सारंगढ जिले के गौण खनिज राशि पर बढ़ा विवाद:

ग्रामीण हिस्से के उपयोग पर सवाल, संशोधन प्रस्ताव से असंतुलन की आशंका*
सारंगढ़-बिलाईगढ़।सारंगढ जिले में गौण खनिज से प्राप्त रॉयल्टी राशि के वितरण और उपयोग को लेकर एक बार फिर सारंगढ नगर सहित विधानसभा में बहस तेज हो गई है। सारंगढ जिले में गौण खनिज की राशि केवल जनपद पंचायत स्तर से जुड़े गाँव को ही आबंटित होती थी,पर अब जिला पंचायत स्तर पर बंटवारे में बदलाव के प्रस्ताव के बीच अब इस राशि की प्राथमिकता और उपयोग के तरीके पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निर्धारित राशि के उपयोग को लेकर सामने आ रही चर्चाओं ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है।अभी जनपद पंचायत में अध्यक्ष कांग्रेस का बना हुआ है,गौण खनिज की राशि आबंटित होने पर हर साल की तरह फिर कमीशन खोरी,भ्रष्टाचार, घपला,शिकायत होना लाजमी है।इसलिए नगर की जनता चाहती है कि गौण खनिज की राशि पर पूरी तरह से पारदर्शिता बने।
सारंगढ जिला पंचायत समिति ने माननीय मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर मांग किया है कि छत्तीसगढ़ राजपत्र असाधरण रायपुर सोमवार दिनांक 08.08.2022 अनुसार गौण खनिज की राशि वितरण कराये जाने हेतु।
इस मांग पत्र में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राजपत्र असाधरण रायपुर -सोमवार दिनांक 08.08.2022 को अधिसूचना प्रकाशित कर खदान व खनिज का प्रबंधन 39 के कंडिका 4 में गौण खनिज से प्राप्त राजस्व को त्रिस्तरी पंचायतो के विकास कार्य हेतु शासन द्वारा निर्धारित माप दण्ड अनुसार पुनः आबंटित किया जायेगा ऐसा उल्लेख किया गया है। जबकि छ.ग. शासन के खनिज विभाग द्वारा दिनांक 10.10. -2012 को आदेश जारी कर उक्त अधिसूचना के विपरित गौण खनिज से प्राप्त रायल्दी राजस्व राशि का पंचायतो में केवल ग्राम पंचायत एवं जनपद पंचायत में वितरण किये जाने के संबंध में आदेश प्रसारित किया गया है। उक्त आदेशानुसार गौण खनिज से प्राप्त राशि ग्राम पंचायतो व जनपद पंचायतों में वितरण किया जा रहा है जिसके कारण गौण खनिज की राशि सीमित क्षेत्रो के विकास कार्यों में खर्च हो रहा है कुछ ग्राम पंचायते ऐसे भी है जहाँ विकास कार्य करने हेतु स्थान ही नहीं बचा है तथा त्रिस्तरीय ग्राम पंचायतो के मुख्य जिला पंचायत में गौण खनिज की राशि वितरण में प्राप्त नहीं होने से जिले के अंदर महत्वपूर्ण विकास कार्य संपादित नहीं हो पा रहे है। माननीय महोदय से गौण खनिज से प्राप्त रायल्टी राजस्व राशि का वितरण समान्य प्रशासन के प्रशासन के अनुमोदन पश्चात निम्नानुसार किये जाने से संपूर्ण जिले में आवश्यक विकास कार्य संपन्न हो सकेगा।
*ग्रामीण राशि के उपयोग पर उठे सवाल*
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि कुछ मामलों में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निर्धारित गौण खनिज मद की राशि का उपयोग कुछ माह पूर्व नगर पालिका क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए किया गया। वहीं इस कार्य ने ग्रामीण और शहरी विकास के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। ग्रामीण प्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि यदि ग्रामीण हिस्से की राशि अन्य क्षेत्रों में खर्च होती है, तो इससे गांवों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
*मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष जारी*
जिले के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी पेयजल, सड़क, नाली, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी हुई है। ग्रामीणों द्वारा समय-समय पर इन समस्याओं को लेकर आवाज उठाई जाती रही है, लेकिन अपेक्षित सुधार अभी भी कई जगहों पर नहीं दिखता। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि यदि संसाधनों का उपयोग प्राथमिकता के अनुरूप नहीं किया गया, तो ग्रामीण विकास की गति धीमी पड़ सकती है और असंतोष बढ़ सकता है।
*नियमों का उद्देश्य और वास्तविकता*
जानकारों और विशेषज्ञों के अनुसार, गौण खनिज से प्राप्त रॉयल्टी राशि का उपयोग मुख्यतः खनन प्रभावित और जरूरतमंद क्षेत्रों में आधारभूत विकास कार्यों के लिए किया जाना चाहिए। इसका मूल उद्देश्य संतुलित और न्यायसंगत विकास सुनिश्चित करना है, ताकि उन क्षेत्रों को प्राथमिकता मिल सके जहां संसाधनों की कमी है। लेकिन यदि इन सिद्धांतों का पालन नहीं होता, तो योजना का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो सकता है।
*संशोधन प्रस्ताव पर अलग-अलग राय*
जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पाण्डेय द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए नए वितरण प्रस्ताव को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं जारी हैं। कुछ जानकारों का मानना है कि यदि बिना व्यापक समीक्षा और पारदर्शी प्रक्रिया के इस तरह के बदलाव किए गए, तो इससे संसाधनों के असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वहीं, कुछ अन्य पक्ष इसे जिले के समग्र विकास के लिए आवश्यक कदम मान रहे हैं और मानते हैं कि इससे विकास कार्यों को नई दिशा मिल सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि प्रस्ताव पर सहमति बनने से पहले सभी पक्षों की राय लेना और उसके प्रभावों का आकलन करना आवश्यक है, ताकि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो।
*समीक्षा और पारदर्शिता की मांग तेज*
वर्तमान स्थिति को देखते हुए अब यह मांग तेज हो रही है कि गौण खनिज मद से अब तक किए गए कार्यों की निष्पक्ष और व्यापक समीक्षा की जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि राशि का उपयोग किन क्षेत्रों में किया गया और उसका वास्तविक लाभ किसे मिला। यदि समीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की जाती है, तो इससे न केवल विवाद कम होंगे, बल्कि भविष्य के लिए बेहतर योजना भी बनाई जा सकेगी।
*पारदर्शिता ही समाधान का आधार*
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्पष्ट नीति ही समाधान का आधार हो सकती है। यदि समय-समय पर राशि के उपयोग की जानकारी सार्वजनिक की जाए, कार्यों का मूल्यांकन हो और प्राथमिकताओं को स्पष्ट रखा जाए, तो विवाद की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है। इसके साथ ही, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए एक स्पष्ट और न्यायसंगत नीति की आवश्यकता है, ताकि विकास की धारा सभी तक समान रूप से पहुंच सके। बहरहाल गौण खनिज राशि का मुद्दा केवल वित्तीय नहीं, बल्कि सामाजिक और विकासात्मक संतुलन से जुड़ा हुआ है। ऐसे में आवश्यक है कि इस विषय पर संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ निर्णय लिए जाएं। यदि सभी पक्षों को साथ लेकर निष्पक्ष नीति बनाई जाती है, तो यह विवाद न केवल सुलझ सकता है, बल्कि जिले के समग्र विकास का मार्ग भी प्रशस्त कर सकता है।



