मजदूरों के नाम पर एक करोड़ खा गए गोमर्डा के वन अधिकारी सुरेंद्र अजय

जांच होने पर और कई अधिकारी, कर्मचारियों के नाम हो सकता है खुलासा

- कार्यरत श्रमिकों और बैंक को भेजी गई सूची में मिला अंतर, पीसीसीएफ ने वनक्षेत्रपाल को किया सस्पेंड
सारंगढ खबर न्यूज। वन विभाग में भ्रष्टाचार का कोई अंत नहीं है। मामले इसलिए आसानी से सामने नहीं आते क्योंकि ज्यादातर काम जंगलों के अंदर कराए जाते हैं। इस बार गोमर्डा अभ्यारण्य में एक बड़े गबन का भांडा फूटा है। डैमेज कंट्रोल के लिए रेंजर को सस्पेंड कर दिया गया है। शासन ने गोमर्डा अभ्यारण्य में वन्य जीवों के लिए और सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपए आवंटित किए थे। अभ्यारण्य के अंदर टमटोरा और माड़ोसिल्ली जलप्रपात के पास कई काम स्वीकृत किए गए। राशि भी भरपूर मिली।
मजदूरों से काम लिया जाना था। फरवरी 2024 में यह गड़बड़ी की गई। श्रमिकों की लिस्ट बनाकर बैंक को भेजी जानी थी ताकि एनईएफटी से एकाउंट में भुगतान हो सके। यहीं पर गड़बड़ी की गई। बताया जा रहा है कि रेंजर सुरेंद्र कुमार अजय ने मजदूरों की लिस्ट और बैंक सूची में भुगतान का आंकड़ा अलग-अलग भेजा। मतलब जितने मजदूरों ने काम किया, उससे अधिक लोगों की सूची भेजी गई। बैंक को भेजे गए भुगतान पत्रक ओर डीएफओ द्वारा स्वीकृत प्रमाणकों की सूची में श्रमिकों की संख्या व अन्य जानकारी में अंतर था।
इसकी शिकायत होने के बाद जांच के आदेश दिए गए। करीब 1,04,86,465 रुपए का अंतर पाया गया। मतलब इतनी राशि का भुगतान ज्यादा कर दिया गया जबकि श्रमिकों की स्वीकृत सूची में इससे कम राशि का भुगतान करने का आदेश था। रेंजर ने एक करोड़ रुपए से अधिक राशि का गबन कर लिया। जांच प्रतिवेदन के आधार पर तत्कालीन रेंजर सुरेंद्र कुमार अजय को सस्पेंड कर दिया गया है।
गोमर्डा में करोड़ों के वारे-न्यारे
सारंगढ़-बिलाईगढ़ वनमंडल के अंतर्गत आने वाले गोमर्डा अभ्यारण्य के अंदर माड़ोसिल्ली जलप्रपात और टमटोरा में पर्यटन के लिहाज से विकास करने के लिए भरपूर फंड आवंटित किया गया है। पूर्व में रायगढ़ जिला मुख्यालय से भी लाखों रुपए दिए गए थे, लेकिन इस रकम की बंदरबांट की गई। बेहद घटिया क्वालिटी के काम पर लाखों रुपए फूंके गए। वन विभाग ने इसे प्रमाणित करके ठेकेदार को भुगतान भी कर दिया।



