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राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी जुनून, मेहनत और जीत की कहानी— लक्ष्य प्रधान

राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी जुनून, मेहनत और जीत की कहानी— लक्ष्य प्रधान

शुरुआती सफर

लक्ष्य प्रधान ने वर्ष 2022 में कोविड के बाद, 11 वर्ष की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू किया। उन्होंने चक्रधर क्लब में खेल की शुरुआत की, जहां उन्हें अकरम सर से प्रशिक्षण मिला। शुरुआत में लक्ष्य का उद्देश्य केवल खुद को फिट रखना था। उस समय उन्होंने किसी टूर्नामेंट में खेलने या चैम्पियन बनने का सपना भी नहीं देखा था। धीरे-धीरे बड़ों के साथ खेलते हुए उनका बैडमिंटन के प्रति लगाव बढ़ता गया। जब वे खिलाड़ी बड़े-बड़े टूर्नामेंट में खेलने के लिए बाहर जाते थे, तो लक्ष्य भी उनसे प्रेरित होने लगे। उनकी माताजी स्वयं बैडमिंटन की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रह चुकी हैं, इसलिए उन्हें घर से भी खेल के प्रति निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिला। वर्ष 2022 के अंतिम महीनों में लक्ष्य ने जिला स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए चैम्पियन का खिताब हासिल किया। इसके बाद उनका चयन राज्य स्तर की प्रतियोगिता के लिए हुआ। राज्य स्तर पर उन्होंने अपनी उम्र के कई ऐसे खिलाड़ियों को देखा, जो उनसे दो-तीन वर्ष पहले से ही खेल की तैयारी कर रहे थे। इस अनुभव ने उन्हें अपनी मेहनत और प्रशिक्षण को और बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने प्रतिदिन तीन से चार सत्रों में अभ्यास करना शुरू किया और रायपुर स्थित आई स्पोर्ट्स एरिना एकेडमी में प्रशिक्षण लिया।

प्रेरणा और सहयोग

लक्ष्य के पिता श्री श्याम कुमार प्रधान पुलिस विभाग सारंगढ़ में पदस्थ हैं, जबकि परिवार रायगढ़ में रहता है। पिता से दूरी के बावजूद उनकी माताजी श्रीमती दीपा प्रधान ने हर बैडमिंटन प्रतियोगिता में लक्ष्य के साथ रहकर उनका उत्साह बढ़ाया। उनके पिता भी फोन के माध्यम से हमेशा उनका हौसला बढ़ाते रहे। लक्ष्य अपने सभी कोचों को अपनी सफलता का महत्वपूर्ण प्रेरणास्त्रोत मानते हैं। इसके साथ ही वैदिक इंटरनेशनल स्कूल के डायरेक्टर, प्राचार्य एवं समस्त स्टाफ का भी उनके खेल और पढ़ाई को संतुलित करने में विशेष योगदान रहा है।

यादगार अनुभव

लक्ष्य के लिए सबसे यादगार पल वह था, जब उन्होंने मात्र 11 वर्ष की उम्र में पहली बार जिला स्तरीय बैडमिंटन प्रतियोगिता का खिताब जीता। छोटी उम्र में मिली इस सफलता ने उनके अंदर आत्मविश्वास पैदा किया और आगे बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा दी।

सफलता का मंत्र

लक्ष्य का मानना है कि पढ़ाई और खेल दोनों को साथ लेकर चलने के लिए समय का सही प्रबंधन बहुत जरूरी है। खेल और पढ़ाई दोनों में परिस्थितियां बदलती रहती हैं, इसलिए विद्यार्थी को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार समय का संतुलन बनाना सीखना चाहिए। उनका मानना है कि अनुशासन, नियमित अभ्यास और मेहनत से दोनों क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है।

प्रमुख उपलब्धियां

2023: अंडर-13 नेशनल बैडमिंटन चैम्पियनशिप,

बलांगीर (ओडिशा)

2024: अंडर-14 SGFI चैम्पियनशिप, दिल्ली

2025: सब-जूनियर

नेशनल

बैडमिंटन

चैम्पियनशिप, भुवनेश्वर

इन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में लक्ष्य ने शानदार प्रदर्शन किया और अपने खेल को लगातार बेहतर बनाया।

भविष्य की योजना

लक्ष्य की योजना VWF के लिए आवेदन कर आईडी प्राप्त करने की है। इसके बाद वे आने वाले वर्षों में अंडर-17 वर्ग की ग्रैंड प्रिक्स, हैदराबाद के लिए तैयारी करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य लगातार अपने खेल में सुधार करते हुए उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करना है।

चुनौतियां

राष्ट्रीय और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी के दौरान स्वास्थ्य और फिटनेस का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। लक्ष्य के अनुसार चोट से बचना और शरीर को फिट रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि चोट के कारण अभ्यास और प्रतियोगिताओं में बाधा आ सकती है। लगातार बेहतर प्रदर्शन के लिए नियमित अभ्यास, अनुशासन और कड़ी मेहनत उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं।

पारिवारिक सदस्य

दादाजीः स्व. विशम्भर प्रधान, दादीः श्रीमती सुभाषिनी प्रधान, पिताजीः श्री श्याम कुमार प्रधान, माताजीः श्रीमती दीपा प्रधान, चाचाजी-डॉ. सरोज प्रधान, चाचीजी – श्रीमती रीना प्रधान, छोटा भाईः लब्य प्रधान है।

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