सरिया तहसीलदार के राज में गाड़ी मालिक परेशान , तहसीदार के पास नहीं कोई जवाब*

*सरिया तहसीलदार के राज में गाड़ी मालिक परेशान , तहसीदार के पास नहीं कोई जवाब*
*सरिया तहसीलदार हो रहा मालामाल , शासन प्रशासन की हो रही है किरकिरी*
*अवैध वसूली के लिए एक सप्ताह से थाना में खड़ी है गाड़ियां , लेकिन क्यों ? इसका जवाब थाना प्रभारी के पास भी नहीं*

सारंगढ़ क्षेत्र के ग्राम कटंगपाली में
आशिष गोयल के नाम से डी.बी. पावर प्लांट से परमिशन लिया गया था । परमिशन के अनुसार डी.बी. पावर प्लांट से फ्लाई एश ट्रांसपोर्टिंग किया जा रहा था, लेकिन गांव वालों ने शिकायत किया कि ग्राम पंचायत का एनओसी पुराना है , जबकि सभी ग्रामवासियों का परमिशन लेकर ही यह काम चालू किया गया था और यह काम चालू होते ही गांव के लोगों ने जिला कलेक्टर से शिकायत कर दी । शिकायत के बाद जांच के लिए सरिया के तहसीलदार साहब आए , जांच के बाद पता चला कि सभी परमिशन तो सही है , क्योंकि इसका परमिशन पर्यावरण विभाग रायगढ़ द्वारा जारी होता है । वहां जिस समय तहसीलदार साहब जांच के लिए पहुंचे हुए थे वहां 5-6 गाड़ियां खड़ी हुई थी और कुछ गाड़ियां ट्रांसपोर्टिंग कर रहे थे जिसमें कुछ गाड़ी लोड तथा कुछ खाली गाड़ी थी, तहसीलदार ने सभी गाड़ियों को जब्त किया और जब्त कर आगे की कार्यवाही के लिए भेजा गया । जब गाड़ी मालिकों ने तहसीलदार से संपर्क साधा तो संपर्क तो नहीं हो पाया , लेकिन वहां के बाबू से जाकर पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हमने सिर्फ गाड़ी को खड़ा किया है और किसी आधार पर कोई कागजी कार्यवाही नहीं की गई है । तहसीदार द्वारा इसका कोई नहीं दिया जा रहा है , इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तहसीलदार द्वारा लक्ष्मी जी की चढ़ावा का इंतज़ार किया जा रहा है तभी तो एक सप्ताह से ज्यादा होने को आ गया है सरिया थाना में गाड़ियों को केवल मुचलका खड़ा करा दिया गया है । ऐसे गाड़ियों को खड़ा करवाने से ट्रांसपोर्टरों को भारी नुकसानों का सामना करना पड़ रहा है और तहसीलदार को लग रहा है कि जब तक लक्ष्मी जी की चढ़ावा उनके पास नहीं जाएगा, तब तक वो गाड़ी छोड़ने को राजी ही नहीं है । ना तो कुछ कार्यवाही बता रहे हैं और ना ही गाड़ी को छोड़ रहे हैं , इससे साफ प्रतीत हो रहा है कि तहसीलदार मालामाल होने के लिए यह काम कर रहे हैं ।
*गाड़ी पर करेंगे कार्यवाही तो क्या कहता है नियम*
अगर किसी भी गाड़ी पर कोई भी अधिकारी या कर्मचारी कार्यवाही करता है तो जिस धारा में कार्यवाही की जाएगी चाहे कोई भी गुनाह हो कार्यवाही की एक प्रति गाड़ी मालिक को दिया जाता है, लेकिन यहां तो तहसीलदार का ही दादागिरी चल रहा है। जी हां ! हम सही कह रहे हैं, क्योंकि गाड़ी मालिकों ने जब सरिया थाना में
जाकर पूछा तो वहां थाना प्रभारी के पास भी कोई जवाब नहीं है । वहीं गाड़ी मालिकों ने बताया कि जब हमने थाने में थाना प्रभारी से पूछा कि हमारी गाड़ियों में किस धारा के तहत कार्यवाही की जा रही है , क्यों खड़ा करवाया गया है तो उनका जवाब आया कि इसका जवाब हमारे पास नहीं है। हमने खड़ा नहीं करवाया है, तहसीलदार साहब ने गाड़ी को खड़ा करवाया है उन्हीं से जाकर पूछिए। जब इस संबंध में गाड़ी मालिकों ने थाने से तहसील ऑफिस जाकर पूछा तो तहसीलदार तो नहीं थे, लेकिन उनका बाबू का कहना है कि तहसीलदार साहब आएंगे तो ही हमें पता चलेगा कि किस धारा के तहत कार्यवाही की गई है । उनके बताए अनुसार यह कार्यवाही माइनिंग विभाग के अधिकारी को सौंपी गई है, लेकिन सवाल यह है क्या माइनिंग विभाग फ्लाई एश पर कार्यवाही कर सकती है? माइनिंग विभाग का तो मूल काम है कि सिर्फ माइनिंग को देखें फ्लाई एश का काम प्रदूषण विभाग ही कर सकती है , लेकिन यहां तो लक्ष्मी जी की चढ़ावा सभी को चाहिए तभी तो तहसीलदार द्वारा आठ दिन से गाड़ियों को खड़ा कर अवैध रूप से वसूली करने के चक्कर में गाड़ी मालिकों को परेशान किया जा रहा है। आखिर भाजपा के राज में ऐसे ऐसे तहसीलदार अवैध उगाही करने के लिए गाड़ियों को खड़ा कर दे रहे हैं। ऐसे में भाजपा सरकार की किरकिरी हो रही है और शासन प्रशासन की भी घोर निंदा हो रही है।अब तो आने वाले समय ही बता पाएगा कि आगे क्या होगा ।
आज एक सप्ताह होने को है और गाड़ियों को थाना में खड़ा करा दिया गया है। ऐसा नहीं है कि सभी गाड़ियों में फ्लाई एस लोड है । एक गाड़ी जिसका वाहन क्रमांक सीजी 13 ए वाय 9948 है जो खाली है और एक गाड़ी लोड है। इसके बाद भी कोई कागजी कार्यवाही नहीं किया गया है और थाना में बेमतलब खड़ा करा दिया गया है। ऐसे में तो लोग-बाग कह रहे हैं कि तहसीलदार ही मालामाल होने के लिए गाड़ियों को एक सप्ताह से खड़ा कर के रखा है। अगर कुछ कार्यवाही की जाए, कुछ पेनाल्टी पटाना हो या अगर गाड़ियां कुछ गलत हैं तो इस पर कार्यवाही करना चाहिए, लेकिन कार्यवाही भी कुछ नहीं सिर्फ गाड़ी को थाना में खड़ा करा दिया गया है। ऐसे में गाड़ी मालिकों को भारी नुकसानों का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिदिन ₹8000 तो गाड़ी का ई एम आई है। अगर एक सप्ताह से गाड़ी खड़ा है, तो गाड़ी मालिक का एक गाड़ी का ₹64000 का नुकसान हो रहा है
लेकिन शासन प्रशासन को कोई मतलब नहीं है चाहे गाड़ी मालिक कुछ भी हो जाए इनको तो सिर्फ अपना जेब भरना है। ऐसे कारनामों से शासन प्रशासन की बड़ी बदनामी हो रही है। तहसीलदार हैं कि कुछ सुनने को तैयार ही नहीं है सिर्फ साहब इतना कह दे रहे हैं कि गाड़ी छूटेगा नहीं । गाड़ी ने क्या जुर्म कर लिया है जो गाड़ी नहीं छूटेगा यह तो एक प्रकार से सरिया तहसीलदार की दादागिरी नजर आ रही है । सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला कलेक्टर को इसकी भनक है या नहीं है यह तो कह पाना उचित नहीं है , अगर नहीं है तो ऐसे तहसीलदारों के ऊपर सही से जांच कर कार्यवाही की जानी चाहिए। चलिए देखते हैं आने वाला समय में आखिर क्या होता है?क्या कलेक्टर इसकी जांच कराते हैं और ऐसे तहसीलदारों पर कार्यवाही होती है या फिर सबकी मिली जुली सरकार चल रही है ।
*तहसीलदार के पास नहीं कोई जवाब , फोन का नहीं दे रहे कोई जवाब*
वहीं इस संबंध में जब हमारे संवाददाता ने जब सरिया तहसीलदार से संपर्क साधा तो उनका कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने फ़ोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा।



