मोबाइल बना पढ़ाई का सबसे बड़ा ‘रुकावट’, प्राइवेट स्कूलों की कार्यप्रणाली पर अभिभावकों की नाराज़गी*

मोबाइल बना पढ़ाई का सबसे बड़ा ‘रुकावट’, प्राइवेट स्कूलों की कार्यप्रणाली पर अभिभावकों की नाराज़गी*
सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर अभिभावकों में गंभीर चिंता देखने को मिल रही है।बच्चों के लिए मोबाइल एकतरफ पढ़ने,सीखने की एक अच्छा गैजेट है तो दूसरे तरफ मोबाइल फोन से बच्चों पर कई बुरे असर भी पड़ रहे है। पालकों का आरोप है कि भारी-भरकम फीस वसूलने के बावजूद कई प्राइवेट स्कूलों द्वारा पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा मोबाइल फोन पर स्थानांतरित किया जा रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।अभिभावकों का कहना है कि कक्षा कार्य, गृहकार्य, प्रोजेक्ट व अन्य शैक्षणिक गतिविधियाँ मोबाइल एप्स और ऑनलाइन माध्यमों पर निर्भर कर दी गई हैं। इससे छोटे बच्चे अनावश्यक रूप से अधिक समय तक मोबाइल स्क्रीन के संपर्क में रहते हैं, जिसका सीधा असर उनकी एकाग्रता, अध्ययन क्षमता और अनुशासन पर पड़ रहा है।पालकों ने यह भी चिंता जताई है कि मोबाइल के बढ़ते उपयोग से बच्चों में लत जैसी स्थिति बनती जा रही है।बच्चे अत्यधिक मोबाईल फोन का उपयोग कर रहे है जिसके कारण बच्चों पर फोन पर दिखने वाले कई गंदे लिंक भी उनको आकर्षित कर रहे हैं। इससे न केवल उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ भी बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।कई अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन से स्पष्ट मांग की है कि शैक्षणिक कार्यों को स्कूल परिसर में ही पूर्ण कराया जाए, ताकि बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस व्यवस्था पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ी के शैक्षणिक और व्यवहारिक विकास पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।



