गोड़िहारी रोड राधाकृष्ण अस्पताल और गुरुकुल स्कूल के करीब बन रहे टायर प्लांट माँ दुर्गा पेट्रो केमिकल को प्रशासन ने जारी किया नोटिस*

**गोड़िहारी रोड राधाकृष्ण अस्पताल और गुरुकुल स्कूल के करीब बन रहे टायर प्लांट माँ दुर्गा पेट्रो केमिकल को प्रशासन ने जारी किया नोटिस**
**राधाकृष्ण अस्पताल और श्याम डेवलपर्स की शिकायतों के बाद जांच की मांग तेज**
**माँ दुर्गा पेट्रो केमिकल को 28 अक्टूबर तक जवाब देने का निर्देश**

सारंगढ़ खबर न्यूज,सारंगढ—– सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के रानीसागर-कुटेला क्षेत्र में गोड़िहारी रोड स्थित राधाकृष्ण मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल और गुरुकुल इंग्लिश मीडियम स्कूल के नजदीक प्रस्तावित टायर पायरोलिसिस प्लांट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। माँ दुर्गा पेट्रो केमिकल नामक औद्योगिक इकाई की स्थापना, भूमि उपयोग, पर्यावरणीय उपयुक्तता और आसपास की आबादी के स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले में राधाकृष्ण अस्पताल प्रबंधन तथा श्याम डेवलपर्स की ओर से शिकायतें और आवेदन प्रस्तुत किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, प्रशासनिक कार्रवाई के तहत संबंधित पक्ष धैर्य अग्रवाल को नोटिस जारी कर 28 अक्टूबर 2026 तक जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिए जाने का उल्लेख है।
**अस्पताल और स्कूल की निकटता को लेकर जताई चिंता**
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रानीसागर वार्ड क्रमांक 1 में प्रस्तावित टायर पायरोलिसिस यूनिट को लेकर राधाकृष्ण मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल प्रबंधन ने जिला कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर मामले की जांच कराने की मांग की है।
अस्पताल प्रबंधन ने आशंका जताई है कि खराब टायरों के प्रसंस्करण से संबंधित औद्योगिक इकाई के संचालन से धुआँ, दुर्गंध, गैसों तथा अन्य प्रदूषकों का उत्सर्जन हो सकता है, जिससे आसपास के लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। आवेदन में प्रस्तावित इकाई के स्थल चयन, भूमि के उपयोग और आवश्यक विभागीय अनुमतियों की जांच कराने का आग्रह किया गया है।
प्रबंधन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित प्लांट से राधाकृष्ण अस्पताल की दूरी लगभग 200 मीटर तथा गुरुकुल इंग्लिश मीडियम स्कूल की दूरी करीब 100 से 150 मीटर बताई गई है। इन दूरियों का आधिकारिक सत्यापन होना अभी आवश्यक है।
**श्याम डेवलपर्स के आवेदन पर भी कार्रवाई**
इसी मामले में ग्राम कुटेला, वार्ड क्रमांक 1 स्थित खसरा नंबर 321/2 एवं 316/2 की भूमि पर माँ दुर्गा पेट्रो केमिकल नामक प्लांट की स्थापना अथवा संचालन को लेकर श्याम डेवलपर्स की ओर से भी आवेदन प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख है।
आवेदन में प्रस्तावित आवासीय कॉलोनी का हवाला देते हुए औद्योगिक इकाई और आसपास की बसाहट के बीच दूरी तथा संभावित प्रदूषण को लेकर चिंता जताई गई है। श्याम डेवलपर्स की ओर से बताया गया है कि आवासीय कॉलोनी के लिए नगरपालिका से नियमानुसार कॉलोनाइजर लाइसेंस प्राप्त किया गया है तथा भूमि के सीमांकन के संबंध में तहसीलदार न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया है।
शिकायत में प्लांट से लगभग 20 मीटर की दूरी पर अस्पताल होने का दावा भी किया गया है। हालांकि, अस्पताल से संबंधित दोनों आवेदनों में बताई गई दूरियों के अंतर को देखते हुए वास्तविक स्थल स्थिति का आधिकारिक निरीक्षण और माप आवश्यक है।
**भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 152 के तहत नोटिस**
उपलब्ध दस्तावेजों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 152 के तहत संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किए जाने का उल्लेख है। दस्तावेज के अनुसार, माँ दुर्गा पेट्रो केमिकल से जुड़े धैर्य अग्रवाल को 28 अक्टूबर 2026 को स्वयं अथवा अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
दस्तावेज में सार्वजनिक उपद्रव यानी लोक न्यूसेंस की आशंका के आधार पर प्लांट के निर्माण और संचालन को आगामी आदेश तक रोकने तथा संबंधित गतिविधि को अन्यत्र स्थानांतरित करने संबंधी निर्देशों का भी उल्लेख है। निर्धारित तिथि पर जवाब प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है।
हालांकि, नोटिस और आदेश की प्रमाणित प्रति, जारी करने वाले सक्षम प्राधिकारी का पूरा विवरण तथा संबंधित पक्ष को आदेश की तामील की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इसलिए मामले में अंतिम प्रशासनिक अथवा न्यायिक निर्णय को लेकर संबंधित प्राधिकारी के आधिकारिक आदेश का इंतजार करना होगा।
**आबादी, तालाब और अन्य संस्थानों की निकटता भी जांच के दायरे में**
शिकायतकर्ताओं ने प्रस्तावित प्लांट के आसपास अस्पताल, स्कूल, आबादी, नालंदा परिसर पुस्तकालय, प्रस्तावित छात्रावास, लाइवलीहुड कॉलेज और दो तालाबों की निकटता का उल्लेख करते हुए क्षेत्र की पर्यावरणीय उपयुक्तता की जांच कराने की मांग की है।
स्थानीय स्तर पर उठाई गई चिंताओं के मद्देनजर यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित इकाई में किस प्रकार की औद्योगिक प्रक्रिया अपनाई जा रही है, भूमि का स्वीकृत उपयोग क्या है तथा संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमतियां और सहमतियां प्राप्त की गई हैं या नहीं।
विशेष रूप से टायर पायरोलिसिस जैसी प्रक्रिया में संभावित उत्सर्जन, अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था का आकलन तकनीकी मानकों के आधार पर किया जाना जरूरी है। केवल आशंकाओं के आधार पर प्रदूषण की पुष्टि नहीं की जा सकती; इसके लिए संबंधित विभागों की जांच और वैज्ञानिक आकलन आवश्यक होगा।
**संयुक्त जांच और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग**
अस्पताल प्रबंधन की ओर से जिला प्रशासन, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, राजस्व विभाग और संबंधित नगरीय निकाय के अधिकारियों की संयुक्त टीम से स्थल निरीक्षण कराने की मांग की गई है। साथ ही, भूमि उपयोग, विभागीय अनुमतियों और संभावित पर्यावरणीय प्रभावों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।
शिकायतकर्ताओं की मांग है कि जांच पूरी होने तक सक्षम प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आवश्यक अंतरिम कदम उठाए जाएं, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और जनस्वास्थ्य से जुड़े सवालों का समाधान किया जा सके।
**अब संबंधित पक्ष के जवाब और जांच रिपोर्ट पर नजर**
फिलहाल यह मामला औद्योगिक गतिविधि, पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रस्तावित आवासीय विकास के बीच संतुलन से जुड़ा हुआ है। प्रशासन के समक्ष अब प्लांट की वास्तविक स्थिति, भूमि उपयोग, आवश्यक अनुमतियों, आसपास के संवेदनशील संस्थानों से दूरी तथा प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्थाओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।
28 अक्टूबर 2026 तक संबंधित पक्ष की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब और सक्षम प्राधिकारी के आगामी आदेश पर अब सबकी नजरें टिकी हैं। मामले में माँ दुर्गा पेट्रो केमिकल प्रबंधन का पक्ष, प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और संबंधित विभागों की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



