सारंगढ़-बिलाईगढ़शिक्षा विभाग

सारंगढ में शिक्षा विभाग लापरवाह, शिक्षकों की मनमानी चरम पर*

कई वर्षो से विकलांग शिक्षक स्कूलो में खानापूर्ति साईन कर घर आ जाते है तो कई शिक्षक स्कूल में पढ़ाने अपने स्थान पर कर रखे है व्यवस्था

*सारंगढ में शिक्षा विभाग लापरवाह, शिक्षकों की मनमानी चरम पर*

**कई वर्षो से विकलांग शिक्षक स्कूलो में खानापूर्ति साईन कर घर आ जाते है तो कई शिक्षक स्कूल में पढ़ाने अपने स्थान पर कर रखे है व्यवस्था**

**शिक्षा विभाग में नेतागिरी हावी,बच्चों का भविष्य अधर में**

**शिक्षा विभाग में बाबूराज से सारंगढ़ जिले की जनता त्रस्त**

**नये जिला शिक्षा अधिकारी के आने से होगा शिक्षा विभाग में लापरवाह शिक्षकों पर कड़ी कार्यवाही**

सारंगढ़ खबर, सारंगढ़—-सारंगढ बिलाईगढ़ कहने को तो जिला बन गया मगर जिला बनने के बाद जिला कार्यालयों की हाल बद से बदतर है,, कई जिला कार्यालयों में बाबूराज इस कदर हावी है कि जिले के जनप्रतिनिधियों समाजसेवियों को भी सोशल मीडिया के माध्यम से सफेद पोश कुर्शीधारी जननेता व जिला प्रशासन को गुहार लगाई जा रही है। क्या वरिष्ठ ईमानदार अधिकारी और शिक्षित जनप्रतिनिधियों के कमी का फायदा उठा रहे हैं चंद कर्मचारी ?

गौरतलब हो कि सारंगढ़ शिक्षा विभाग हमेशा से अपने कारनामों को लेकर सुर्खियां बटोरता रहा है उस पर जिला हो या फिर ब्लॉक कोई भी काम के लिए बाबूराज हावी है। लंबे समय से सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय बाबूओ के कार्यप्रणाली से आम जनता परेशान है। सारंगढ़ शिक्षा विभाग और उनके अधिकारियों का हाल देखें तो यहां यह बताना लाजमी होगा की सारंगढ़ शहर के अंदर जिला शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी के कार्यालय और उक्त अधिकारियों के बैठने के बाद भी नगर पालिका के अंदर सहित आसपास के गांव के स्कूलों में पदस्थ विकलांग रूपी शिक्षक या यूं कहें कि अपने विकलांगता और नेतागिरी का फायदा उठा कर स्कूलों में साइन कर बिना पढ़ाये ही स्कूल से घर जल्दी आ जाते है और कई शिक्षक तो ऐसे भी है जो स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए अपनी जगह दुसरो को कुछ पैसा देकर व्यवस्था करा कर वर्षो से बैठे है और बाहर में ठेकेदारी या अन्य दूसरा काम कर हर महीने मोटी रकम अपनी जेब मे भर रहे है जिन पर शिक्षा विभाग के अधिकारीयो का कोई कार्यवाही नही किया जा रहा है। एक ओर सरकार स्वामी आत्मानंद स्कूल की खूबी गिना रही है, सरकार से जुड़े तमाम जनप्रतिनिधि अपने भाषणों में आत्मानंद स्कूल के बखान करने से नहीं थकते तो दूसरी ओर सारंगढ़ अंचल में शिक्षा का हाल इस कदर बेहाल है की कई सरकारी स्कूलों में बच्चे एडमिशन नहीं ले रहे या फिर वहां से अपना स्थानांतरण करवा रहे हैं। जिसका ताजा उदाहरण है कि सारंगढ़ के कई स्कूलों में महज 2 या 4 छात्र ही बच गए हैं और इन दो – चार छात्रों को पढ़ाने के लिए आधा दर्जन से भी अधिक शिक्षक अच्छी शिक्षा का हवाला देकर उन स्कूलों में डटे हुए हैं इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की शिक्षा विभाग वहां पदस्थ शिक्षा अधिकारी और स्कूलों के शिक्षक कितनी इमानदारी से सरकार की मोटी पगार लेकर बच्चों को शिक्षा दे रहे। शासन द्वारा चलाये जा रहे युक्तियुक्तकरण के तहत बहुत से सरकारी स्कूलों में सुधार किया गया है परंतु अभी भी जंगली क्षेत्रों से लगे बहुत से सरकारी स्कूलो में आज भी कई शिक्षक अपनी मनमर्जी से स्कूल जाकर साइन करते है या अपने स्थान पर किसी दूसरे व्यक्ति को व्यवस्था में स्कूल पढ़ाने भेजते है।हाल ही में सारंगढ़ जिले के नये जिला शिक्षा अधिकारी जे आर डहरिया ने पदभार ग्रहण किया है और उनके द्वारा कुछ स्कूलों में निरीक्षण भी किया गया है।जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जिले के सभी एबीओ को नोटिस भी दिया गया है जो विभाग के अधिकारियों की कमजोरियों की पोल खोलती नजर आ रही है।अगर जल्द ही सारंगढ जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा हर स्कूलों का औचक निरीक्षण किया जाये तो और भी खामियां नजर आयेगी,जिसमे समय रहते सुधार किया जा सकता है।

**जिले के इन स्कूलों में शिक्षक रहते है नदारत**

सूत्रों से पता चला है सारंगढ़ जिले के जंगली क्षेत्रों से जुड़े प्रायमरी,मिडिल सरकारी स्कूलों में जैसे सारंगढ़ के सहसपानी,जामपाली, बरमकेला के सेमरापाली और बिलाईगढ़ के गौरडीह स्कूलों में शिक्षक समय पर पढ़ाने स्कूल में उपस्थित नही होते या अपने स्थान पर दूसरे व्यक्ति को भेजते है।ऐसे छोटे स्कूलों में शिक्षक अपनी मनमानी करते है तो वहाँ के बच्चों पर पढ़ाई का क्या असर होगा।ऐसे में अगर जिला प्रशासन और जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा ऐसे स्कूलों में जांच कर कामचोर शिक्षकों पर जल्द ही अगर लगाम नही लगाया जाएगा तो उस स्कूल के बच्चों का भविष्य अंधकारमय होना निश्चित ही है।

सारंगढ़ क्षेत्र में शिक्षा का आलम यह है कि कई शिक्षक बड़े-बड़े पदों का हवाला देकर मैं इस शिक्षा संगठन का अध्यक्ष, मैं प्रदेश, तो मैं जिला, तो मैं ब्लॉक अध्यक्ष या तो ज्ञापन सौंप रहे है या कलेक्ट्रेट का घेराव कर रहे या जिला शिक्षा कार्यालय में हंगामा मचा रहे, आखिर यह सब पढ़ाते कब है और धन्य है सारंगढ़ के कुर्सीधारी जनप्रतिनिधि जो इन्हें बड़े-बड़े मंचों पर सम्मानित भी करते है।
पूर्व में सारंगढ बीईओ ने कुछ ऐसे ही स्कूल के शिक्षकों को हर रोज लेटलतीफी करने पर नोटिस जारी किया था। जिस पर सारंगढ़ विकासखंड के शिक्षा अधिकारी ने कुछ ग्रामीण अंचल के स्कूलों का औचक निरीक्षण किया था जहा कई स्कूलो पर शिक्षक 12:30 बजे तक स्कूल परिसर में नहीं पहुंचे थे जिस पर खंड शिक्षा अधिकारी ने 5 शिक्षकों के नाम पर नोटिस जारी किया था। इससे पता चलता है कि सारंगढ़ के कई स्कूलों में शिक्षक समय पर स्कूल नहीं पहुंचते अगर 1 या 2 शिक्षक होते तो बात बन जाती लगभग आधा दर्जन शिक्षक घंटों देर तक ना होना अंदाजा लगाया जा सकता है सारंगढ़ विकासखंड में शिक्षा का हाल क्या है?

**पूर्व के घाघ शिक्षक रहे बैरागी और एल पी पटेल की जोड़ी**

आपको ज्ञात होगा कि कुछ साल पहले सारंगढ़ के शिक्षा विभाग कालोनी में सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ हुआ था जिसमे तत्कालीन सारंगढ़ बीएओ डहरिया,मल्टीपर्पज स्कूल के प्रिंसिपल एल पी पटेल और वर्तमान में कन्या शाला के प्रिंसिपल एस आर बैरागी का नाम सामने आया था जिससे पूरे प्रदेश में जमकर हंगामा हुआ था।उस समय तत्कालीन बीएओ ने अपना ट्रांसफर सारंगढ़ से दूसरे जिले में करा लिया था परंतु दोनों घाघ प्रिंसिपल एल पी पटेल और एस आर बैरागी आज तक सारंगढ़ में ही पदस्थ रहे।इन दोनों की जोड़ी सबसे घाघ अधिकारी के नाम से आज भी सारंगढ़ नगर की जनता जानती है।सारंगढ़ नवीन जिला बनते ही शिक्षक एल पी पटेल सारंगढ़ में जिला शिक्षा अधिकारी बन कर आये जो वर्तमान में अपनी गलत कार्यप्रणाली के कारण सस्पेंड चल रहे है परंतु इन दोनों अधिकारियों को सजा मिल गई लेकिन अभी भी सारंगढ़ नगर के सबसे बड़े सरकारी स्कूल कन्या शाला में वर्षो से पदस्थ एस आर बैरागी के ऊपर शासन,प्रशासन का कोई भी कड़ी कार्यवाही नही हुआ है।कन्या शाला के प्रिंसिपल बैरागी पूर्व की घटना को भूलकर अपनी सेवा चुपचाप दे रहे है ताकि फिर कहि उनका नाम सेक्स रैकेट की घटना को याद कर प्रशासन की कोई बड़ी कार्यवाही उन पर ना हो जाये।असल मे अगर देखा जाये तो सारंगढ़ के सबसे बड़े सरकारी स्कूल कन्या शाला में ऐसे शिक्षक की जरूरत नही है जो सेक्स रैकेट जैसे घृणित कार्य मे संलिप्त हो,और जो वर्तमान में कन्या शाला में पदस्थ होकर अपनी सेवा दे।ऐसे शिक्षक को नगर के सभी गणमान्य नागरिक, नेता,जनप्रतिनिधि,पत्रकार लोग मांग करते है कि कन्या शाला में वर्षो से पदस्थ प्रिंसिपल एस आर बैरागी को भी अब सारंगढ़ से अन्यत्र जगह ट्रांसफर कर देना चाहिये या उन्हें स्वयं सारंगढ़ से बाहर चल देना चाहिए।

*क्या कहते हैं अधिकारी* –

मेरे द्वारा स्कूलों का समय समय पर निरीक्षण किया जायेगा और अगर निरीक्षण के दौरान पता चला कि कोई शिक्षक अपनी जगह दूसरे को स्कूल पढ़ाने या विकलांग होने का फायदा उठा कर स्कूल से जल्दी चले जाते है ऐसे दोषी शिक्षकों के ऊपर तत्काल कार्यवाही किया जाएगा।

जिला शिक्षा अधिकारी सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला।

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