सारंगढ़ में गिरता वाटर लेवल बना खतरे की घंटी, जल संकट गहराने के संकेत
कलेक्टर एवं वार्ड पार्षदों से अपील,तत्काल पानी की समस्या का संज्ञान लेवे

*सारंगढ़ में गिरता वाटर लेवल बना खतरे की घंटी, जल संकट गहराने के संकेत*
**नगर के बहुतायत वार्डो में अभी से पानी की समस्या शुरू हो चुकी है**
**कलेक्टर एवं वार्ड पार्षदों से अपील,तत्काल पानी की समस्या का संज्ञान लेवे**
*भूजल तेजी से नीचे जा रहा, तालाबों पर अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई ने बढ़ाई चिंता*
सारंगढ़- बिलाईगढ़। सारंगढ़ मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से गिरता वाटर लेवल अब गंभीर चिंता का विषय बन गया है। बीते कुछ वर्षों में भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे आने वाले समय में जल संकट गहराने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। जानकारों के अनुसार, पहले शहर और गांवों में मौजूद तालाब और प्राकृतिक जल स्रोत वर्षा जल को सहेजकर भूजल स्तर को संतुलित रखते थे। लेकिन अब इन तालाबों पर बढ़ते अतिक्रमण और उन्हें पाटकर किए जा रहे अवैध निर्माण के कारण पानी का प्राकृतिक संचयन लगभग खत्म होता जा रहा है। वहीं, लगातार हो रही वृक्षों की कटाई ने भी स्थिति को और बिगाड़ दिया है। पेड़ जहां पानी को जमीन में रोकने और भूजल रिचार्ज में मदद करते हैं, वहीं उनकी कमी से बारिश का पानी सीधे बहकर निकल जाता है, जिससे वाटर लेवल तेजी से गिर रहा है। शहर में बढ़ता कंक्रीटीकरण भी एक बड़ी वजह बनकर सामने आया है।जमीन के खुले हिस्से कम होने से पानी जमीन में समा नहीं पा रहा, जिससे भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लग रहे हैं कि जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन इस पूरे मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहे, जिसके चलते तालाबों पर अतिक्रमण और जल स्रोतों का दोहन जारी है।
*गहराता संकट*
यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले 5 से 10 वर्षों में सारंगढ़ को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। पीने के पानी की उपलब्धता तक प्रभावित हो सकती है और लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ सकता है।
*निष्कर्ष*
सारंगढ़ में गिरता वाटर लेवल सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि आने वाले संकट की चेतावनी है। जिले के संवेदनशील कलेक्टर सारंगढ के विकास के लिए बहुत प्रयास कर रहे है,उनसे नगर की जनता को आशा है कि जल संरक्षण, तालाबों की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन पर तत्काल ठोस कदम उठाना अब बेहद जरूरी हो गया है।



