chhattisgarhcmodprpibraipurUncategorized
जाति प्रमाणपत्र के नियमों पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का आया बड़ा और ऐतिहासिक फैसला

हाई कोर्ट बोला- पिता-बहन के पास स्थायी जाति प्रमाणपत्र, फिर बच्चों को क्यों रोका? 60 दिन में निर्णय का आदेश बिलासपुर जिले की बोदरी तहसील के ग्राम मुढ़ीपार निवासी निष्ठा बघेल और उनके भाई अभय बघेल की याचिका पर सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है।

HighLights
- प्रशासनिक स्तर पर आवेदन खारिज होने के बाद पीड़ित भाई-बहनों ने न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।1950 से पहले के रिकॉर्ड न होने का बहाना बनाकर लौटा दिया था आवेदन, हाईकोर्ट में चुनौती
- 1950 से पहले के रिकॉर्ड न होने का बहाना बनाकर लौटा दिया था आवेदन, हाईकोर्ट में चुनौती
- जब परिवार की जाति प्रमाणित है, तो 1950 का रिकॉर्ड मांगना मनमाना: अधिवक्ता प्राची दीवान
, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति के दो भाई-बहनों को स्थायी जाति प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार किए जाने के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि जब याचिकाकर्ताओं के पिता और सगी बहन के पास पहले से ही स्थायी जाति प्रमाणपत्र मौजूद हैं, तो सक्षम अधिकारी इस महत्वपूर्ण तथ्य की अनदेखी नहीं कर सकते। हाई कोर्ट ने राजस्व अधिकारियों को नए आवेदन पर कानून के अनुसार विचार कर 60 दिनों के भीतर तर्कसंगत आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने यह आदेश बिलासपुर जिले के बोदरी तहसील अंतर्गत ग्राम मुढ़ीपार निवासी निष्ठा बघेल और उसके नाबालिग भाई अभय बघेल की याचिका पर पारित किया।



