सारंगढ़-बिलाईगढ़

सारंगढ बिजली विभाग के आर डी एस एस के अधिकारियों ने सरकारी नहर के बीचोबीच लगाया पोल,,जानमाल का खतरा

अधिकारियों की घोर लापरवाही,जानमाल का खतरा**

**सारंगढ बिजली विभाग के आर डी एस एस के अधिकारियों ने सरकारी नहर के बीचोबीच लगा दिया पोल**

**अधिकारियों की घोर लापरवाही,जानमाल का खतरा**

**जिला कलेक्टर से शिकायत जल्द**

*सरकारी नहर या बिजली का कब्रिस्तान? केडार नहर के बीच खड़े पोल–ट्रांसफार्मर, हादसे को खुला न्योता*

*किसानों की फसल नहीं, अब जान भी दांव पर! नहर के बीच बिजली का खेल, जिम्मेदार बेखबर*

सारंगढ़–बिलाईगढ़। जिले में सरकारी तंत्र की लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी एक बार फिर खुलकर सामने आई है। केडार सिंचाई नहर के बीचोंबीच विद्युत विभाग के ठेकेदार द्वारा इलेक्ट्रिक पोल और ट्रांसफार्मर गाड़ दिए गए हैं, जिससे किसानों सहित आम नागरिकों की जान पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा काम बिना समुचित अनुमति और आपसी समन्वय के किया गया, और अब जब मामला उजागर हुआ तो दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते नजर आ रहे हैं। चंदई से दुर्गापाली तक फैली केडार सिंचाई नहर क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाती है। इसी नहर से सैकड़ों किसान अपनी फसलों की सिंचाई करते हैं। लेकिन अब इसी नहर के बीच बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर खड़े कर दिए गए हैं, जो किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। विशेषकर बारिश के दिनों में, जब नहर में पानी का बहाव तेज रहता है, तब यह स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। पानी के संपर्क में आने पर करंट फैलने का खतरा बना रहता है, जिससे इंसान ही नहीं, मवेशियों की जान भी जा सकती है। स्थानीय किसानों का कहना है कि नहर के भीतर इस तरह से निर्माण कार्य करना पूरी तरह अवैध है। नहर की सफाई, मरम्मत और जल प्रवाह के दौरान यह पोल और ट्रांसफार्मर गंभीर बाधा बनेंगे। यदि पानी का बहाव तेज हुआ या कोई व्यक्ति फिसलकर गिरा, तो उसकी जान बच पाना मुश्किल हो सकता है। बावजूद इसके, न तो काम रोकने की कोशिश की गई और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए।
*विभागों की अनभिज्ञता या जिम्मेदारी से भागना?*
जब इस मामले में विद्युत विभाग के अधिकारियों से सवाल किए गए तो विद्युत अधिकारी एस. के. तिवारी ने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें इसकी पूरी जानकारी नहीं है और यदि नियमों के विरुद्ध पोल या ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं तो उन्हें हटवाया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, सिंचाई विभाग के एसडीओ जे. मिंज ने भी यही रट लगाई कि विभाग को इस तरह के किसी कार्य की जानकारी नहीं दी गई। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि दोनों विभागों को जानकारी नहीं है, तो आखिर ठेकेदार ने किसके आदेश पर नहर के भीतर यह कार्य कर डाला। क्या बिना विभागीय अनुमति के इतना बड़ा काम संभव है, या फिर यह सब अधिकारियों की मौन स्वीकृति से हुआ।

*नियम क्या कहते हैं :-*

सिंचाई विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी नहर,जलाशय या सिंचाई संरचना के भीतर या उसके सुरक्षा क्षेत्र में बिना पूर्व अनुमति कोई भी निर्माण कार्य प्रतिबंधित है। नहर की निर्धारित सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का स्थायी ढांचा खड़ा करना गैरकानूनी माना जाता है। इसी तरह विद्युत सुरक्षा नियमों के तहत भी जलस्रोतों के ऊपर या भीतर विद्युत उपकरण लगाने के लिए विशेष तकनीकी अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। इन नियमों के तहत नहर क्षेत्र में बिजली के पोल या ट्रांसफार्मर लगाने से पहले सिंचाई विभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेना आवश्यक होता है। इसके साथ ही सुरक्षा दूरी, इंसुलेशन, अर्थिंग और चेतावनी संकेत अनिवार्य होते हैं। यहां इनमें से किसी भी नियम का पालन होता नहीं दिख रहा।

*लगातार हो रहे अवैध कार्य, प्रशासन मौन*
यह कोई पहला मामला नहीं है। केडार सिंचाई नहर में लगातार विभिन्न प्रकार के कार्य बिना विभागीय अनुमति के किए जा रहे हैं। कभी मिट्टी भराव, कभी अस्थायी पुल, तो कभी अब बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर। यह सब दर्शाता है कि या तो निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं।

*जनहित की अनदेखी, हादसे का इंतजार?*
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पूरे मामले में जनहित को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। किसान, मजदूर, राहगीर और बच्चे रोज इस नहर के आसपास से गुजरते हैं। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ा हादसा होना तय है, जिसकी जिम्मेदारी लेने वाला शायद कोई नहीं मिलेगा। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है या फिर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई कर नहर को सुरक्षित बनाया जाएगा। जनता जवाब चाहती है, और जिम्मेदारों को अब जवाबदेह बनाना ही होगा।

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