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10वीं पास किसान का दावा-रायपुर एयरपोर्ट मेरी जमीन पर बनाः

 

कहा- दस्तावेजों में पूर्वजों के नाम, सुप्रीम कोर्ट में साढ़े 3 हजार करोड़ का केस

रायपुर के 10वीं पास किसान अश्विनी बांधे (53) का दावा है कि स्वामी विवेकानंद इंटरनेशनल एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग और उसके सामने बना गार्डन उनके पूर्वजों की 30 एकड़ 18 डिस्मिल जमीन पर बना है।

इस जमीन को लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में करीब साढ़े 3 हजार करोड़ का मुआवजा मांगा है। इसमें जमीन का बकाया किराया, ब्याज और अन्य दावे शामिल हैं। बांधे पिछले 35 साल से सरकारी रिकॉर्ड, पुराने कानूनों और मंत्रालयों के दस्तावेजों के आधार पर यह लड़ाई लड़ रहे हैं।

इस साल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मामले में संबंधित पक्षों को दोबारा जांच के निर्देश दिए। इसके बाद अश्विनी बांधे ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां उनकी याचिका विचाराधीन है।

35 साल… और फाइलें ही बन गईं जिंदगी

किसी के लिए सरकारी फाइलें सिर्फ कागज होती हैं, लेकिन अश्विनी बांधे के लिए यही फाइलें उनकी पूरी जिंदगी बन गई हैं। पिछले 35 साल से वे रिकॉर्ड रूम, सरकारी दफ्तरों, लाइब्रेरी और अदालतों के बीच एक-एक दस्तावेज जोड़ते रहे हैं।

बांधे कहते हैं कि पिछले 35 साल में उन्होंने जितना समय अपने खेतों में नहीं बिताया, उससे कहीं ज्यादा वक्त रिकॉर्ड रूम, सरकारी दफ्तरों, लाइब्रेरी और अदालतों के चक्कर लगाते हुए गुजारा है।

उनके मुताबिक, 1990 के दशक में जब उन्होंने अपनी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड तलाशने शुरू किए, तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह तलाश उनकी जिंदगी का सबसे लंबा सफर बन जाएगी।

बांधे का दावा है कि आज उनके पास ऐसे सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें सामान्य तौर पर ढूंढ पाना आसान नहीं है। वे कहते हैं, ‘मेरे पास ऐसी फाइलें हैं, जो गूगल पर खोजने से भी नहीं मिलेंगी।’

बांधे के लिए यह लड़ाई अब सिर्फ जमीन या मुआवजे की नहीं रह गई है। उनके मुताबिक, यह उन सरकारी दस्तावेजों की भी लड़ाई है, जिन्हें वे अपने दावे की सबसे मजबूत बुनियाद मानते हैं। यही वजह है कि 3 दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी उन्होंने फाइलों का साथ नहीं छोड़ा और अब उनकी पूरी उम्मीद सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है।

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