शासकीय विद्यालय के प्रवेश उत्सव में गरिमा भंग, कांग्रेस विधायक के आचरण पर सवाल

शासकीय विद्यालय के प्रवेश उत्सव में गरिमा भंग, कांग्रेस विधायक के आचरण पर सवाल
सारंगढ़ खबर,सारंगढ़/सरसीवा। शासकीय विद्यालय सरसीवा में आयोजित वार्षिक प्रवेश उत्सव और वृक्षारोपण कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया, जब अतिथि के रूप में मौजूद कांग्रेस विधायक कविता प्राण लहरे के कथित अनुचित व्यवहार पर कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताया। यह आयोजन नवप्रवेशित बच्चों का स्वागत, वृक्षारोपण और शैक्षिक प्रोत्साहन के उद्देश्य से आयोजित किया गया था, लेकिन कुछ गतिविधियों ने इसकी गरिमा को ठेस पहुंचाई।
आयोजन की मर्यादा पर सवाल
मंचासीन भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री बेदराम जांगड़े ने विधायक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने शासकीय कार्यक्रम में ढोल-नगाड़े, नृत्य और अत्यधिक स्वागत-सत्कार की अनुचित मांग की, जिसके लिए स्कूल प्रशासन पर दबाव डाला गया। जांगड़े ने इसे “शैक्षिक मंच की मर्यादा के खिलाफ” बताते हुए विधायक के व्यवहार को निंदनीय ठहराया। उन्होंने कहा, “विद्यालय बच्चों के भविष्य निर्माण का पवित्र स्थल है, न कि राजनीतिक प्रदर्शन का मंच। जनप्रतिनिधियों को सादगी और प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, लेकिन इस आयोजन में यह संदेश गौण हो गया।”
विधायक के लंबे भाषण, बार-बार स्वागत की मांग और राजनीतिक मुद्दों को अनावश्यक रूप से उठाने से कार्यक्रम का माहौल असहज हो गया। कई अतिथियों ने इसे शैक्षिक आयोजन के उद्देश्य के विपरीत बताया।
विकास कार्यों और क्षेत्रीय समस्याओं पर गंभीर आरोप
जांगड़े ने विधायक पर क्षेत्र में विकास कार्यों की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने जर्जर सड़कों, स्कूलों की बदहाल स्थिति, अवैध वसूली, शराब और सट्टा जैसे गैरकानूनी कारोबारों को संरक्षण, सरकारी योजनाओं में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया। स्थानीय नागरिकों ने भी शिकायत की कि बिलाईगढ़ क्षेत्र में विकास कार्य ठप हैं, जबकि जनप्रतिनिधि व्यक्तिगत प्रचार और राजनीतिक प्रदर्शन में व्यस्त हैं। जांगड़े ने कहा, “यह विडंबना है कि भ्रष्टाचार में लिप्त रहने वाली विधायक शासकीय आयोजन में स्वागत-सत्कार की अपेक्षा करती हैं, जो उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।”
धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर चिंता
जांगड़े ने विधायक के पूर्व बयानों और कथित तौर पर एक विवादित धर्मगुरु के समर्थन को भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि विधायक ने पंजाब के एक धर्मगुरु, जो वर्तमान में दुष्कर्म के मामले में जेल में हैं, को अपना “माई-बाप” बताया था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जांगड़े ने आरोप लगाया कि सरसीवा क्षेत्र में धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विधायक की भूमिका अस्पष्ट और चिंताजनक रही है। उन्होंने कहा, “विधायक के बयान और आचरण से स्पष्ट है कि वह धर्मांतरण को बढ़ावा देने में संलिप्त रही हैं, जो क्षेत्र की सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा है।”
उक्त कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडे, भाजपा जिला अध्यक्ष शज्योति पटेल, पूर्व जिलाध्यक्ष सुभाष जालान, कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे, जिला पंचायत सीईओ इंद्रजीत बर्मन, एसडीएम वर्षा बंसल, नगर पंचायत अध्यक्ष गुलेचन बंजारे, बीईओ सतनारायण साहू, शाला विकास समिति अध्यक्ष अलगराम साहू, मयंक अग्रवाल, नारायण साहू, भाजपा नेता दुर्गेश केशरवानी, शिवरात्रि केशरवानी, जिला पंचायत सदस्य शिवानी साहू, सुनील शर्मा,नीलेश दुबे सहित क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
कार्यक्रम अंततः वृक्षारोपण और छात्र सम्मान के साथ संपन्न हुआ, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि शैक्षिक संस्थानों को राजनीतिक प्रदर्शन से मुक्त रखा जाना चाहिए। उन्होंने जनसेवकों से विकास, शिक्षा और जवाबदेही को प्राथमिकता देने की अपील की। जांगड़े ने कहा, “शिक्षा के मंदिरों में बच्चों का भविष्य संवारने का कार्य हो, न कि सस्ती लोकप्रियता और राजनीति का प्रदर्शन।”
इस घटना ने क्षेत्र में विकास और सामाजिक मुद्दों पर गहन बहस छेड़ दी है, और जनता अब अपने प्रतिनिधियों से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है।



