जल संसाधन विभागसारंगढ़-बिलाईगढ़

सारंगढ़ जिले के आमाकोनी विश्राम गृह 15 वर्षो से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाने मजबूर

सारंगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं

*सारंगढ़ जिले के आमाकोनी विश्राम गृह 15 वर्षो से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाने मजबूर**
**सारंगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं**
**जल संसाधन विभाग और वन विभाग की निष्क्रियता से सारंगढ़ पर्यटनो में विकास कार्य शून्य**
**जल संसाधन विभाग का विश्राम गृह खंडहर में तब्दील**
**नई अधिकारी आने से क्षेत्र में अब होगी विकास**

सारंगढ़ खबर,सारंगढ़——-नवीन जिला सारंगढ़ जिले का विश्राम गृह (आमाकोनी )जहाँ प्रति माह हजारों सैलानी जिसमे स्थानीय लोग भी होते है घूमने जाते थे, जल संसाधन विभाग की घोर लापरवाही के कारण आज आमकोनी पर्यटक स्थल में घूमने से वंचित हो गए है।सारंगढ़ स्थित आमाकोनी जहाँ पुटका जलाशय के रूप एक बड़ा डेम है जो सारंगढ़ के आधी आबादी को पानी की पूर्ति करता है जहाँ वर्षो पुराना जल संसाधन विभाग का विश्राम गृह रहा है जो आज 20 वर्षो से खण्डर में है पूरी तरह से तब्दील हो चुका है।विभाग के अधिकारियों ने भी आमाकोनी विश्राम गृह को और आने जाने के लिये कच्ची सड़क मार्ग को सुधार करने शासन प्रशासन को कोई भी पहल नहीं किया,जिसके कारण आमाकोनी विश्राम गृह अपने इस दुर्दशा पर आंसू बहाने को मजबूर हो गया है।

**पूर्व में पर्यटक हेतु वन विभाग ने 6 करोड़ का किया था प्रस्ताव**

सारंगढ़ क्षेत्र में वनों की बहुलता है इस क्षेत्र में पर्यटन के लिये अपार संभावनाएं हैं।इस क्षेत्र के वनों में प्रचुर मात्रा में खनिज भी विद्यमान है, सबसे खाश बात की सारंगढ़ में गोमर्डा अभ्यारण्य हैं जहाँ हर साल हजारों सैलानियों के आना होता है।वन विभाग ने पूर्व में 2012-13 में पर्यटन को बढ़ाने के लिये शासन को लगभग 6 करोड़ रुपये की प्रस्ताव भेजा था जो आज तक पेंडिंग पड़ा हुआ है जिसमे कहा गया था कि बिरसिंडीह,आमाकोनी से खपान तक सी सी रोड का निर्माण, इकोपार्क, नये विश्राम गृह का निर्माण, गार्डन सहित आमाकोनी पुटका जलाशय में पर्यटकों के लिए बोटिंग का भी प्रस्ताव दिया गया था।जनप्रतिनिधियों के निष्क्रियता भी एक बहुत बड़ा कारण है जो सारंगढ़ क्षेत्र में पर्याप्त पर्यटन बढ़ने की संभावना है पर ध्यान नही दिया जा रहा है।

**जल संसाधन विभाग के निष्क्रियता से पर्यटनों में अव्यवस्था का आलम**

आमाकोनी जाने के लिये जहाँ सारंगढ़ से बिरसिंडीह तक बीटी रोड बन गया है परंतु बिरसिंडीह से आमाकोनी पुटका जलाशय जो जल संसाधन विभाग के अंतर्गत आता है तक जाने के लिये बहुत खराब,ऊबड़खाबड़, बड़े बड़े बोल्डर, बड़े बड़े गड्डो से भरा रोड है,जिसकी दूरी लगभग 2 किलोमीटर है।विभाग के अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण आज पर्यन्त तक ना ही रोड को बनाया गया और ना ही आमाकोनी विश्राम गृह को बनाया गया जो खंडहर में पूरी तरह से तब्दील हो चुका है।जगह जगह गंदगी,कूड़ा करकट फैला हुआ है। जो एक समय मे सारंगढ़ नगर का गौरव के रूप में जाना जाता था आज भी याद किया जाता है।विभाग के पास इसे मेंटेनेंस करने फंड नही है क्योंकि अधिकारियों को इसे बनाने में शायद कोई ज्यादा बड़ा कमीशन मिलते नही दिखता है।

 

**नयी अधिकारी की सक्रियता से होगा क्षेत्र में विकास**

सारंगढ़ नवीन जिला में जल संसाधन विभाग में अब तक जितने भी अधिकारी आये बस अपने स्वार्थ सिद्ध करने आये थे,पर अब लगता है कि इस विभाग में पीएससी पास कर आराधना पटेल सारंगढ़ जल संसाधन विभाग की नई एसडीओ एक युवा शक्ति के हाथों में बागडोर आयी है।सारंगढ़ जल संसाधन विभाग में आराधना पटेल इसी वर्ष के जनवरी माह में अपना पदभार ग्रहण की है और आते ही विभाग को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।आराधना पटेल ने सारंगढ़ खबर के संपादक को बताया कि पुटका जलाशय केनाल में अभी रूटीन का कार्य किया गया है और जल संसाधन विभाग के सभी क्षतिग्रस्त सरकारी क्वार्टरों को और ऑफिस को नये सिरे से बनाने शासन को प्रपोजल तो भेजा ही है साथ ही क्षेत्र के विकास के लिए लातनाला में चिखली एनीकट बनाने के लिए लागत 7 करोड़,सारंगढ़ नगर की पहचान घोघरा नाला में स्टॉपडेम बनाने के लिए लागत 2.80करोड़ और पुटकानाला के झरपडीह माइनर का लाईनिंग कार्य हेतु लागत 1.40 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजी है।और लगता है विभाग द्वारा भेजे गए इस प्रस्तावित कार्य को जल्द ही स्वीकृति शासन से मिल जायेगी।साथ ही वर्षो से खंडहर बन चुके आमाकोनी रेस्टहाउस के बारे में पूछने पर उनके द्वारा बताया गया की विभाग द्वारा फिर से रेस्टहाउस को बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने की बात कही गई।

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