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बिलाईगढ़ में प्रशासनिक तानाशाही। विकास रोकने और भ्रष्टाचार दबाने के लिए CMO के घर घुसी अधिकारियों की टोली; SDM रजक के इशारे पर तहसीलदार की दादागिरी।

बिलाईगढ़ में प्रशासनिक तानाशाही। विकास रोकने और भ्रष्टाचार दबाने के लिए CMO के घर घुसी अधिकारियों की टोली; SDM रजक के इशारे पर तहसीलदार की दादागिरी।

​ बिलाईगढ़ (सारंगढ़-बिलाईगढ़)
दिनांक। 07 सितंबर 2026
​नगर पंचायत बिलाईगढ़ में प्रशासनिक मर्यादा, जनहित और शासकीय नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वाला एक बड़ा राजनीतिक-प्रशासनिक षड़यंत्र उजागर हुआ है। नगर पंचायत बिलाईगढ़ के नवपदस्थ मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) यशवंत देवांगन के निजी निवास में 7 सितंबर 2026 की शाम 6:01 बजे तहसीलदार नीलिमा अग्रवाल, नायब तहसीलदार देवराज सिदार, पटवारी प्रमोद तांडे, कंप्यूटर ऑपरेटर यशवंत पटेल तथा भृत्य कुमारी नाई कुर्रे दल-बल के साथ बिना किसी अनुमति बलपूर्वक और हिंसक रवैये के साथ ज़बरदस्ती घुस आए।
​इस पूरी अनाधिकृत व हिंसक कार्रवाई के मुख्य सूत्रधार SDM प्रफुल्ल रजक स्वयं CMO के घर के बाहर खड़े होकर निगरानी कर रहे थे और उन्हीं के इशारे पर पूरी टीम को घर के भीतर भेजकर धमकाने व दबाव बनाने का खेल रचा गया।
​पूर्व CMO के 50 लाख के गबन की जाँच दबाने और नए विकास कार्यों को रोकने की साज़िश
​इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की मुख्य वजह नगर पंचायत बिलाईगढ़ में व्याप्त भ्रष्टाचार और विकास कार्यों की राजनीति है। बिलाईगढ़ के पूर्व विवादित CMO सुशील चौधरी के कार्यकाल में पूरा विकास कार्य ठप्प पड़ा हुआ था। वे शासकीय दायित्वों को छोड़कर राजनीति में ज़्यादा सक्रिय रहते थे, जिसके कारण क्षेत्र का विकास पूरी तरह से रुक गया था। सुशील चौधरी पर लगभग 50 लाख रुपये के वित्तीय गबन का गंभीर आरोप है।
​इस गबन की जाँच के आदेश स्वयं कलेक्टर द्वारा दिए गए थे और जाँच का प्रभार तहसीलदार नीलिमा अग्रवाल को सौंपा गया था। किंतु अचरज की बात है कि तहसीलदार नीलिमा अग्रवाल ने आज तक इस बड़े भ्रष्टाचार की जाँच को आगे नहीं बढ़ाया। जब बिलाईगढ़ के सर्व समाज ने बदहाल व्यवस्था के खिलाफ कई दिनों तक उग्र हड़ताल और धरना-प्रदर्शन किया, तब जाकर शासन ने नए CMO यशवंत देवांगन को बिलाईगढ़ भेजा।
​सड़क-गली का निर्माण शुरू होते ही तिलमिलाया प्रशासन
​नवागत CMO यशवंत देवांगन ने पदभार सँभालते ही बिलाईगढ़ की जर्जर गलियों, बदहाल सड़कों और ठप्प पड़े विकास कार्यों का निर्माण कार्य तेज़ी से शुरू कराया। लेकिन बिलाईगढ़ का विकास और भ्रष्टाचार का उजागर होना एसडीएम और तहसीलदार को रास नहीं आ रहा है। आरोप है कि एसडीएम व तहसीलदार लगातार नए CMO पर दबाव बना रहे थे कि “तुम्हें यहाँ सड़क और गली बनवाने की कोई ज़रूरत नहीं है।” चर्चा यह भी आम है कि SDM प्रफुल्ल रजक विवादित पूर्व CMO सुशील चौधरी को वापस बिलाईगढ़ लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।
​दस्तावेज़ों से छेड़छाड़, धमकी और 112 डायल कर बुलानी पड़ी पुलिस।
​विकास कार्यों को रुकवाने और दबाव बनाने की नीयत से ही एसडीएम के शह पर तहसीलदार नीलिमा अग्रवाल व उनकी टीम शाम 6:01 बजे CMO देवांगन के घर में घुसी। अधिकारियों ने घर में प्रवेश करते ही वीडियो बनाना शुरू किया और वहाँ मौजूद पार्षदों (हरेश देवांगन, उमाशंकर देवांगन, सौभाग्य शरण सिंह, छबिराम यादव) के सामने ही CMO को धमकाना व उनके शासकीय-निजी दस्तावेजों से छेड़छाड़ करना शुरू कर दिया।
​शासन के आदेश से स्थानांतरित होकर आए CMO को लिखित आदेश दिए बिना जॉइनिंग से रोका जा रहा है और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। ऑफिस समय खत्म होने के बाद पारिवारिक माहौल में इस प्रकार की गुंडागर्दी से क्षुब्ध होकर CMO को तत्काल 112 डायल कर पुलिस बुलानी पड़ी।

​ दोषियों पर FIR और सुरक्षा की माँग
​एक तरफ जहाँ बिलाईगढ़ की जनता सड़कों और विकास के लिए तरस रही थी, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन विकास कार्य करने वाले अधिकारी को दबाने और 50 लाख के गबन के आरोपी को संरक्षण देने में जुटा है। यह घटना दर्शाती है कि बिलाईगढ़ में किस कदर प्रशासनिक तानाशाही हावी है। पीड़ित CMO यशवंत देवांगन ने थाना प्रभारी बिलाईगढ़ से SDM प्रफुल्ल रजक, तहसीलदार नीलिमा अग्रवाल सहित घुसपैठ करने वाले तमाम कर्मचारियों पर कड़ी धाराओं में नामजद FIR दर्ज करने और अपने निवास व जीवन की तत्काल सुरक्षा (Protection) प्रदान करने की गुहार लगाई है।

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