बिलाईगढ़ में विकास बनाम राजनीति: नगर पंचायत में मचा घमासान*

*बिलाईगढ़ में विकास बनाम राजनीति: नगर पंचायत में मचा घमासान*
*पूर्व सीएमओ के तबादले के बाद कथित हितों की लड़ाई? नए सीएमओ के आते ही विकास कार्य शुरू होने से विरोधियों में बेचैनी।*
बिलाईगढ़। नगर पंचायत बिलाईगढ़ इन दिनों विकास से ज्यादा राजनीतिक खींचतान और आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चर्चा में है। स्थानीय स्तर पर आरोप लग रहे हैं कि चंद स्वार्थी लोगों की कथित ओछी राजनीति का खामियाजा नगर के विकास और जनहित के कार्यों को भुगतना पड़ रहा है। सवाल यह है कि आखिर विरोध विकास का है या उन कथित हितों का, जो व्यवस्था बदलने के साथ प्रभावित हुए हैं?
नए सीएमओ के पदभार ग्रहण करने के बाद लंबित विकास कार्यों को गति मिलने की चर्चा के बीच अचानक शिकायतों और विरोध का दौर शुरू होने से अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर विरोध विकास कार्यों का है या बदली व्यवस्था से प्रभावित कथित हितों का?
पूर्व सीएमओ सुशील चौधरी के कार्यकाल को लेकर अब कई गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि चौधरी 3 सितंबर 2024 से तबादले तक नियमित रूप से कार्यालय नहीं आते थे तथा महत्वपूर्ण दस्तावेज निजी निवास में रखकर कार्यालयीन कार्य संचालित किए जाते थे। नए परिषद की गठन होने के पश्चात एक बार भी परिषद एवं पी आई सी की बैठक आहूत नहीं की गई। सवाल यह है कि यदि यह सब गलत था तो उस समय जिम्मेदार लोगों ने आवाज क्यों नहीं उठाई? और यदि सही था तो अब शिकायत क्यों?
**अब याद आईं कथित अनियमितताएं?**
प्लेसमेंट ठेके में कथित ओवरराइटिंग, करीब 16.62 लाख रुपये के पुराने सीसी रोड भुगतान, 75 लाख रुपये गौरव पथ अग्रिम, 27.68 लाख रुपये पोल-ट्रांसफार्मर भुगतान, वार्ड 7 के कथित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, पेवर ब्लॉक, अटल परिसर, 19.25 लाख रुपये नाला कार्य और 25.97 लाख रुपये महिला स्व-सहायता समूहों के भुगतान, रमेश हार्ड वेयर 14.71 लाख फर्जी भुगतान जैसे गंभीर भ्रष्टाचार हुई तब ये शिकायती तत्व कहा गायब थे। सवाल यह भी है कि इसकी शिकायतें पहले क्यों नहीं उठीं और प्रशासनिक व्यवस्था बदलते ही शिकायतों का सिलसिला क्यों तेज हो गया?
**पूर्व सीएमओ के जाते ही ये सब क्यों?**
नगर में चर्चा है कि पूर्व सीएमओ के स्थानांतरण के बाद कुछ लोगों के कथित “दाना-पानी” पर असर पड़ा और अब वही लोग नई व्यवस्था के जो विकास कार्य को गति दे रहे है के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। नगर में इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।जब पूर्व सीएमओ अपने निवास में ही समस्त दस्तावेज लाकर संचालन करते थे तब आपत्ति नहीं थी तब ये ही देर रात तक निवास में बैठे मिलते कागजातों में लीपा पोती करते थे।अब यही कौवा चले हंस की चाल वाली कहावत को चरितार्थ कर रहे है।
*नए सीएमओ ने संभाली कमान, तो शुरू हुए विकास कार्य*
नए सीएमओ के पदभार ग्रहण करने के बाद नगर में रुके हुए विकास कार्यों को गति मिलने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब नगर का काम आगे बढ़ रहा है, तो विरोध की राजनीति क्यों तेज हो रही है? क्या विकास कार्य कुछ लोगों के राजनीतिक हितों में बाधा बन रहे हैं?
*महिला समूह बना विवाद का नया हथियार?*
सबसे गंभीर सवाल एक महिला समूह की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि महिला समूह को कथित तौर पर राजनीतिक लड़ाई का मोहरा बनाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पूर्व में भी विवादों में कई लोगों को इसी तरह घसीटे जाने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
*काम के बजाय राजनीति से जुड़ाव की चर्चा*
समूह की कार्यशैली को लेकर भी नगर में नाराजगी की बातें सामने आ रही हैं। कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि समूह से जुड़ी महिलाओं की गतिविधियों में काम से अधिक राजनीतिक गतिविधियों का प्रभाव दिखाई दे रहा है। जो हर फोटो में दिखाई भी दे रहा है।इसको झुठलाया नहीं जा सकता।
*जनता पूछ रही—विकास चाहिए या राजनीतिक वर्चस्व?*
नगरवासियों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर पंचायत में प्राथमिकता विकास कार्यों की होनी चाहिए या राजनीतिक वर्चस्व की? यदि किसी अधिकारी के खिलाफ आरोप हैं तो उनकी जांच हो, यदि किसी समूह की कार्यप्रणाली पर सवाल हैं तो उसकी भी जांच हो—लेकिन टीवी जांच के नाम पर नगर के विकास को रोकना किसी भी कीमत पर उचित नहीं माना जा सकता।
*जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी*
मामले की निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को उग्र करने तथा जिम्मेदार लोगों के घेराव की चेतावनी दी गई है। इससे आने वाले दिनों में नगर पंचायत की राजनीति और गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।
अब निगाह प्रशासन पर है—क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या बिलाईगढ़ की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?
अब सवाल ये उठता है की नगर का विकास बड़ा है या कुछ लोगों के कथित राजनीतिक हित?
अब देखने वाली बात ये है कि जवाब अब प्रशासन और नगर की जनता दोनों को देना है।



