जिला कलेक्टर की दो टूक, विशेष दुकान से सामग्री खरीदने का नहीं बना सकेंगे दबाव

शिक्षा में ‘रस्म’ अदायगीः स्कूलों में फीस बढ़ गई, कॉपी-किताबें खरीद ली गईं; अब आदेश- 8% से ज्यादा नहीं बढ़ा सकेंगे फीस
सारंगढ खबर न्यूज,सारंगढ/रायपुर——–राइट टू एजुकेशन (आरटीई) की प्रतिपूर्ति राशि को लेकर राज्य सरकार और प्राइवेट स्कूलों के बीच चल रहे टकराव के बीच, सरकार ने निजी स्कूलों पर सख्ती शुरू कर दी है। एक ही दिन में दो आदेश जारी किए गए हैं। इसमें पहला आदेश मनमानी फीस वृद्धि रोकने और दूसरा दूसरा कॉपी-किताबों व यूनिफॉर्म के नाम पर चल रही कमीशनखोरी पर रोक लगाने से संबंधित है। हालांकि यह आदेश तब जारी हुआ है जबकि ज्यादातर अभिभावकों ने कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म खरीदी कर ली है। क्योंकि एक अप्रैल से ही से ही सीबीएसई स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो चुकी है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि स्कूलों में फीस समिति बनानी होगी और 8 प्रतिशत से ज्यादा फीस वृद्धि के लिए जिला स्तरीय समिति से अनुमति लेनी होगी। राज्य सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी निजी स्कूल इन नियमों को तोड़ता है या तय सीमा से अधिक फीस वसूलता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पहली से आठवीं तक एनसीईआरटी की किताबें पढ़ानी होंगी। साथ ही 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए किसी विशेष दुकान से यूनिफॉर्म और कॉपी किताब खरीदने के लिए
दबाव नहीं बनाएंगे। मुख्य सचिव ने इस संबंध में शुक्रवार को आदेश जारी कर दिए। उन्होंने सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश का सख्ती से पालन करवाने के लिए कहा है। दरअसल, नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही शिकायतें आ रही थीं कि निजी स्कूल नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से फीस बढ़ा रहे हैं। साथ ही चुनिंदा दुकानों से ही निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें व स्टेशनरी खरीदने का दबाव बना रहे हैं।
निजी स्कूलों को अपने यहां विद्यालय फीस समिति बनाना अनिवार्य
नियमों के तहत हर निजी स्कूल को अपने यहां अनिवार्य रूप से एक विद्यालय फीस समिति बनानी होगी। यह समिति पिछले साल की फीस के मुकाबले एक साल में अधिकतम 8 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ोतरी को मंजूरी दे सकेगी। अगर कोई स्कूल 8 प्रतिशत से ज्यादा फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे जिला फीस समिति से विशेष अप्रूवल (अनुमोदन) लेना अनिवार्य होगा।
निजी स्कूल हर साल 10%~ 20% तक बढ़ा रहे फीस
इस तरह का आदेश सरकार हर साल जारी करती है, इसके बावजूद प्राइवेट स्कूल हर साल 10% से 20% तक फीस बढ़ा रहे हैं। मनमानी फीस वृद्धि को इस तरह समझा जा सकता है कि कई स्कूलों में फीस समिति तो बनी है लेकिन बैठकें ही नहीं होती हैं। जबकि कई स्कूल कुछ अभिभावकों को बुलाकर फीस वृद्धि के लिए पहले से तय फार्मेट पर हस्ताक्षर करवा लेते हैं। संसाधनों के नाम पर फीस बढ़ा दिया जाता है।



