नगर कोतवाली की कमान पर उठे सवाल,,सब इंस्पेक्टर को मिली बड़ी जिम्मेदारी, फैसले ने चौंकाया शहर

सारंगढ़–बिलाईगढ़। शहर की कानून-व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण इकाई नगर कोतवाली की कमान इस बार एक ऐसे फैसले के तहत सौंपी गई है, जिसने प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ आम लोगों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।थाना प्रभारी कामिल हक का बिलासपुर ट्रांसफर होने के बाद एक सब इंस्पेक्टर प्रमोद यादव को नगर कोतवाल की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि जिले के पुलिस लाइन सहित कई छोटे थानों में टीआई स्तर के अधिकारी मौजूद हैं। ऐसे में यह निर्णय पुलिस विभाग और नगर में आमजनता पर चर्चा और सवालों का केंद्र बन गया है।
टीआई होते हुए भी एसआई पर भरोसा—क्यों?
आमतौर पर नगर कोतवाली जैसे संवेदनशील थाने की जिम्मेदारी टीआई (इंस्पेक्टर) को दी जाती है, लेकिन इस बार परंपरा से हटकर एसआई प्रमोद यादव को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई। यही वजह है कि यह फैसला आमजन के साथ-साथ पुलिस विभाग के भीतर भी चर्चा का विषय बन गया है।
सरिया में सख्त कार्रवाई से पहचान बना चुके हैं प्रमोद यादव
एसआई प्रमोद यादव इससे पहले सरिया थाना प्रभारी रह चुके हैं, जहां उन्होंने अवैध गांजा और शराब के खिलाफ लगातार सख्त अभियान चलाया था। खासकर ओडिशा से नदी और सड़क मार्ग के जरिए होने वाली गांजा तस्करी पर उन्होंने कई बड़ी कार्रवाइयां की थीं, जिससे उनकी छवि एक सख्त और सक्रिय अधिकारी की बनी।
प्रमोशन या तस्करों के लिए राहत?
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह जिम्मेदारी प्रमोद यादव के काम का इनाम है या फिर इसके पीछे कोई और रणनीति छिपी है? कुछ लोग इसे उनकी कार्यशैली का सम्मान मान रहे हैं, तो वहीं कुछ इसे तस्करी पर लगाम के बीच अचानक हुए बदलाव के रूप में देख रहे हैं।
लाइन और अन्य थानों में टीआई, फिर भी यह निर्णय क्यों?
जिले में लाइन सहित अन्य थानों में टीआई पदस्थ हैं, इसके बावजूद एसआई को सिटी कोतवाली की जिम्मेदारी देना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह प्रयोग है या फिर प्रशासन का कोई विशेष भरोसा—यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल, शहर की नजरें अब प्रमोद यादव के कामकाज पर टिकी हैं कि वे इस भरोसे पर कितना खरा उतरते हैं और कानून व्यवस्था को किस दिशा में ले जाते हैं।



