27.36 लाख के गौरव पथ पर अतिक्रमण के आरोप, जनता के फुटपाथ पर कब्जे को लेकर प्रशासन की भूमिका सवालों में*

**27.36 लाख के गौरव पथ पर अतिक्रमण के आरोप, जनता के फुटपाथ पर कब्जे को लेकर प्रशासन की भूमिका सवालों में**
**डीएमएफ मद से 2016 में हुआ था फुटपाथ का निर्माण, दो मंजिला व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और कथित स्टे आदेश के बावजूद निर्माण को लेकर भी उठे सवाल**
सारंगढ़ खबर न्यूज———- शहर में आम नागरिकों के सुरक्षित पैदल आवागमन और सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर विकसित किए गए गौरव पथ पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। वर्ष 2016 में तत्कालीन रायगढ़ जिले के अंतर्गत सारंगढ़ में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से लगभग 27 लाख 36 हजार रुपये की लागत से कलेक्ट्रेट चौक से श्रीराम ऑटो बिलासपुर रोड तक फुटपाथ का निर्माण कराया गया था। लेकिन अब इस सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग और संरक्षण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि आम नागरिकों के लिए बनाए गए फुटपाथ के कुछ हिस्सों पर अतिक्रमण कर निजी उपयोग किया जा रहा है। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो यह सार्वजनिक सुविधा के बाधित होने के साथ-साथ सरकारी संपत्ति के संरक्षण में लापरवाही का मामला भी बन सकता है।
**जनता के पैसों से बना फुटपाथ, फिर आम नागरिकों को सुविधा क्यों नहीं?**
डीएमएफ मद से निर्मित फुटपाथ का उद्देश्य नागरिकों को सड़क किनारे सुरक्षित पैदल चलने की सुविधा देना था। ऐसे में यह जांच का विषय है कि वर्तमान में फुटपाथ की वास्तविक स्थिति क्या है, उसका कितना हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है और क्या आम नागरिक बिना किसी बाधा के इसका उपयोग कर पा रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर कथित अतिक्रमण को लेकर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जे की शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही है। हालांकि, अधिकारियों और अतिक्रमणकारियों के बीच कथित सांठगांठ के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासन को तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि फुटपाथ के निर्माण के बाद उसके रखरखाव और अतिक्रमण से सुरक्षा की जिम्मेदारी किस विभाग को सौंपी गई थी। क्या नगर पालिका ने समय-समय पर निरीक्षण किया? क्या राजस्व विभाग से सीमांकन कराया गया? यदि अतिक्रमण की शिकायतें मिली थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई की गई? इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों के अभिलेखों और स्थल निरीक्षण से ही मिल सकेगा।
**दो मंजिला व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के निर्माण पर भी सवाल**
गौरव पथ पर कथित अतिक्रमण का मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि इसी क्षेत्र में निर्मित दो मंजिला व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स को लेकर भी पहले सवाल उठाए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि भवन निर्माण के दौरान पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था सहित कुछ नियमों की अनदेखी की गई।
बताया जाता है कि निर्माण को लेकर शिकायत के बाद स्थगन आदेश जारी होने और जांच के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद आरोप है कि छुट्टी के दिनों में निर्माण कार्य जारी रहा और बाद में भवन पूरा कर वहां दुकानें संचालित होने लगीं।
हालांकि, स्थगन आदेश की प्रमाणित प्रति, उसकी प्रभावी अवधि, निर्माण की स्वीकृति और संबंधित जांच रिपोर्ट उपलब्ध होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण के दौरान किसी आदेश अथवा नियम का उल्लंघन हुआ था या नहीं।
यदि निर्माण पर रोक प्रभावी थी, तो उसके बावजूद भवन कैसे पूरा हुआ? क्या संबंधित विभाग ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था? भवन की स्वीकृत योजना में पार्किंग के लिए क्या प्रावधान था? वर्तमान में भवन का उपयोग स्वीकृति के अनुरूप हो रहा है या नहीं? ये ऐसे सवाल हैं, जिन पर प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
**फुटपाथ बाधित होने से पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा**
बिलासपुर रोड के किसान राइसमिल के सामने बने काम्प्लेक्स से लेकर पुराना डिपो तक आमजनता के चलने के लिए फुटपाथ बनाया गया था जिसे अब पूरी तरह से दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है।मजे की बात तो ये है कि वही पर जिला कलेक्ट्रेट स्थित है जहाँ अधिकारियों को शायद अभी तक अतिक्रमण की जानकारी ही नही है।गौरव पथ का फुटपाथ आम नागरिकों के पैदल आवागमन के लिए बनाया गया था। यदि उस पर अतिक्रमण या व्यावसायिक गतिविधियों के कारण रास्ता बाधित होता है, तो पैदल यात्रियों को सड़क पर उतरकर चलने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इससे दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है और सार्वजनिक सुविधा का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
इसलिए मामले को केवल अतिक्रमण तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें पैदल यात्रियों की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक धन से निर्मित संपत्ति के उपयोग का सवाल भी जुड़ा हुआ है।
**प्रशासन से संयुक्त सीमांकन और दस्तावेजों की जांच की मांग**
मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए कलेक्ट्रेट चौक से श्रीराम ऑटो बिलासपुर रोड तक गौरव पथ का संयुक्त सीमांकन कराया जाना आवश्यक है। इसके साथ ही फुटपाथ निर्माण से संबंधित स्वीकृत अभिलेखों, डीएमएफ मद से जारी राशि, निर्माण की स्थिति और वर्तमान उपयोग का परीक्षण किया जाना चाहिए।
दो मंजिला व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के मामले में भी भवन निर्माण की अनुमति, स्वीकृत नक्शा, पार्किंग प्रावधान, कथित स्थगन आदेश और जांच रिपोर्ट की समीक्षा होनी चाहिए। यदि किसी आदेश का उल्लंघन, नियमविरुद्ध निर्माण या सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण प्रमाणित होता है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
साथ ही, प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि पूर्व में शिकायत मिलने पर कौन-कौन से कदम उठाए गए और वर्तमान में मामले की क्या स्थिति है।
**अब जवाबदेही तय होने का इंतजार**
डीएमएफ मद से खर्च की गई 27.36 लाख रुपये की राशि से निर्मित फुटपाथ सार्वजनिक उपयोग की संपत्ति है। इसलिए उसका उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप सुनिश्चित करना संबंधित प्रशासनिक निकायों की जिम्मेदारी है। यदि फुटपाथ पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो उसे नियमानुसार हटाकर आम नागरिकों के लिए रास्ता बहाल किया जाना चाहिए।
फिलहाल गौरव पथ पर अतिक्रमण, दो मंजिला व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के निर्माण और प्रशासनिक निगरानी को लेकर उठे सवालों का आधिकारिक जवाब सामने आना बाकी है। जिला प्रशासन और नगर पालिका की ओर से दस्तावेजों की जांच तथा स्थल निरीक्षण के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जनता के सुरक्षित आवागमन के लिए 27.36 लाख रुपये खर्च कर बनाया गया फुटपाथ क्या वास्तव में जनता के काम आ रहा है? अब देखना होगा कि प्रशासन सार्वजनिक संपत्ति की स्थिति की जांच कर उसे अतिक्रमणमुक्त कराने के लिए क्या कदम उठाता है।जल्द ही इसकी शिकायत माननीय मुख्यमंत्री और जिला कलेक्टर से किया जायेगा।



