से जुड़े गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा हर मामले की नियमित मॉनिटरिंग हो। हम आपको बतादें कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकती है। फिलहाल प्रदेश में 400 बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिलना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।


