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रायगढ़ GST विभाग मौन, मीना बाजार में करोड़ों की वसूली, सरकार को लगाया चूना

*गेट पास से ही करीब 2 करोड़ की कमाई का दावा, टैक्स चोरी और कथित संरक्षण को लेकर उठे सवाल*

रायगढ़। जन्माष्टमी के अवसर पर रायगढ़ में लगे मीना बाजार को लेकर शहर में इन दिनों करोड़ों रुपये की वसूली और टैक्स अनुपालन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक लगभग एक माह से चल रहे इस बाजार में 5 से 7 लाख लोगों के प्रवेश की चर्चा है। प्रवेश टिकट से 2 करोड़ तक की वसूली का दावा किया जा रहा है वही इस मामले में GST विभाग की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठ रहे है। प्रत्येक व्यक्ति से प्रवेश के नाम पर ₹30 लिए जाने की स्थिति में केवल गेट पास से ही करीब ₹1.50 करोड़ से ₹2.10 करोड़ तक की वसूली का अनुमान लगाया जा रहा है। बाकी पूरे व्यापारिक परिसर की कमाई अलग है पूरे मेरा स्थल में कई करोड़ का लेनदेन होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। चर्चा यह भी है कि प्रवेश के लिए जारी किए गए टिकटों में GST नंबर सहित आवश्यक कर संबंधी विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी राशि की टिकट बिक्री और उससे होने वाली आय का हिसाब-किताब क्या है और सरकार को नियमानुसार कितना राजस्व प्राप्त हुआ? अब सवाल सीधा है—मीना बाजार की कुल टिकट बिक्री कितनी हुई, सरकार को कितना GST मिला और करोड़ों की संभावित वसूली का वास्तविक हिसाब क्या है?
स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग टिकट बिक्री, GST भुगतान और पूरे आयोजन के वित्तीय लेनदेन की निष्पक्ष जांच करे, ताकि मीना बाजार की करोड़ों की कमाई को लेकर चल रही चर्चाओं की वास्तविकता सामने आ सके।

*छोटे कारोबारियों पर सख्ती, मीना बाजार पर मेहरबानी क्यों?*

स्थानीय व्यापारियों के बीच यह सवाल चर्चा में है कि GST विभाग छोटे-बड़े कारोबारियों से लगातार दस्तावेज और टैक्स का हिसाब मांगता है, लेकिन लाखों लोगों से प्रवेश शुल्क वसूलने वाले तथा महेश एक महीने में ही कई करोड़ के लेनदेन करने वाले मेला परिसर मीना बाजार को लेकर विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई या जांच सामने क्यों नहीं आई? क्या सब कुछ पहले से ही सेट है या मीना बाजार संचालकों के इस टैक्स चोरी के मामले में रायगढ़ जीएसटी विभाग का कोई लेना देना नहीं है क्या इस मामले में अब केंद्रीय जीएसटी विभाग को संज्ञान लेना होगा?

*कथित कमीशन के आरोपों से गरमाया मामला*

सबसे गंभीर चर्चा मीना बाजार की कथित कमाई में कुछ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को कमीशन दिए जाने को लेकर है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि ये आरोप सही हैं तो यह केवल टैक्स का मामला नहीं बल्कि प्रशासनिक संरक्षण और भ्रष्टाचार की जांच का भी विषय बन सकता है। बताया जा रहा है कि मीना बाजार को लेकर विरोध और संरक्षण का खेल शुरू से ही चल रहा है रायगढ़ में मीना बाजार लगे को लेकर अनुमति देने और अनुमति निरस्त करने की घटनाक्रम को भी प्रशासनिक उदासीनता के तौर पर देखा जा रहा है। लोग अभी सवाल पूछ रहे हैं कि प्रशासन ने मीना बाजार लगाए जाने को लेकर पहले अनुमति देने के बाद अनुमति क्यों निरस्त की थी और दो मैच दो दिनों के बाद ही पुनः मीना बाजार लगाने की अनुमति क्यों दी गई? इस घटनाक्रम को मीना बाजार संचालकों के रसूक और राजनीतिक संरक्षण के तौर पर भी देखा जा रहा है।

*गेट पास के अलावा दुकानों से भी करोड़ों का कारोबार*

मीना बाजार में केवल प्रवेश शुल्क से ही कमाई नहीं होती। पूरे मेला परिसर में खान-पान, कपड़े, खिलौने, घरेलू सामान, सौंदर्य सामग्री, मनोरंजन, झूले और अन्य कई प्रकार की दुकानें लगती हैं। पूरे महीने इन दुकानों पर भी बड़े पैमाने पर नकद और डिजिटल लेनदेन होने की चर्चा है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि गेट पास से ही करीब 2 करोड़ रुपये तक की वसूली का अनुमान है, तो पूरे मेले में दुकानों, झूलों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को मिलाकर कुल कितने करोड़ रुपये का कारोबार हुआ होगा?

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