खनिज विभाग सारंगढ़सारंगढ़-बिलाईगढ़

सारंगढ क्षेत्र में फ्लाई ऐश का खेल: अनुमति नही फिर भी डंपिंग धड़ल्ले से जारी

**सारंगढ क्षेत्र में फ्लाई ऐश का खेल: अनुमति नही फिर भी डंपिंग धड़ल्ले से जारी**
**सारंगढ़ कुटेला खदानों पर सियासी विस्फोट**

**सारंगढ नगर पालिका सीएमओ ने गोपनीय तरीके से दिया अनुमति, कागजों में वार्ड को लिखा गांव**

**पटवारी प्रतिवेदन में बताया कुटेला ग्राम की भूमि लेकिन हकीकत में सारंगढ़ वार्ड 01की है जमीन**

**भ्रामक प्रतिवेदन बनवाकर दिलाई अनुमति, नगर पालिका सीएमओ ने डायरेक्ट दे दी एनओसी**

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला पावर प्लांटों से उत्सर्जित फ्लाई एश की डंपिंग के लिए आरक्षित हो चुका है। बेहद आसानी से कहीं भी, किसी भी जमीन पर अनुमति मिल जाती है।
सारंगढ़ के कुटेला क्षेत्र की पुरानी पत्थर खदानों में फ्लाई ऐश डंपिंग का मामला अब बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है। विधानसभा में सवाल उठने के बाद सरकार के जवाब ने मामले को और उलझा दिया है। सारंगढ़ की विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े ने प्रश्न क्रमांक 1646 के तहत पूछा कि आखिर किसकी अनुमति से खदानों में फ्लाई ऐश डाली जा रही है। इस पर वित्त एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने साफ कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के कुटेला क्षेत्र की खदानों में फ्लाई ऐश डंपिंग की कोई अनुमति नहीं दी है।

*अनुमति नहीं… फिर डंपिंग कैसे?*

सरकार के इस जवाब के बाद सवाल और तेज हो गए हैं। यदि अनुमति ही नहीं दी गई तो आखिर लाखों टन फ्लाई ऐश खदानों में कैसे पहुंच गई। सूत्रों के अनुसार एक नेता के करीबी व्यक्ति ने नगर के एक कांग्रेसी रिश्तेदार के साथ मिलकर खदानों को फ्लाई ऐश से पाटने का काम कराया।

*शिकायत पर पहुंचे अफसर, कार्रवाई क्यों नहीं?*

शुरुआती दौरान में मामले की शिकायत होने पर पर्यावरण अधिकारी,तहसीलदार और खनिज विभाग की संयुक्त टीम जांच के लिए पहुंची थी। लेकिन कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ गाइडलाइन का पालन करने का निर्देश देकर दोबारा फ्लाई ऐश डालने की मौन अनुमति दे दी गई।
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रदेश के वित्त मंत्री के जवाब के मुताबिक अनुमति ही नहीं थी, तो मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की। क्या जांच में दस्तावेज देखे गए या फिर मलाई देखकर मामला ठंडा कर दिया गया।

*जांच और कार्रवाई की मांग तेज*

ग्रामीणों का कहना है कि फ्लाई ऐश से पर्यावरण, जल स्रोत और जनस्वास्थ्य पर खतरा बढ़ रहा है। अब पूरे मामले में लाखों टन फ्लाई ऐश की सप्लाई, जिम्मेदार कंपनियों और अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

कुटेला में खसरा नंबर 6/1 में फ्लाईऐश डालने के मामले में एक और खुलासा हुआ है।सारंगढ नगर पालिका के सभी ने बेहद चालाकी से सारंगढ़ वार्ड की जमीन को कुटेला का बता दिया। प्रतिवेदन में सारंगढ़ की जमीन दिखाई जाती तो नगर पालिका से विधिवत एनओसी लेनी पड़ती। इससे बचने के लिए सभी सारंगढ़ की जमीन को कुटेला में दिखा दिया। सीएमओ सारंगढ़ ने भी गोपनीय तरीके से अनुमति दे दी। सारंगढ़ और कुटेला दोनों जगहों में खसरा नंबर 6/1 मौजूद है। प्राप्त एनओसी में बताया गया कि सारंगढ़ तहसील के ग्राम कुटेला में कृषि भूमि खसरा नंबर 6/1 कुल रकबा 24.924 हे. में से 3 हे. पर अडाणी पावर बड़े भंडार को 2 लाख टन फ्लाई एश पाटने की अनुमति दी जानी है। छग पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कलेक्टर के प्रतिवेदन पर अनुमति दे दी। इसमें बड़ा खेल हुआ। यह जमीन कुटेला में नहीं बल्कि सारंगढ़ के वार्ड नं 01 में ही स्थित है। उक्त भूमि नगर पालिका परिषद के क्षेत्र में आती है। मतलब नगरीय निकाय में विधिवत एनओसी ली जानी थी। इसी वजह से भ्रामक रिपोर्ट बनाकर जमीन को कुटेला में दिखाया गया। नगर पालिका सीएमओ ने चुपचाप एनओसी भी जारी कर दी। अध्यक्ष या किसी पार्षद को कानोंकान भनक तक नहीं लगी। शहरी क्षेत्र में इस तरह से फ्लाईऐश डंप करने के लिए नियम सख्त हैं।

**तारीखों में भी गोलमाल**

अनुमति देने की प्रक्रिया में तारीखों की भी हेराफेरी हुई। पटवारी ने 25 नवंबर 2024 को पंचनामा प्रतिवेदन दिया। तहसीलदार ने 27 नवंबर 2024 को एसडीएम सारंगढ़ को अभिमत भेजा। नपा सीएमओ ने भी 27 नवंबर 2024 को कलेक्टर को अभिमत भेजा। खनिज विभाग ने 9 दिसंबर 2024 को अभिमत दिया। जबकि एसडीएम सारंगढ़ ने तहसीलदार के अभिमत के आधार पर 9 नवंबर 2024 को कलेक्टर को पत्र लिखा। मतलब पंचनामा भी नहीं बना था, तब से एसडीएम ने अभिमत दे दिया था।

**मौके पर थी अवैध खदान**

बताया जा रहा है कि इस जगह पर दस लाख टन की अनुमति चाही जा रही थी, लेकिन जमीन इतनी बड़ी नहीं थी। मौके पर कोई लो लाइंग एरिया नहीं था बल्कि पत्थर की अवैध खदान थी। तभी दो लाख टन फ्लाईएश डाला जा सका। नगर पालिका परिषद ने वार्ड 01 कुटेला को ग्राम की जमीन बताई गई लेकिन यह सारंगढ़ नगर पालिका की है। नपा के जनप्रतिनिधियों को अंधेरे में रखकर अनुमति दी गई।

 

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