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हिर्री पंचायत में पात्र गरीब अपात्र, अपात्रों को पात्र बनाने का आरोप; ग्रामीणों ने सचिव-सरपंच पर मिलीभगत और लेन-देन के लगाए गंभीर आरोप

आवास प्लस 2.0 की पात्र-अपात्र सूची में बड़ा खेल?

सारंगढ़। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत संचालित आवास प्लस 2.0 की पात्र-अपात्र सूची को लेकर ग्राम पंचायत हिर्री में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव और सरपंच की मिलीभगत से पात्र गरीब हितग्राहियों को अपात्र कर दिया गया, जबकि अपात्र लोगों को पात्र बताकर सूची में शामिल कर दिया गया। इस पूरे मामले में कथित रूप से पैसों के लेन-देन का भी आरोप लगाया जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, शासन के निर्देशों के बावजूद ग्राम पंचायत में आवास प्लस 2.0 की सूची को सार्वजनिक रूप से चस्पा नहीं किया गया। न ही ग्रामीणों को पात्रता एवं अपात्रता की जानकारी दी गई। आरोप है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से ग्राम सभा के सामने रखने के बजाय आपसी सांठगांठ के आधार पर सूची तैयार कर दी गई।

पात्र हितग्राही दर-दर भटकने को मजबूर

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन गरीब परिवारों के पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है और जो प्रधानमंत्री आवास योजना के वास्तविक पात्र हैं, उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर, कथित रूप से अपात्र लोगों को पात्र बनाकर योजना का लाभ दिलाने की तैयारी की जा रही है। पात्र हितग्राही अपनी शिकायत लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

अधिकारी बने मूकदर्शक, कार्रवाई के बजाय नियमों का हवाला?

ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मामले में ठोस कार्रवाई करने के बजाय ग्रामीणों को नियम-कायदों में उलझाए हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सूची सही तरीके से सार्वजनिक की गई होती और ग्राम सभा में पात्र-अपात्र हितग्राहियों की जानकारी दी गई होती, तो पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहती।

जांच हुई तो खुल सकता है बड़ा राज

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत हिर्री में आवास प्लस 2.0 की पूरी सूची की निष्पक्ष जांच कराई जाए। पात्र और अपात्र हितग्राहियों का घर-घर भौतिक सत्यापन किया जाए तथा ग्राम सभा की कार्यवाही, सूची तैयार करने की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए। यदि जांच में अनियमितता और लेन-देन के आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी पंचायत प्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

अब देखना यह होगा कि गरीबों के लिए बनाई गई प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित गड़बड़ी के इन आरोपों पर जिला प्रशासन कब तक जांच कर कार्रवाई करता है, या फिर पात्र गरीब हितग्राही इसी तरह सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहेंगे।

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