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खनिज सचिव का 11 जिलों को आदेशः रेत के अवैध खनन या परिवहन पर सीधे कलेक्टर होंगे जिम्मेदार

सारंगढ खबर न्यूज,सारंगढ/रायपुर—-

शिकायत मिली तो ये जिला प्रशासन की नाकामी

प्रदेश में अवैध रेत उत्खनन को लेकर साय सरकार ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। खनिज सचिव पी. दयानंद ने स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री के ‘जीरो टॉलरेंस’ निर्देश के बावजूद यदि किसी जिले में अवैध खनन या परिवहन पाया गया, तो संबंधित कलेक्टरों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करते हुए सीधे कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ड्रोन सर्वे या केन्द्रीय उड़नदस्ता दल द्वारा यदि कहीं भी अवैध गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं, तो उसके लिए जिला प्रशासन और खनन अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

11 जिलों के कलेक्टरों के साथ हुई वर्चुअल बैठक में खनिज सचिव ने कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि यदि रायपुर से उड़नदस्ते को कार्रवाई के लिए किसी जिले में जाना पड़ता है, तो यह स्थानीय प्रशासन की विफलता मानी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट्स को गंभीरता से लें और तत्काल मौके पर पहुंचकर कार्रवाई सुनिश्चित करें। बैठक में नीलामी प्रक्रिया को लेकर भी नाराजगी सामने आई। गरियाबंद, कांकेर और जांजगीर-चांपा जिलों के कार्य की सराहना की गई, जबकि धमतरी, बिलासपुर और एमसीबी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-बैकुंठपुर) जिलों के खराब प्रदर्शन पर कड़ी फटकार लगाई गई।

इन जिलों के कलेक्टर पर नजर

रायपुर, बिलासपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, सक्ती, महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी, एमसीबी, बलरामपुर और कांकेर।

हितग्राहियों को रायल्टी मुक्त रेत मिलेगी

सचिव ने कलेक्टरों को सख्त निर्देश दिए कि पीएम आवास योजना के हितग्राहियों को रॉयल्टी मुक्त रेत हर हाल में मिले, लेकिन इसकी आड़ में कोई अवैध खेल नहीं होना चाहिए। अब हर सप्ताह इसकी समीक्षा होगी।

सरकारी रेट 5500, दर तय होने पर भी बाजार में 10 हजार तक वसूली हो रही है

सरकारी नियम के मुताबिक नीलामी के बाद एक हाइवा रेत 5500 रुपए में मिलनी चाहिए। जमीनी हकीकत इससे अलग है। उक्त दर तय होने पर भी बाजार में 10 हजार तक वसूली हो रही है। बारिश के मौसम में घाट बंद होने का हवाला देकर यही कीमत 20 हजार रुपए तक पहुंच जाती है। माफिया पहले से अवैध भंडारण कर कीमतों को नियंत्रित करते हैं। इसमें तकनीकी दिक्कत ये है कि राज्य के लगभग सभी जिलों में मात्र 3 निरीक्षकों के भरोसे मॉनिटरिंग हो रही है। निरीक्षकों की कमी और रात में निगरानी न होने से अवैध खनन बेखौफ जारी है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

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