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सारंगढ में मैरिज हॉल माफियायो का खेल: बिना पंजीयन किये धड़ल्ले से हो रहा संचालन*

नगर पालिका को चूना, राजस्व में करोड़ों की सेंध

सारंगढ़ -बिलाईगढ़। जिले में इन दिनों शादी-विवाह और सामाजिक आयोजनों के नाम पर संचालित हो रहे मैरिज हॉलों ने व्यवस्था की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। शहर के अलग-अलग हिस्सों में बिना किसी वैध पंजीयन के दर्जनों मैरिज हॉल वर्षों से संचालित हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। इन मैरिज हॉलों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश मैरिज हॉल का नगर पालिका में कोई विधिवत पंजीयन नहीं है। नियमों को दरकिनार कर इनका संचालन खुलेआम किया जा रहा है, जिससे शासन को मिलने वाला राजस्व सीधे-सीधे प्रभावित हो रहा है। जानकारों की मानें तो हर साल लाखों रुपये का राजस्व इन अवैध संचालन के चलते नगर पालिका के खाते में नहीं पहुंच पा रहा है। यह सीधी-सीधी आर्थिक क्षति है, जिसका खामियाजा अंततः आम जनता को भुगतना पड़ता है। शहर के प्रमुख मार्गों और रिहायशी इलाकों में संचालित ये मैरिज हॉल पार्किंग की कोई समुचित व्यवस्था नहीं रखते। नतीजतन सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और जाम की स्थिति बन जाती है। एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं तक का रास्ता बाधित हो जाता है, लेकिन इस गंभीर समस्या पर न तो पालिका ध्यान दे रही है और न ही ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा खेल बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं है। वर्षों से कुछ पालिका कर्मचारी निजी स्वार्थ साधते हुए इन अवैध मैरिज हॉल संचालकों को संरक्षण दे रहे हैं। नियमों की अनदेखी कर इनको खुली छूट दी जा रही है, जिससे यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन भी हरकत में आया है। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने पूरे मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया है कि नगर पालिका की भूमिका की भी जांच की जाएगी और यदि किसी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बहरहाल अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन का यह आश्वासन केवल कागजों तक सीमित रहता है या फिर वास्तव में धरातल पर कार्रवाई देखने को मिलती है। फिलहाल जिले की जनता को इस बात का इंतजार है कि कब इन अवैध मैरिज हॉलों पर लगाम लगेगी, यातायात व्यवस्था सुधरेगी और नगर पालिका को उसका हक का राजस्व मिल पाएगा।

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