सारंगढ़-बिलाईगढ़सारंगढ़ जिला प्रशासन

जिले में कई वर्षों से विभागों में स्थानीय कर्मचारियों की भरमार

*जिले में कई वर्षों से विभागों में स्थानीय कर्मचारियों की भरमार**

*जॉइनिंग यहीं, रिटायरमेंट यहीं! स्थानीय कर्मचारियों की वर्षों से एक ही कुर्सी पर पदस्थापना से तबादला व्यवस्था पर बड़े सवाल*

**वन विभाग,पशु अस्पताल, शासकीय अस्पताल, बिजली विभाग,पीएचई विभाग,आरईएस विभाग,महिला बाल विभाग,कचहरी शामिल**

सारंगढ़ खबर न्यूज,सारंगढ—– जिले के विभिन्न विभागों में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ स्थानीय कर्मचारियों को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था और तबादला नीति के पालन पर सवाल उठने लगे हैं। चर्चा का विषय यह है कि कई कर्मचारी जो मूलतः स्थानीय हैं, उनकी पदस्थापना वर्षों से उसी कार्यालय या क्षेत्र में बनी हुई है, जहां उन्होंने सेवा की शुरुआत की थी और अब सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचने के बावजूद स्थानांतरण नहीं हुआ है।प्रशासनिक नियमों और सुशासन की दृष्टि से समय-समय पर स्थानांतरण (रोटेशन) को आवश्यक माना जाता है, ताकि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और संतुलन बना रहे। लेकिन स्थानीय स्तर पर लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने की स्थिति से यह धारणा बन रही है कि रोटेशन व्यवस्था का प्रभाव सीमित नजर आ रहा है। जानकारों का मानना है कि वर्षों तक एक ही जगह कार्यरत रहने से स्थानीय प्रभाव बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे प्रशासनिक निष्पक्षता और संतुलन प्रभावित हो सकता है।जिले के कई कार्यालयों में ऐसी स्थिति बताई जा रही है जहां स्थानीय कर्मचारी अपने ही गृह क्षेत्र या आसपास के दफ्तरों में लंबे समय से निरंतर पदस्थ हैं। इससे विभागीय कार्यप्रणाली में स्थायित्व तो दिखता है, लेकिन पारदर्शिता, निगरानी और नई कार्यशैली के अवसर सीमित होने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर स्थानांतरण संबंधी निर्णय विभागीय आवश्यकता, उपलब्ध पदों, प्रशासनिक नीति और शासन के दिशा-निर्देशों के आधार पर ही लिए जाते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार रोटेशन प्रणाली का उद्देश्य केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि कार्यकुशलता बढ़ाना, जवाबदेही सुनिश्चित करना और विभागों में नई ऊर्जा का संचार करना भी होता है। लंबे समय तक स्थानीय स्तर पर ही पदस्थ रहने से कार्यशैली में एकरूपता आ सकती है, जिससे नवाचार और स्वतंत्र निगरानी तंत्र प्रभावित होने की आशंका जताई जाती है। नागरिकों और जागरूक वर्ग द्वारा अब यह मांग उठाई जा रही है कि सभी विभागों में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ, विशेषकर स्थानीय कर्मचारियों की समग्र समीक्षा की जाए और नियमों के अनुरूप संतुलित पदस्थापना सुनिश्चित की जाए। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनविश्वास को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल यह मुद्दा प्रशासनिक सुधार, स्थानांतरण नीति के प्रभावी पालन और संतुलित पदस्थापना से जुड़े व्यापक प्रश्न के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि समय-समय पर निष्पक्ष समीक्षा और नीति अनुसार रोटेशन लागू होने से विभागीय व्यवस्था अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और गतिशील बन सकती है।

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