परसदा छोटे में संदिग्ध मौत से हड़कंप, अवैध शराब के कारोबार पर उठे बड़े सवाल

परसदा छोटे में संदिग्ध मौत से हड़कंप, अवैध शराब के कारोबार पर उठे बड़े सवाल
सारंगढ खबर न्यूज,सारंगढ/बरमकेला —– ग्राम पंचायत परसदा छोटे में गुरुवार को हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। गांव के निवासी जलसाय बरिहा का शव सड़क किनारे एक गहरे गड्ढे में संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने के बाद गांव में शोक के साथ-साथ आक्रोश का माहौल है। घटना के बाद ग्रामीणों ने गांव में वर्षों से चल रहे अवैध महुआ शराब के कारोबार को इस मौत की बड़ी वजह बताते हुए पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जानकारी के अनुसार, जलसाय बरिहा बुधवार रात करीब 8 बजे घर से निकला था। देर रात तक उसके वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन लगातार बारिश और अंधेरे के कारण उसका कोई पता नहीं चल सका। गुरुवार शाम करीब 4 बजे कुछ ग्रामीणों ने सड़क किनारे बने गड्ढे में एक शव देखा। पास जाकर देखने पर उसकी पहचान जलसाय बरिहा के रूप में हुई। सूचना मिलते ही गांव में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए।
घटना की सूचना मिलते ही कनकबीरा चौकी प्रभारी टीकाराम खटकर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को ग्रामीणों से यह जानकारी मिली है कि मृतक शराब के नशे में था तथा तेज बारिश के दौरान अनियंत्रित होकर गड्ढे में गिर गया होगा। हालांकि पुलिस का कहना है कि अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
घर-घर बिक रही अवैध महुआ शराब, ग्रामीणों में भारी नाराजगी
इस घटना के बाद गांव में सबसे बड़ा मुद्दा अवैध महुआ शराब का कारोबार बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि परसदा छोटे में लंबे समय से खुलेआम अवैध महुआ शराब की बिक्री हो रही है। गांव के कई घरों में दिन-रात शराब बेची जाती है, लेकिन इस पर प्रभावी रोक लगाने में पुलिस और संबंधित विभाग पूरी तरह विफल साबित हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में ऐसी स्थिति बन चुकी है कि शराब खरीदने के लिए किसी ठेके तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। मोहल्लों और घरों में आसानी से महुआ शराब उपलब्ध हो जाती है। इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। कई घरों की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है, घरेलू विवाद बढ़े हैं और नशे की वजह से लोगों की जान तक जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार पुलिस, आबकारी विभाग और प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई केवल औपचारिक बनकर रह गई। कुछ दिनों तक सख्ती दिखाई जाती है, फिर अवैध कारोबार पहले की तरह शुरू हो जाता है। लोगों का कहना है कि यदि लगातार और प्रभावी कार्रवाई होती, तो गांव में इस तरह खुलेआम अवैध शराब का कारोबार नहीं चलता।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जलसाय बरिहा की मौत के बाद ग्रामीणों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब गांव में लंबे समय से अवैध शराब बिक रही थी, तब संबंधित विभागों ने इसे पूरी तरह बंद कराने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए। लोगों का कहना है कि समय-समय पर शिकायतें करने के बावजूद यदि अवैध शराब का कारोबार लगातार जारी रहा, तो यह प्रशासनिक नियंत्रण की कमजोरी को दर्शाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में अवैध शराब की उपलब्धता पर प्रभावी नियंत्रण होता, तो संभव है कि आज एक परिवार अपना सदस्य न खोता। घटना के बाद गांव में प्रशासन के प्रति नाराजगी साफ दिखाई दे रही है और लोग अवैध शराब के पूरे नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
गांव में बिक रही अवैध शराब की शिकायत कई बार की गई है परंतु अब तक कार्यवाही में कमी देखी जा यही है
कौशल्या सत्येंद्र सिदार
सरपंच ग्राम पंचायत परसदा छोटे
“मामले की जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। अवैध शराब की बिक्री पर कार्रवाई नहीं होने की बात सही नहीं है। पुलिस लगातार कार्रवाई करती रही है और आगे भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।”
टीकाराम खटकर
चौकी प्रभारी
कनकबीरा


