35 साल से लंबित सारंगढ़ रेल लाइन: अब विधानसभा में गूंजने की तैयारी*

*35 साल से लंबित सारंगढ़ रेल लाइन: अब विधानसभा में गूंजने की तैयारी*
सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ में रेल सुविधाओं के विस्तार के बीच 35 वर्षों से लंबित सारंगढ़ रेल लाइन एक बार फिर चर्चा में है। क्षेत्रवासियों की यह बहुप्रतीक्षित मांग अब विधानसभा सत्र में उठ सकती है, जिससे उम्मीदों को नया बल मिला है। विगत दिनों सारंगढ़ के गणमान्य नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जागरूक मतदाताओं ने सांसद और विधायक को ज्ञापन सौंपकर बलौदाबाजार–भाटापारा–सारंगढ़–झारसुगुड़ा 310 किमी रेल परियोजना को तत्काल स्वीकृति देने और बजट में शामिल करने की मांग की। जनप्रतिनिधियों से इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने का आग्रह किया गया है।
*1990 से अटकी फाइल, अब तेज हुई आवाज*
ज्ञापन में बताया गया कि यह रेल परियोजना वर्ष 1990-92 में तत्कालीन सांसद पी.आर. खुटे के कार्यकाल में प्रस्तावित हुई थी और प्रारंभिक सर्वे भी किया गया था। इसके बावजूद, 35 वर्षों बाद भी यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है। अब नागरिक इसे लेकर निर्णायक पहल के मूड में हैं।
*विकास और राजस्व दोनों के लिए अहम*
सारंगढ़ क्षेत्र खनिज, कृषि और व्यापार का प्रमुख केंद्र है, लेकिन रेल सुविधा के अभाव में लोगों को रायपुर, बिलासपुर और झारसुगुड़ा जाने में भारी परेशानी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह रेल लाइन बलौदाबाजार के सीमेंट उद्योग और झारसुगुड़ा के औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ते हुए रेलवे के लिए भी लाभकारी साबित हो सकती है।
*जनआंदोलन की तैयारी, हस्ताक्षर अभियान जल्द*
इस मांग को जनआंदोलन का रूप देने की तैयारी की जा रही है। पहले चरण में जनप्रतिनिधियों, व्यापारिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं और आम नागरिकों के हस्ताक्षर लिए जाएंगे, इसके बाद पूरे जिले में व्यापक अभियान चलाया जाएगा। आंदोलन से जुड़े नाथूलाल अग्रवाल ने बताया कि वर्षों से धार्मिक आयोजनों—हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और रामायण पाठ—के माध्यम से भी इस मांग को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।
*मुख्य मांगें*
▪️ 310 किमी रेल परियोजना को बजट सत्र में शामिल किया जाए
▪️ पुराने सर्वे को अपडेट कर परियोजना को पुनर्जीवित किया जाए
▪️ विशेष बजट आवंटन सुनिश्चित किया जाए
*हर स्तर पर भेजा गया ज्ञापन*
मांग पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय रेल मंत्री, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, SECR महाप्रबंधक बिलासपुर और DRM रायपुर को भी भेजी गई है।
*अब निर्णय का समय*
नागरिकों का कहना है-यह सिर्फ रेल लाइन नहीं, बल्कि सारंगढ़ के विकास की जीवन रेखा है। अब समय आ गया है कि सरकार इस पर ठोस निर्णय ले। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले विधानसभा सत्र में यह मुद्दा जोर-शोर से उठेगा और वर्षों पुरानी मांग को नई दिशा मिलेगी।



