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10वीं-12वीं पास छात्राओं को फ्री ट्रेनिंग, अब मल्टीनेशनल कंपनियों में मिल रही जॉब

10वीं-12वीं पास छात्राओं को फ्री ट्रेनिंग, अब मल्टीनेशनल कंपनियों में मिल रही जॉब

छत्तीसगढ़ की लड़कियां खुद को साबित करने के लिए अब किसी मदद का इंतजार नहीं कर रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की युवतियों को अब ऐसी ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे वे नामी कंपनियों में नौकरी हासिल कर रही हैं।

इतना ही नहीं, आत्मनिर्भर बनने के बाद यही युवतियां दूसरी जरूरतमंद लड़कियों को भी प्रशिक्षण देने और नौकरी दिलाने में मदद कर रही हैं।

राज्य सरकार और जिला प्रशासन की मदद से नव गुरुकुल शिक्षण संस्थान का संचालन किया जा रहा है। इसमें 10वीं और 12वीं पास ऐसी लड़कियों को प्रवेश दिया जाता है, जिनके परिवार की वार्षिक आय पांच लाख रुपए से कम है।

चयन तीन चरणों में होता है। पहले लिखित परीक्षा, फिर इंटरव्यू और अंत में छत्तीसगढ़ से जुड़े सामान्य ज्ञान की परीक्षा ली जाती है। तीनों चरणों में सफल होने वाली लड़कियों को दो वर्ष तक विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस दौरान रहने, खाने, लैपटॉप, वाई-फाई समेत सभी सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। चयनित छात्राओं से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता।

प्रोजेक्ट… पढ़ाई के साथ कई तरह की दी जाती है ट्रेनिंग नव गुरुकुल शिक्षण संस्थान में रहने वाली लड़कियों को कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, फाइनेंस, बिजनेस, शिक्षा, ग्रॉफिक्स डिजाइनिंग, फैशन, स्किल डेवलपमेंट, होटल मैनेजमेंट समेत कई तरह की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके अलावा भाषा ज्ञान और व्यक्तित्व विकास पर भी पूरा जोर दिया

जाता है। ट्रेनिंग के दौरान ही लड़कियों से कई तरह के प्रोजेक्ट भी कराए जोत हैं, जिससे उन्हें कंपनियों में काम करने से पहले जॉब का अनुभव हो।

‘पैसे नहीं तो पढ़ाई छोड़ी, अब बड़ी कंपनी में इंजीनियर हूं’

जशपुर की रहने वाली प्रतिभा थापा बताती हैं कि मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इस वजह से मुझे पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इतने महंगे कोर्स की पढ़ाई मुझे निशुल्क मिलेगी। मैंने गुरुकुल में रहकर बिजनेस कोर्स में 16 महीने की ट्रेनिंग ली। अभी मैं एक निजी कंपनी में क्लाउड सपोर्ट इंजीनियर के पद पर काम कर रही हूं।

‘पहली बार घर से बाहर निकली, अब हिमाचल में जॉब’

कुनकुरी निवासी साक्षी सिंह ने बताया कि पढ़ाई छूटने के बाद मैंने गुरुकुल में 15 महीने की ट्रेनिंग ली। प्रशिक्षण पूरा करते ही मुझे बारु साहेब यूनिवर्सिटी हिमाचल प्रदेश में डेटा एनालिटिक्स एसोसिएट का जॉब भी मिल गया। मैं पहली बार अपने घर से बाहर निकली हूँ। मेरा परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था।

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