सारंगढ़-बिलाईगढ़

रेत माफियाओं का खुला खेल, प्रशासन बना ढाल—सारंगढ़-बिलाईगढ़ में बिना NOC चल रहा रातभर लूट!

 

रेत माफियाओं का खुला खेल, प्रशासन बना ढाल—सारंगढ़-बिलाईगढ़ में बिना NOC चल रहा रातभर लूट!*

सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले में अवैध रेत उत्खनन अब किसी छिपे खेल की तरह नहीं, बल्कि खुलेआम चल रहे संगठित कारोबार का रूप ले चुका है। जशपुर, दहिदा और बरभांठा क्षेत्र से हर रात सैकड़ों ट्रैक्टर और डंपर बिना रॉयल्टी के रेत निकालकर परिवहन कर रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन लोगों को रेत खदान का वैध ठेका मिला है, उन्हें अब तक विभाग से NOC तक जारी नहीं किया गया है, लेकिन इसके बावजूद रेत माफिया बेखौफ होकर धड़ल्ले से खनन और परिवहन में जुटे हुए हैं। इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जहां एक ओर नियम-कायदों की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। रात के अंधेरे में चल रहे इस अवैध कारोबार से साफ जाहिर होता है कि या तो प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं।सूत्रों से पता चला है कि 1 डंफर रेत का मूल्य 4 हजार रुपये है और 1 ट्रेक्टर रेत का कीमत 500 रुपये रेत माफियाओं के द्वारा लिया जा रहा है,जिसमे कोई रॉयल्टी पर्ची नही दिया जाता है।ऐसा ही एक मामला रेत माफियाओं से जुड़े कुछ मामला नगर में गरमाया था जिसमे खनिज विभाग ने जल्दबाजी में कोतवाली थाना में शिकायत दर्ज कराकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने की बात कही थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक उस शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि हर रात दर्जनों नहीं बल्कि सैकड़ों गाड़ियों की आवाजाही होती है, जिससे सड़कों की हालत भी खराब हो रही है और आम जनता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद न तो पुलिस की सख्ती नजर आती है और न ही खनिज विभाग की कोई प्रभावी कार्रवाई। सवाल यह है कि जब सब कुछ खुलेआम हो रहा है, तो कार्रवाई करने में आखिर किस बात का डर है? अवैध रेत उत्खनन से शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। यह चुप्पी अब प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह बनती जा रही है। अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में यह अवैध कारोबार और भी बढ़ सकता है, जिससे न केवल सरकारी नुकसान होगा बल्कि कानून व्यवस्था भी प्रभावित होगी। अब जरूरत है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और केवल कागजी कार्रवाई के बजाय जमीनी स्तर पर सख्त कदम उठाए। अन्यथा जनता के बीच यह संदेश साफ जाएगा कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ में कानून नहीं, बल्कि माफियाओं का राज चलता है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले में अवैध रेत उत्खनन अब किसी छिपे खेल की तरह नहीं, बल्कि खुलेआम चल रहे संगठित कारोबार का रूप ले चुका है। जशपुर, दहिदा और बरभांठा क्षेत्र से हर रात सैकड़ों ट्रैक्टर और डंपर बिना रॉयल्टी के रेत निकालकर परिवहन कर रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन लोगों को रेत खदान का वैध ठेका मिला है, उन्हें अब तक विभाग से NOC तक जारी नहीं किया गया है, लेकिन इसके बावजूद रेत माफिया बेखौफ होकर धड़ल्ले से खनन और परिवहन में जुटे हुए हैं। इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जहां एक ओर नियम-कायदों की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। रात के अंधेरे में चल रहे इस अवैध कारोबार से साफ जाहिर होता है कि या तो प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं।सूत्रों से पता चला है कि 1 डंफर रेत का मूल्य 4 हजार रुपये है और 1 ट्रेक्टर रेत का कीमत 500 रुपये रेत माफियाओं के द्वारा लिया जा रहा है,जिसमे कोई रॉयल्टी पर्ची नही दिया जाता है।ऐसा ही एक मामला रेत माफियाओं से जुड़े कुछ मामला नगर में गरमाया था जिसमे खनिज विभाग ने जल्दबाजी में कोतवाली थाना में शिकायत दर्ज कराकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने की बात कही थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक उस शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि हर रात दर्जनों नहीं बल्कि सैकड़ों गाड़ियों की आवाजाही होती है, जिससे सड़कों की हालत भी खराब हो रही है और आम जनता को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद न तो पुलिस की सख्ती नजर आती है और न ही खनिज विभाग की कोई प्रभावी कार्रवाई। सवाल यह है कि जब सब कुछ खुलेआम हो रहा है, तो कार्रवाई करने में आखिर किस बात का डर है? अवैध रेत उत्खनन से शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। यह चुप्पी अब प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह बनती जा रही है। अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में यह अवैध कारोबार और भी बढ़ सकता है, जिससे न केवल सरकारी नुकसान होगा बल्कि कानून व्यवस्था भी प्रभावित होगी। अब जरूरत है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और केवल कागजी कार्रवाई के बजाय जमीनी स्तर पर सख्त कदम उठाए। अन्यथा जनता के बीच यह संदेश साफ जाएगा कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ में कानून नहीं, बल्कि माफियाओं का राज चलता है।

 

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