वासेपुर के गैंगस्टर का छत्तीसगढ़ में करोड़ों का साम्राज्यः
अंबिकापुर में 13 साल से छिपा था, चला रहा था बसें-एम्बुलेंस, दोबारा फरार, पार्टनर पर FIR

सरगुजा
वासेपुर का कुख्यात गैंगस्टर सब्बीर आलम 13 साल से अंबिकापुर में छिपकर रह रहा था।
झारखंड के वासेपुर का कुख्यात गैंगस्टर शब्बीर आलम (60) और उसका सहयोगी जावेद अंबिकापुर में 13 साल से छिपकर रह रहे थे। बस संचालक के साथ पार्टनरशिप में बसें और 40 से ज्यादा एम्बुलेंस चला रहा था। गैंगस्टर ने करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर आलीशान मकान भी बनवाया।
दोहरे हत्याकांड मामले में शब्बीर आलम को आजीवन कारावास की सजा मिली है। धनबाद पुलिस भगोड़ा घोषित कर चुकी है। उसकी तलाश की जा रही थी। 3 दिन पहले झारखंड पुलिस अंबिकापुर पहुंची थी। छापेमारी से पहले गैंगस्टर और उसका साथी दोबारा फरार हो गए।
सरगुजा पुलिस ने सोमवार को गैंगस्टर के सहयोगी और पार्टनर बस संचालक बैदुल खान (57) के खिलाफ कोतवाली थाने में FIR दर्ज की है। आरोप है कि बैदुल खान ने यह जानते हुए कि शब्बीर आलम भगोड़ा घोषित है, उसे अपने यहां पनाह दी।
पुलिस अब इनके आर्थिक नेटवर्क और मददगारों की कुंडली खंगाल रही है। बता दें कि वासेपुर के खूनी संघर्ष पर ‘गैंग्स आफ वासेपुर’ फिल्म भी बन चुकी है।
गैंगस्टर को पकड़ने में नाकाम रही पुलिस
दरअसल, वासेपुर (धनबाद) के गैंगस्टर शब्बीर आलम, उसके भाई शाहीद आलम ने 5 लोगों के साथ मिलकर डॉन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून को 18 अक्टूबर 2001 को धनबाद में गोली मार दी थी। हत्या के आरोप में आरोपी गिरफ्तार भी किए गए थे।
साल 2013 में हाईकोर्ट में पेशी के दौरान गैंगस्टर शब्बीर आलम भाग गया था। वह अपने साथी जावेद के साथ अंबिकापुर के बस संचालक बैदुल खान के संपर्क में आया। बैदुल खान ने गैंगस्टर को पनाह देने के साथ ही अपने साथ बस संचालन में पार्टनर भी बनाया।
अंबिकापुर में छिपे शब्बीर आलम के तार धनबाद के क्रिमिनल सिंडिकेट से पूरी तरह जुड़े हुए थे। वहां से रंगदारी और वसूली का मोटा पैसा लगातार इन आरोपियों तक पहुंचता था। शब्बीर आलम अपने साथी बैदुल के साथ मिलकर राजहंश बस सर्विस का संचालन कर रहा था। इसके अलावा, राजहंस कंपनी की 2 बसें भी खरीदी, जिन्हें सासाराम और बिहार पटना रूट पर चलाई जा रही थी।



