सारंगढ के तालाबों पर सुनियोजित ठंग से हो रहा कब्जा*

**”नया सारंगढ़” की दौड़ में जलस्रोतों पर संकट**
**संवेदनशील कलेक्टर पद्मिनी भोई से जनता की बढ़ी आश**
**तालाबो को संरक्षित करने प्रशासन से मांग समिति की हो गठन**

सारंगढ़–बिलाईगढ़। जिले में विकास के नाम पर हो रही गतिविधियों के बीच अब जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कभी जीवनदायिनी रहे खाड़ाबंद तालाब, नया तालाब, मुड़ा तालाब, तुर्की तालाब, तिवारी तालाब, बघेला तालाब और रोगहा तालाब अब धीरे-धीरे अतिक्रमण और निर्माण कार्यों की चपेट में आते दिखाई दे रहे हैं। “नया सारंगढ़” के विस्तार के साथ प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ रही है। सूत्रों के मुताबिक, शहर से करीब 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले कई तालाबों के आसपास प्लॉटिंग और निर्माण कार्य बढ़ रहे हैं। कुछ स्थानों पर तालाबों की सीमाएं सिमटती नजर आ रही हैं और मिट्टी डालकर भराव जैसी गतिविधियों की भी चर्चा है। हालांकि न्यायालय के निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कार्रवाई की गति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों में इसे लेकर चिंता और असंतोष दोनों देखने को मिल रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिन तालाबों ने वर्षों तक क्षेत्र की जल आवश्यकता को पूरा किया, उनके प्रभावित होने से भविष्य में गंभीर जल संकट की स्थिति बन सकती है। पर्यावरण विशेषज्ञ भी समय रहते इन जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन पर जोर दे रहे हैं।
*कलेक्टर से पहल की उम्मीद, संरक्षण समिति गठन की मांग*
अब जिलेवासियों की नजर जिला कलेक्टर पद्मनी भोई पर है। नगर की जनता द्वारा मांग की जा रही है कि इस विषय पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए एक स्पष्ट आदेश जारी किया जाए और तालाबों के संरक्षण के लिए विशेष समिति गठित की जाए। इस समिति में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ स्थानीय स्तर के प्रतिनिधियों को शामिल कर नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
*साथ ही यह भी अपेक्षा की जा रही है कि—*
*सभी तालाबों का सीमांकन और अभिलेख अद्यतन कराया जाए
*जहां अतिक्रमण हो, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाए
*अवैध निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित हो
*तालाबों के संरक्षण व पुनर्जीवन के लिए ठोस योजना बनाई जाए
यदि समय रहते ठोस और संतुलित कदम उठाए जाते हैं, तो न केवल इन जलस्रोतों को बचाया जा सकता है, बल्कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन भी कायम रखा जा सकता है। बहरहाल तालाब केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा हैं। ऐसे में इनका संरक्षण प्रशासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस दिशा में कितनी जल्द पहल करता है।



