
वर्दी में कड़क रौब, भीतर एक नेकदिल इंसान
पुलिस विभाग में अमित शुक्ला की पहचान एक ऐसे अफसर की थी, जो अपराधियों के लिए जितने कड़क और रौबदार थे, आम जनता और अपने साथियों के लिए उतने ही संवेदनशील और व्यवहार कुशल थे। खाकी वर्दी पहनकर जब वो फील्ड पर होते, तो उनके उसूल और सख्ती साफ नजर आती थी, लेकिन उस सख्त मिजाज के पीछे एक बेहद ज़िंदादिल इंसान छिपा था। उनके जूनियर हों या सीनियर, हर कोई उनके अपनत्व और मिलनसार स्वभाव का कायल था।
अधूरी रह गई वापसी की उम्मीद
बीमारी के उस मुश्किल दौर में भी उनके करीबियों और परिजनों को यही आस थी कि उनका ‘अमित भैया’ हर बार की तरह इस बार भी मुश्किलों को मात देकर वापस लौट आएगा। लेकिन नियति के आगे किसी का जोर नहीं चला और आज वह सब कुछ पीछे छोड़कर इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए।
पुलिस विभाग ने आज सिर्फ एक होनहार और कर्मठ निरीक्षक ही नहीं खोया है, बल्कि उनके परिचितों ने एक सच्चा दोस्त, एक मार्गदर्शक और एक बेहतरीन इंसान खो दिया है।


