सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में प्राइवेट स्कूलों की तानाशाही, शिक्षकों को कुशल मजदूर से भी कम वेतन**

*सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में प्राइवेट स्कूलों की तानाशाही, शिक्षकों को कुशल मजदूर से भी कम वेतन**
**यौन शोषण रोकने विशाखा समिति गठित भी नही,शासकीय अवकाश भी नही**
*सारंगढ़।* नगर सहित पूरे जिले में इन दिनों प्राइवेट स्कूलों की बाढ़ आ गई है। हर दस किलोमीटर पर एक नया प्राइवेट स्कूल खुल रहा है। अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने वाले ये स्कूल बच्चों को क्या वाकई उच्च स्तरीय शिक्षा दे रहे हैं या बेरोजगार युवाओं का शोषण कर अर्थ-लाभ का धंधा बना लिए हैं, यह सबसे बड़ा सवाल है।
जिले के कई निजी स्कूलों की हकीकत जानने पर पता चलता है कि यहां कार्यरत शिक्षकों को सरकार द्वारा तय कुशल और अकुशल मजदूरी दर से भी कम वेतन पर रखा जाता है।5000-10000 हजार रुपये में पूरे दिन का शिक्षक ही नहीं, क्लर्क, आया और प्रचारक भी बना दिया जाता है।
**सबसे गंभीर बात यहां की हिटलरशाही व्यवस्था**
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार कई स्कूलों में शिक्षकों पर ऐसी पाबंदी है जो सेंट्रल जेल के कैदियों पर भी नहीं होती। कैदी आपस में बात कर सकते हैं, लेकिन शिक्षक स्टाफ रूम में बैठकर बात तक नहीं कर सकते।शिक्षक क्लास रूम में बैठकर पढा नही सकते, क्लास में उनके बैठने के लिए चेयर तक नही रखा जाता है।
*10 घंटे से ज्यादा ड्यूटी, कैमरा बना निगरानी का हथियार*
प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी का कोई निश्चित समय नहीं है। सुबह7.30 बजे से शाम 4 बजे तक कभी परीक्षा, कभी कॉपी जांच, कभी मीटिंग, कभी प्रचार के नाम पर रोक लिया जाता है। स्कूलों में लगे सीसीटीवी कैमरे सुरक्षा के लिए कम, शिक्षकों की निगरानी और बातचीत रोकने के लिए ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं। इसका प्रमाण स्कूल के सीसीटीवी फुटेज और शिक्षकों के बैंक खातों में जमा होने वाली राशि से मिल सकता है, बशर्ते जांच सही तरीके से हो।
*क्या कहता है संविधान?*
शिक्षकों को खाली समय में बात करने से रोकना सीधे तौर पर मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत हर नागरिक को वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट स्कूल का शिक्षक हो। अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत उन्हें संघ बनाने और आपस में चर्चा करने का अधिकार है।
कानून के अनुसार लंच ब्रेक, फ्री पीरियड और स्कूल के पहले-बाद का समय शिक्षक का व्यक्तिगत समय है। इस दौरान बात करने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
हां, अनुच्छेद 19(2) के तहत स्कूल प्रबंधन उचित प्रतिबंध लगा सकता है – जैसे कक्षा के पास तेज आवाज में बात न करना, पढ़ाते समय गपशप न करना, किसी की मानहानि या गुटबाजी न करना। लेकिन “तुम बात ही नहीं करोगे” – यह आदेश अवैध है।
*शिक्षकों ने की जांच की मांग*
क्षेत्र के पीड़ित शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विरोध करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। उन्होंने जिला कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि जिले के सभी प्राइवेट स्कूलों के वेतन रजिस्टर, बैंक ट्रांजेक्शन,क्लास रूम, और सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए और कार्यस्थल पर गरिमापूर्ण व्यवहार एवम विशाखा समिति के गाइड लाइन का पालन सुनिश्चित किया जाए।



