भू-माफियाओं का बड़ा खेल: सरसीवा में ‘भूमिदान’ की सरकारी जमीन कौड़ियों के दाम बेची,
90 टुकड़ों के अवैध पंजीयन पर उठे सवाल कलेक्टर से शिकायत के बाद भी प्रशासन मौन,

भू-माफियाओं का बड़ा खेल: सरसीवा में ‘भूमिदान’ की सरकारी जमीन कौड़ियों के दाम बेची,
कार्यवाही न होने से भू-माफियाओं के हौसले बुलंद; उच्च स्तरीय जांच की मांग।
सरसीवा/सारंगढ़-बिलाईगढ़:
नगर पंचायत सरसीवा के अंतर्गत सरकारी नियमों और काश्तकारों के हितों को ताक पर रखकर ‘भूमिदान’ की बेशकीमती जमीन को अवैध रूप से बेचने और उसका नामांतरण कराने का एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। राजस्व नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए भू-माफियाओं द्वारा बिना किसी सक्षम प्रशासनिक अनुमति के इस पूरे खेल को अंजाम दिया गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस महाघोटाले की शिकायत माननीय कलेक्टर महोदय से भी की जा चुकी है, लेकिन शिकायत के बाद भी अब तक प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। प्रशासन की इस चुप्पी से क्षेत्र के जागरूक नागरिकों में भारी आक्रोश है।
मामले का खुलासा करते हुए स्थानीय निवासी सुनील शर्मा ने बताया कि नगर पंचायत सरसीवा (तहसील-सरसीवा) के अंतर्गत मूल खसरा नंबर 253 की कुल भूमि पूर्व में निर्धन काश्तकारों को ‘भूमिदान’ के रूप में शासकीय प्रावधानों के तहत आवंटित की गई थी। वर्तमान में इस मूल खसरा नंबर के कुल 90 उप-खंड (खसरा नंबर 253/1 से 253/90) दर्ज हैं।
कलेक्टर की अनुमति को दिखाया ठेंगा
राजस्व नियमों एवं शासकीय शर्तों के अनुसार, ऐसी दान में प्राप्त भूमियों के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण, क्रय-विक्रय या अदला-बदली से पूर्व माननीय कलेक्टर महोदय की विधिवत अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य कानूनी बाध्यता है। लेकिन आरोप है कि भू-माफियाओं ने संबंधित विभागों की मिलीभगत से बिना किसी सक्षम प्रशासनिक अनुमति के इस बेशकीमती भूमि के टुकड़ों की धड़ल्ले से खरीदी-बिक्री कर ली। इतना ही नहीं, बिना किसी जांच-पड़ताल के इनका पंजीयन (रजिस्ट्री) और नामांतरण (म्यूटेशन) भी आनन-फानन में कर दिया गया, जो सीधे तौर पर वैधानिक धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।
**शिकायत के बाद भी ढाक के तीन पात, उच्च स्तरीय जांच की मांग**
शिकायतकर्ता सुनील शर्मा ने बताया कि इस पूरे अवैध कारोबार और नियमों की धज्जियां उड़ाने की लिखित शिकायत जिला कलेक्टर से की गई है। परंतु हफ्तों बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है। कोई कार्यवाही न होने के कारण भू-माफियाओं के हौसले और बुलंद हो रहे हैं। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर कड़ा एक्शन नहीं लिया गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
पीड़ित पक्ष और ग्रामीणों की प्रमुख मांगें हैं कि:
खसरा नंबर 253 के सभी 90 टुकड़ों के क्रय-विक्रय की उच्च स्तरीय, विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
नियमों को ताक पर रखकर किए गए सभी अवैध पंजीयनों को तत्काल प्रभाव से शून्य (निरस्त) घोषित किया जाए।
नियमों के विरुद्ध किए गए सभी नामांतरण को निरस्त कर शासकीय शर्तों को दोबारा बहाल किया जाए।
शिकायत के बाद भी सिस्टम की खामोशी पर उठते गंभीर सवाल।
‘भूमिदान’ की जमीन का उद्देश्य समाज के सबसे निर्धन और कमजोर वर्ग को संबल देना था। लेकिन जब उसी जमीन के 90 टुकड़े कर बिना कलेक्टर की अनुमति के धड़ल्ले से बेच दिए जाएं और कलेक्टर तक शिकायत पहुंचने के बाद भी फाइलें दबी रहें, तो यह साफ है कि दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है। बिना विभागीय साठगांठ और ऊंचे रसूख के इतना बड़ा जमीन घोटाला मुमकिन नहीं है। आखिर प्रशासन किसे बचाने की कोशिश कर रहा है? न्याय और नियम प्रक्रिया को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए इस पूरे घालमेल की निष्पक्ष जांच, अवैध रजिस्ट्रियों का निरस्तीकरण और दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई बेहद जरूरी है, वरना जनता का प्रशासनिक न्याय प्रणाली से भरोसा उठ जाएगा।
भवदीय / प्रेषक:
[सुनील शर्मा]
नगर पंचायत सरसीवा,
जिला – सारंगढ़-बिलाईगढ़ (छ.ग.)



