कांग्रेसी नेता व पूर्व जनपद सदस्य दिनेश बंजारे सारंगढ कोतवाली पुलिस के गिरफ्त में**

*कांग्रेसी नेता व पूर्व जनपद सदस्य दिनेश बंजारे सारंगढ कोतवाली पुलिस के गिरफ्त में**
🔸 *01 आरोपी गिरफ्तार ,बैंक खाते से हुए कुल 27175719 रु के ट्रांजेक्शन*
🔸 *भारत के विभिन्न राज्यों में 56 शिकायत है दर्ज*
सारंगढ खबर न्यूज,सारंगढ——जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ के अति पुलिस अधीक्षक श्रीमती निमिषा पाण्डेय एवं एसडीओपी के मार्गदर्शन में सिटी कोतवाली पुलिस को सायबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्यवाही करते हुऐ म्युल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले एक आरोपी को गिरफतार करने में सफलता प्राप्त हुई है।दिनेश बंजारे कांग्रेस नेता होने के साथ ही पूर्व में सारंगढ जनपद पंचायत सदस्य(बीडीसी) भी रह चुका है।
आरोपी का नामः- दिनेश बंजारे पिता स्व0 जोहन लाल ग्राम ग्वालीनडीह थाना सारंगढ जिला सारंगढ बिलाईगढ छ0ग0 का निवासी है।
साइबर पोर्टल से प्राप्त शिकायत जांच में अवैध ट्रांजेक्शन पाये जाने पर म्यूल अकाउंट धारक दिनेश बंजारे के खिलाफ थाना सारंगढ़ में अप क्र 323/2026 धारा 317(4),317(5)BNS कायम कर विवेचना में लिया गया।जांच के दौरान यह जानकारी प्राप्त हुई कि आरोपी अपना बैंक खाता ,एटीएम कार्ड, पास बुक और मोबाईल सीम सायबर ठग को उपलब्ध कराया था। इसके बदले उसे मोटी रकम मिल रही था। गृह मंत्रालय के साइबर पुलिस पोर्टल , समन्वय पोर्टल और कई सायबर शिकायतो के विष्लेशण के दौरान संदिग्ध बैंक खाते की जानकारी मिली| एक वर्ष के अंतराल में आरोपी के खाते में करीब 27175719 *(दो* *करोड़ इकहत्तर लाख पचहत्तर हजार सात सौ उन्नीस रु* )का ट्रांजेक्शन हुआ है और आरोपी के द्वारा उपलब्ध कराये गये बैक खाते के खिलाफ विभिन्न राज्यो में 56 सायबर धोखधड़ी की शिकायते दर्ज है। आरोपी दिनेश बंजारे से पुछताछ पर बताया कि खाता उपलब्ध कराने के एवज में उसे कमीशन मिल रहा था। आरोपी के कब्जे से बैकिंग दस्तावेज, एटीएम कार्ड, मोबाईल और सीम कार्ड तथा एक रॉयल एनफील्ड बुलेट वाहन को जप्त किया गया है। आरोपी को दिनांक 05.07.2026 को विधिवत गिरफतार कर न्यायिक रिमाण्ड पर भेजा गया है।
समस्त कार्यवाही में सारंगढ़ थाना प्रभारी प्रमोद यादव, सउनि नरेंद्र मनहर प्र आर भँवर काटले,आर गणेश साहू,गौतम जांगड़े,साइबर सेल से रामकुमार मानिकपुरी,विजय यादव,दीपक मैत्री शामिल रहे।
*क्या होता है म्युल अकाउंटः* – सायबर अपराध में म्युल अकांउट ऐसे बैंक खातो को कहा जाता है जिसका इस्तेमाल ठगी से मिली रकम को छिपाने और आगे ट्रासफर करने के लिए किया जाता है। खाता धारक कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता अपराधियों को देते है इसके बाद ठगी की रकम इन खातो में जमा कराई जाती है और कुछ ही समय में अलग अलग खातो में भेज दी जाती है।



