बाल कृष्ण की चंचलता से दुर्गा ताण्डव तक, दीक्षा रथ ने रचा ओडिसी का रंग

बाल कृष्ण की चंचलता से दुर्गा ताण्डव तक, दीक्षा रथ ने रचा ओडिसी का रंग
रायगढ़,—–41 वें अंतरराष्ट्रीय चक्रधर महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में अंतर्राष्ट्रीय ओडिसी नृत्यांगना कुमारी दीक्षा रथ ने अपनी दो मनोहारी प्रस्तुतियों से मंच पर भक्ति, भाव और शक्ति के विविध रंग बिखेरे। पहली प्रस्तुति में उन्होंने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को साकार किया, वहीं दूसरी प्रस्तुति में मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप और विजय गाथा को ओडिसी नृत्य के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
पहली प्रस्तुति में नटखट बाल कृष्ण, वात्सल्य भाव, उनकी मधुर बांसुरी और दिव्य स्वरूप को भाव-भंगिमाओं एवं नृत्य मुद्राओं के माध्यम से जीवंत किया गया। राग मिश्र मुखारी और रूपक ताल पर आधारित इस प्रस्तुति ने दर्शकों को श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मनोहारी दर्शन कराया। इसके बाद ‘दुर्गा ताण्डव’ की ओजस्वी प्रस्तुति में अंधकार से शक्ति के उदय, नवदुर्गा के विविध स्वरूप, सिंहवाहिनी मां दुर्गा, ताण्डव और अधर्म पर विजय के भावों को सशक्त अभिव्यक्ति दी गई। महिषासुरमर्दिनी स्वरूप के माध्यम से सत्य और धर्म की विजय का संदेश भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत हुआ। अंत में शांत और करुणामयी मां के स्वरूप ने प्रस्तुति को भावपूर्ण विराम दिया।



