सारंगढ़ स्वास्थ्य विभाग में ट्रांसफर या तमाशा का चल रहा खेल
सारंगढ़ सीएचसी में वही पुराने चेहरे, वही पुराना खेल**

*ट्रांसफर या तमाशा?”
**सारंगढ़ सीएचसी में वही पुराने चेहरे, वही पुराना खेल**
सारंगढ़ खबर,सारंगढ़——गजब है छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य महकमा!
नवीन जिला सारंगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉ. आर. एल. सिदार और डॉ. सुरेश कुमार खूंटे का हाल ही में तबादला क्रमशः पत्थलगांव और कोंडागांव किया गया था।
लोगों ने राहत की सांस ली थी। सोचे थे कि अब सारंगढ़ स्वास्थ्य विभाग में कुछ बदलाव आएगा, वर्षों से जमे चेहरों की जगह कोई नई ऊर्जा आएगी।
लेकिन ये क्या?
हफ्ता भी नहीं बीता था और राज्य सरकार ने एक नया फ़रमान आदेश जारी कर दिया।वर्षो से सारंगढ़ स्वास्थ्य विभाग में जमे दोनों डॉक्टर को वापस सारंगढ़ सीएचसी में यथावत पदस्थ कर दिया गया है।
अब जरा ध्यान दीजिए –
🔹 डॉ. आर. एल. सिदार पिछले **25 वर्षों से सारंगढ़ CHC में जमे हुए हैं।
🔹 डॉ. सुरेश खूंटे भी इसी केंद्र में लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं – और सबसे अहम बात,
🔹 दोनों ही डॉक्टरों का खुद का निजी अस्पताल भी है शायद इस कारण सारंगढ़ से जाने का इरादा नहीं है।
तो अब सवाल ये है की –
👉 क्या सरकारी अस्पताल महज़ एक “प्लेटफॉर्म” बन चुका है निजी अस्पतालों के प्रचार और सुविधा के लिए?
👉 क्या ट्रांसफर आदेश केवल औपचारिकता है, असल में सब कुछ पहले से तय होता है?
👉 नियमों के नाम पर आम डॉक्टरों का ट्रांसफर तो तुरंत लागू होता है, लेकिन रसूख वाले “स्पेशल केस” में आदेश पलटने में एक हफ्ता भी नहीं लगता!
⚠️ क्या छत्तीसगढ़ की ट्रांसफर नीति में ये स्पष्ट नहीं है कि कोई भी अधिकारी या डॉक्टर एक ही जगह वर्षों तक नहीं टिक सकता?
तो फिर ये कौन सा विशेषाधिकार है, जो इन दोनों डॉक्टरों को प्राप्त है?
यह सिर्फ सिस्टम के साथ मज़ाक नहीं है – यह जनता की सेहत और विश्वास के साथ सीधा खिलवाड़ है।
**जनता का सवाल है:**
स्वास्थ्य मंत्री और विभाग के जिम्मेदार अफसर जवाब दें –
❓ क्या ये “ट्रांसफर” सिर्फ दिखावा था?
❓ क्या निजी अस्पताल वाले डॉक्टरों को सरकारी पोस्टिंग वहीं देनी चाहिए जहां उनका धंधा चलता है?
❓ और आखिर इतनी जल्दी आदेश पलटने की वजह क्या थी?
सारंगढ़ की जनता सब देख रही है –
अब ज़रूरत है इस मौन तंत्र को आवाज देने की।


