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छत्तीसगढ़ में बदले प्राइवेट स्कूलों के नियम! अब जमीन नहीं, सिर्फ सुविधाओं का देना होगा प्रमाण, जानें नए Rule

छत्तीसगढ़ में बदले प्राइवेट स्कूलों के नियम! अब जमीन नहीं, सिर्फ सुविधाओं का देना होगा प्रमाण, जानें नए Rule

CGBSE New Rules: छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों के मान्यता नियम बदले गए हैं। अब जमीन की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है और खेल मैदान, लाइब्रेरी व लैब जैसी सुविधाएं समझौते के आधार पर उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
Chhattisgarh Private School Guidelines

Chhattisgarh Private School Guidelines: छत्तीसगढ़ में बदले प्राइवेट स्कूलों के नियम

Chhattisgarh Private School Guidelines: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने निजी स्कूलों को राहत देते हुए मान्यता नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत अब निजी स्कूल खोलने के लिए न्यूनतम जमीन की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा खेल मैदान, लाइब्रेरी और प्रयोगशाला जैसी सुविधाएं स्कूल परिसर में नहीं होने पर भी मान्यता मिल सकेगी।

स्कूल संचालक इन सुविधाओं के लिए अन्य सरकारी संस्थानों, नगर निगम या मान्यता प्राप्त स्कूलों से समझौता कर सकेंगे। हालांकि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ इस बदलाव को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि इससे स्कूलों की संख्या तो बढ़ सकती है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होने की संभावना है।

Private School Guidelines: जमीन की अनिवार्यता खत्म, कक्षा में अब 6 वर्गफीट जगह जरूरी

नए नियमों के अनुसार निजी स्कूलों की स्थापना, संचालन या अस्थायी-स्थायी मान्यता के लिए न्यूनतम भूमि क्षेत्रफल की बाध्यता नहीं रहेगी। अब स्कूलों को केवल सुरक्षा मानकों और वैधानिक नियमों का पालन करना होगा। कक्षाओं में प्रत्येक छात्र के लिए न्यूनतम 6 वर्गफीट स्थान निर्धारित किया गया है।

पहले क्या था नियम
  • शहरी क्षेत्र में स्कूलों के पास 20 हजार वर्गफीट जमीन जरूरी थी।
  • ग्रामीण क्षेत्र में 30 हजार वर्गफीट जमीन की अनिवार्यता थी।
  • 1500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों के लिए 2 एकड़ जमीन जरूरी थी।
  • कक्षा में प्रति छात्र 8 वर्गफीट जगह का नियम था।

अक्षय निधि और एफडी की अनिवार्यता भी खत्म

माशिमं ने निजी स्कूलों के लिए अक्षय निधि (Endowment Fund) की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी है। अब स्कूलों को मान्यता के लिए न्यूनतम अक्षय निधि जमा करने की जरूरत नहीं होगी। यदि स्कूल के पास कोई निधि उपलब्ध है तो उसका उपयोग स्कूल प्रबंधन पूंजीगत खर्च या संचालन संबंधी जरूरतों में कर सकेगा। हालांकि कर्मचारियों के वेतन और वित्तीय जिम्मेदारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

School Recognition Rules: पहले क्या था नियम

  • ग्रामीण क्षेत्र में 50 हजार रुपए और शहरी क्षेत्र में 1 लाख रुपए अक्षय निधि अनिवार्य थी।
  • यह राशि जिला शिक्षा अधिकारी और प्राचार्य के संयुक्त खाते में रहती थी।
  • शिक्षकों के वेतन भुगतान की सुरक्षा के लिए एफडी रखनी होती थी।

निरीक्षण की जगह स्व-प्रमाणन से मिलेगी मान्यता

नए नियमों में मान्यता प्रक्रिया को भी आसान किया गया है। अब स्कूलों को मान्यता लेने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी के निरीक्षण की अनिवार्यता नहीं होगी। स्कूलों को सुरक्षा मानकों, अधोसंरचना और अन्य वैधानिक नियमों के पालन का स्व-प्रमाणन देना होगा। मान्यता से पहले जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा स्कूल का निरीक्षण किया जाता था। स्कूल संचालकों द्वारा दी गई जानकारी की जांच के बाद ही मान्यता दी जाती थी।

केंद्र सरकार की गाइडलाइन के आधार पर बदलाव

स्कूल शिक्षा विभाग ने केंद्र सरकार के निर्देशों के आधार पर मान्यता नियमों में संशोधन का प्रस्ताव माशिमं को भेजा था। मान्यता समिति की बैठक में इस पर चर्चा के बाद संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया। इसके बाद 9 जून को नए नियमों के निर्देश जारी किए गए और राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित की गई।

विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

शिक्षाविदों का कहना है कि जमीन, लैब और लाइब्रेरी जैसी मूलभूत सुविधाओं में राहत देने से शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। शिक्षाविद् संजय जोशी ने कहा कि जगह-जगह बिना पर्याप्त संसाधनों के स्कूल खुलने से बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। अभिभावकों को भी स्कूलों की वास्तविक सुविधाओं की जानकारी जुटाने में परेशानी हो सकती है। वहीं माशिमं मान्यता समिति के सदस्य प्रकाश यादव ने बताया कि केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार ही नियमों में संशोधन किया गया है।

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