भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के घर जुट रहे भाजपाई दिग्गज, कोर कमेटी की बैठक या सियासी ‘लंच डिप्लोमेसी’… प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी की मौजूदगी ने बढ़ाया सियासी तापमान…!

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के घर जुट रहे भाजपाई दिग्गज, कोर कमेटी की बैठक या सियासी ‘लंच डिप्लोमेसी’… प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी की मौजूदगी ने बढ़ाया सियासी तापमान…!
जांजगीर-चांपा। जिला भाजपा की कोर कमेटी की बैठक आज पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता नारायण चंदेल के निवास नैला में आयोजित होने जा रही है। वैसे तो पार्टी की भाषा में यह बैठक संगठनात्मक गतिविधियों, आगामी कार्यक्रमों और पार्टी की रणनीति पर चर्चा के लिए बताई जा रही है, लेकिन बैठक का स्थान, समय और मेहमानों की सूची ने इसे सामान्य संगठनात्मक बैठक से कहीं ज्यादा राजनीतिक बना दिया है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि बैठक ऐसे समय हो रही है, जब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है और इस दौड़ में नारायण चंदेल का नाम भी चर्चा में आया है। ऐसे में अचानक जिला कोर कमेटी की बैठक का उनके घर होना सियासी संयोग है या कोई रणनीतिक प्रयोग,इस पर भाजपा के भीतर और बाहर खूब कानाफूसी शुरू हो गई है।
बैठक इसलिए और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस बैठक में जिले के प्रभारी मंत्री शामिल हो रहे हैं.जांजगीर-चांपा जिले के प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी की मौजूदगी ने चर्चाओं को और हवा दे दी है। पार्टी सूत्रों की मानें तो कोर कमेटी की बैठकों में प्रभारी मंत्री की मौजूदगी कोई असंभव बात नहीं, लेकिन इस बार बैठक का स्थान, समय और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां इसे खास जरूर बना रही हैं।
ऊपर से बैठक में लंच की व्यवस्था भी चर्चा का विषय बनी हुई है। अब राजनीति में भोजन केवल भोजन तो होता नहीं, कभी-कभी प्लेट में परोसे गए खाने के साथ समीकरण भी परोसे जाते हैं और मिठाई के साथ संदेश भी!
भाजपा के भीतर चल रही प्रदेश नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच सवाल यही है कि चंदेल के घर होने वाली इस बैठक में संगठन की चर्चा होगी या भविष्य की राजनीति का मेन्यू भी तैयार होगा? क्या यह महज जिला कोर कमेटी की बैठक है या फिर किसी बड़े सियासी संकेत की पटकथा लिखी जा रही है?
फिलहाल भाजपा इसे संगठनात्मक बैठक बताएगी, नेता इसे सामान्य कार्यक्रम कहेंगे और कार्यकर्ता इसे अनुशासन के चश्मे से देखेंगे। लेकिन सियासत में असली कहानी अक्सर बैठक खत्म होने के बाद शुरू होती है। अब निगाहें इसी पर हैं कि चंदेल के घर की यह बैठक केवल लंच तक सीमित रहती है या प्रदेश की राजनीति के लिए कोई नया ‘मेन्यू’ तैयार करती है।



