सारंगढ़-बिलाईगढ़

गौठान योजना लापरवाही की भेंट चढ़ी, दबंगों की फसल लहलहाई*

*गौठान योजना लापरवाही की भेंट चढ़ी, दबंगों की फसल लहलहाई*

सारंगढ़ खबर न्यूज,सारंगढ़———- शासन द्वारा पशुधन संरक्षण के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी गौठान योजना अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की बलि चढ़ती नज़र आ रही है।बोइरडीह मानिकपुर, चंवरपुर,कोसीर,मौहाढोढा जैसे कई गांवों में जिन गौठानों की ज़मीन पर चारा उगाया जाना था, वहां अब दबंग लोगों ने कब्जा जमाकर निजी फसलें बो दी हैं। यह सब पंचायत प्रतिनिधियों की मिलीभगत और जिम्मेदार अधिकारियों की खामोशी के कारण संभव हो पाया है।

*जनप्रतिनिधियों की भूमिका संदिग्ध, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं*

ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई गुपचुप प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरेआम “कब्जा महोत्सव” है। सरपंच और सचिव न केवल चुप हैं, बल्कि कब्जाधारियों को खुला समर्थन दे रहे हैं। कई बार शिकायतें की गईं, मगर प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे साफ होता है कि या तो जिम्मेदार अफसरों ने आंख मूंद ली है या फिर समझौते की चुप्पी साध ली है।

*गौठान से निकाले गए मवेशी सड़कों पर, बढ़ रही दुर्घटनाएं*

इन अवैध कब्जों का सबसे बड़ा खामियाज़ा बेसहारा मवेशियों को भुगतना पड़ रहा है। चारा और आश्रय से वंचित ये मवेशी अब मुख्य सड़कों पर भटकते घूम रहे हैं। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर लगातार मवेशियों की उपस्थिति के चलते सड़क दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। कई जानें जा चुकी हैं, कई लोग घायल हो चुके हैं — इसकी ज़िम्मेदारी किसकी है?

*प्रशासन और पंचायत दोनों जिम्मेदार, शासन से सख्त कदम की मांग*

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधि दोनों ही बराबर के दोषी हैं। गौठानों का उद्देश्य ही अगर नष्ट हो गया, तो फिर योजना का औचित्य क्या रह जाता है? अब समय आ गया है कि शासन इस गंभीर लापरवाही पर संज्ञान ले।
गौठानों को अवैध कब्जे से मुक्त कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि जनकल्याण की योजनाएं जनप्रतिनिधियों की जागीर न बनें। जनता की आवाज़ को अब दबाया नहीं जा सकता – जवाबदेही तय करनी ही होगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button