बिलासपुर रोड का मुक्ति धाम बना कीचड़ और गंदगी का केंद्र,मरने के बाद भी गंदगी से मोक्ष नही*



सारंगढ़- बिलाईगढ़ । नगर के बिलासपुर रोड स्थित मुक्ति धाम की हालत देखकर अब लोग यह तय नहीं कर पा रहे कि यहां अंतिम संस्कार करने आए हैं या किसी दलदली क्षेत्र का निरीक्षण करने। जहां एक ओर इस स्थान को शांति, सम्मान और स्वच्छता का प्रतीक होना चाहिए, वहीं दूसरी ओर यहां पसरी गंदगी और जलभराव व्यवस्था की हकीकत बयां कर रही है। तस्वीर साफ बताती है कि मुक्ति धाम के अंदर जाने वाला रास्ता किसी वाटर पार्क से कम नहीं है। जगह-जगह पानी भरा हुआ है, जिसमें कचरा तैर रहा है। ऐसा लगता है मानो नगर पालिका ने यहां स्थायी जल संरक्षण योजना लागू कर दी हो – बस फर्क इतना है कि इसका लाभ किसी को नहीं मिल रहा। अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को पहले इस कीचड़ परीक्षा को पास करना पड़ता है, तब जाकर वे अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई दे पाते हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, लेकिन समाधान हमेशा आने वाला ही रहता है। जिम्मेदार अधिकारी शायद यह मान बैठे हैं कि मुक्ति धाम में आने वाले लोग शिकायत करने वापस नहीं आते, इसलिए यहां की व्यवस्था भी भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। जिस जगह को साफ-सुथरा और शांतिपूर्ण होना चाहिए, वहां बदबू, गंदगी और जलभराव ने स्थायी डेरा डाल लिया है। पेड़ों की हरियाली के बीच यह गंदा पानी ऐसा दृश्य पेश करता है जैसे प्रकृति भी इस लापरवाही पर सवाल उठा रही हो। लोगों ने यह भी तंज कसा कि नगर में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि मुक्ति धाम जैसी बुनियादी जगह भी उपेक्षा का शिकार है। यहां आने वाले बुजुर्ग, युवा और बच्चे तक इस गंदगी में चलने को मजबूर हैं, जिससे हादसे की आशंका भी बनी रहती है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मुक्ति धाम को वास्तव में मुक्ति दिला पाएगा या फिर यह जगह यूं ही बदहाली की कहानी सुनाती रहेगी। फिलहाल, हालात देखकर तो यही लगता है कि यहां मोक्ष से पहले लोगों को व्यवस्था से मुक्ति की जरूरत ज्यादा है।



