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2026 सारंगढ़ नगरपालिका चुनाव: भाजपा,कांग्रेस पार्टी में संभावित चेहरों पर मंथन*

चुनाव प्रभारी रजनीश सिंह,उमेश अग्रवाल, पूनम सोलंकी,शंकर अग्रवाल के नेतृत्व में बैठक शुरू,ग्रामीण नेता बनाम शहरी पकड़ की परीक्षा तेज**

*2026 सारंगढ़ नगरपालिका चुनाव: भाजपा,कांग्रेस पार्टी में संभावित चेहरों पर मंथन**
**चुनाव प्रभारी रजनीश सिंह,उमेश अग्रवाल, पूनम सोलंकी,शंकर अग्रवाल के नेतृत्व में बैठक शुरू,ग्रामीण नेता बनाम शहरी पकड़ की परीक्षा तेज**

सारंगढ़-बिलाईगढ़।
2026 के अंतिम माह दिसंबर में होने वाले नगर पालिका चुनाव को लेकर अब सारंगढ में भाजपा और कांग्रेस पार्टी आमने सामने आ चुकी है।आगामी नगर पालिका चुनाव के लिए भाजपा ने नगर पालिका चुनाव प्रभारी रजनीश सिंह,सहप्रभारी उमेश अग्रवाल, पूनम सोलंकी और जिला प्रभारी शंकर अग्रवाल के नेतृत्व में बैठक संपन्न हुआ।सारंगढ नगरपालिका की शहर सरकार को लेकर राजनीतिक गतिविधियां अब तेज होने लगी हैं। आज आगामी नगर पालिका चुनाव को लेकर भाजपा कार्यालय में बैठक भी सुनिश्चित किया गया था जिसमे भाजपा से लगभग 100 कार्यकर्ता शामिल हुए जिसमे नगर पालिका चुनाव के लिए कुल 7 नामो ने अपने नाम पर हाथ खड़े किये जिसमे भाजपा के वरिष्ठ नेता अरविंद हरिप्रिया, हरिनाथ खूंटे,जीवन रात्रे,वीरेंद्र निराला,संजय चौहान,रामाधार चौहान और अविनाश चौहान सहित कुल 7 नाम सामने आए है।चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया और दलों की अधिकृत घोषणा से पहले ही विभिन्न राजनीतिक दलों में संभावित प्रत्याशियों के नामों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार भाजपा, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी से कुछ संभावित चेहरे सामने आ रहे हैं। हालांकि अंतिम प्रत्याशी का फैसला संबंधित दलों द्वारा अधिकृत रूप से किया जाना बाकी है।

भाजपा से इन सात नामो पर चर्चा

भाजपा की ओर से संभावित प्रत्याशियों के रूप में:

1. हरिनाथ खूंटे
2. वीरेंद्र निराला
3. जीवन रात्रे
4. अरविंद हरिप्रिया
5. रामाधार चौहान
6.संजय चौहान
7.अविनाश चौहान के नामों पर चर्चा।
इनमें अरविंद हरिप्रिया,हरिनाथ खूंटे का नाम राजनीतिक रूप से सबसे अधिक चर्चा में दिखाई दे रहा है। उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और संगठन से जुड़े समीकरणों को देखते हुए उनकी संभावित दावेदारी पर स्थानीय राजनीतिक हलकों की विशेष नजर है।तो वही भाजपा से वीरेंद्र निराला,जीवन रात्रे भी इस रेस में पकड़ बनाये रखे है,उनको संगठन का अच्छा खासा अनुभव है।वही रामाधार चौहान,संजय चौहान व अविनाश चौहान भी रेस में शामिल है।
आज जिला भाजपा कार्यालय में सारंगढ़ मंडल का आगामी नगर पालिका परिषद के निमित् महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुई , जिसमे जिला प्रभारी शंकर अग्रवाल, चुनाव प्रभारी रजनीश सिंह, सह प्रभारी उमेश अग्रवाल, श्रीमती पूनम सोलंकी, जिला अध्यक्ष ज्योतिलाल पटेल, मंडल प्रभारी स्वप्निल स्वर्णकार, जिला महामंत्री अमित तिवारी, मंडल अध्यक्ष जय प्रकाश बानी, सहित मंडल के वरिष्ठ नेता एवं सैंकड़ो कार्यकर्ताओं की गरिमामई उपस्थिति में संपन्न हुआ।

कांग्रेस में 5 नाम संभावित चेहरे

कांग्रेस खेमे में संभावित दावेदारों के रूप में:

1. अजय बंजारे
2. सरिता मल्होत्रा
3. किशोर निराला
4. मंजुलता आनंद
5. जगदीश अजगळे
के नाम सामने आ रहे हैं।

जिलाध्यक्ष जिला कांग्रेस कमिटी के इस महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस के लिए प्रबल दावेदार के रूप में अजय बंजारे का नाम सबसे ऊपर देखा जा रहा है,वर्तमान में अजय बंजारे नगर पालिका अध्यक्ष के पति और नगर पालिका के प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रहे है।सारंगढ विद्यायक खेमा और जिलाध्यक्ष खेमा के चहेते अजय बंजारे का नाम सबसे आगे देखा जा रहा है,चुनाव का अच्छाखासा अनुभव और पार्षदों से तालमेल बिठाने में अजय बंजारे का कोई तोड़ नही।हालांकि कांग्रेस पार्टी को उम्मीदवार चयन में कुछ और पदाधिकारी है जिन पर विचार विमर्श किया जा रहा है जिसमे कांग्रेस नेत्री सरिता मल्होत्रा को अजय बंजारे के बाद सबसे मजबूत प्रत्यासी के रूप में देखा जा रहा है तो वही सेवा दल की प्रदेशाध्यक्ष मंजू लता आनंद,किशोर निराला,जगदीश अजगळे, भी पार्टी के जाने माने मजबूत चेहरे है।इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी को ऐसे चेहरे की तलाश होगी जो संगठन के साथ-साथ नगरपालिका क्षेत्र में व्यक्तिगत जनसंपर्क और मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता रखता हो।

**बसपा की ओर से एक नाम देव कोसले**

बहुजन समाज पार्टी की ओर से देव कोसले का नाम संभावित प्रत्याशी के रूप में चर्चा में है।

यदि बसपा मजबूत तरीके से चुनाव मैदान में उतरती है तो वह सीधे मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की स्थिति में आ सकती है। विशेष रूप से कुछ वार्डों में बसपा का प्रदर्शन भाजपा और कांग्रेस दोनों के वोट समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

**मुकाबला केवल पार्टी का नहीं, मजबूत चेहरा जरूरी**

सारंगढ़ नगरपालिका चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि मतदाता पार्टी के चुनाव चिन्ह को प्राथमिकता देते हैं या प्रत्याशी के व्यक्तिगत जनाधार को।

नगरपालिका चुनावों में सड़क, नाली, पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट, यातायात, अतिक्रमण, बाजार व्यवस्था और नगरपालिका की जवाबदेही जैसे स्थानीय मुद्दे अक्सर राजनीति पर भारी पड़ सकते हैं। यही कारण है कि संभावित प्रत्याशियों के लिए केवल राजनीतिक पहचान पर्याप्त नहीं होगी। वार्ड और नगर स्तर पर लगातार जनसंपर्क, मतदाताओं से सीधा संवाद और स्थानीय समस्याओं को समझने की क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

हरिनाथ खूंटे,जीवन रात्रे के नाम को लेकर क्यों चर्चा?

भाजपा के संभावित चेहरों में हरिनाथ खूंटे,जीवन रात्रे का नाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनके पीछे राजनीतिक परिवार और संगठनात्मक नेटवर्क का प्रभाव माना जा रहा है। लेकिन नगरपालिका चुनाव में किसी राजनीतिक परिवार की पृष्ठभूमि अपने आप जीत की गारंटी नहीं होती। वास्तविक परीक्षा तब होगी जब प्रत्याशी को शहरी मतदाताओं के बीच अपना व्यक्तिगत जनाधार साबित करना होगा।

यहीं से “ग्रामीण राजनीतिक प्रभाव बनाम शहरी जनस्वीकार्यता” का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है।

**2026 नगर पालिका कांग्रेस के लिए चुनौती**

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संभावित दावेदारों में से ऐसे चेहरे का चयन करने की होगी जो पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम मतदाता को भी स्वीकार्य हो। यदि कांग्रेस मजबूत स्थानीय मुद्दों के साथ चुनाव मैदान में उतरती है और संगठनात्मक मतभेदों को नियंत्रित करने में सफल रहती है, तो मुकाबला कड़ा हो सकता है।

**नगर पालिका चुनाव में बसपा बिगाड़ सकती है समीकरण**

देव कोसले के रूप में बसपा यदि प्रभावी चुनाव अभियान चलाती है तो कुछ क्षेत्रों में वह भाजपा और कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकती है।
हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव उम्मीदवार की सक्रियता, संगठन की ताकत और वार्डवार सामाजिक एवं राजनीतिक समीकरण पर निर्भर करेगा।
फिलहाल यह मुकाबला भाजपा बनाम कांग्रेस के बीच दिखाई देता है, लेकिन बसपा की सक्रिय मौजूदगी इसे त्रिकोणीय राजनीतिक मुकाबले में बदल सकती है।
आने वाले समय में तीन चीजें सबसे महत्वपूर्ण होंगी—किसे टिकट मिलता है, किस प्रत्याशी का अपना व्यक्तिगत जनाधार कितना है और स्थानीय मुद्दों पर कौन मतदाताओं का भरोसा जीत पाता है।
सारंगढ़ की शहर सरकार के लिए अंतिम फैसला राजनीतिक दलों के कार्यालयों में नहीं, बल्कि मतदान केंद्रों पर आम मतदाता करेगा।

अभी नाम संभावित हैं, मुकाबला बाकी है और फैसला जनता के हाथ में है।चुनाव से जुड़े कई महत्वपूर्ण बात के लिए अगले अंक में इसका प्रकाशन किया जाएगा।

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