सारंगढ़-बिलाईगढ़

*5 सालों में 45% घटा शहर का वाटर लेवल*

**5 सालों में 45% घटा शहर का वाटर लेवल**

**कारणः पटते तालाब-बढ़ता शहरीकरण, समाधानः बोर वेल की संख्या पर नियंत्रण**

सारंगढ खबर न्यूज,सारंगढ—–सारंगढ जिले में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच जल संकट लगातार गहराता जा रहा है।सारंगढ की जीवनरेखा मानी जाने वाली मुडातालाब व महानदी के बावजूद शहर का भूजल स्तर बीते 5 वर्षों में लगभग 45 प्रतिशत तक गिर चुका है, जो जिलावासियों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। हर साल 1200-1500 मिमी बारिश होने के बावजूद केवल करीब 10 प्रतिशत पानी ही जमीन के भीतर पहुंच पाता है।
बढ़ता कंक्रीटीकरण, तालाबों और अन्य जल स्रोतों का लगातार सिमटना तथा अनियंत्रित बोरवेल खुदाई इस स्थिति के प्रमुख कारण हैं।

**रन-ऑफ ज्यादा, रिचार्ज कम**

सारंगढ जिले में हर साल 1200-1500 एमएम बारिश होती है। जिसका केवल 10 प्रतिशत पानी ही जमीन के नीचे पहुंच पाता है। बाकि पानी नदी नालों में जरिए बह जाता है। यानि बारिश के पानी का रेट ऑफ रन-ऑफ बहुत ज्यादा है, जबकि मौजूदा भूजल रिचार्ज बहुत कम है। तेजी से बढ़ते कंक्रीटीकरण और बोरवेल की संख्या ने शहर के जल संतुलन को बिगाड़ना शुरू कर दिया है। जब शहर के तालाबों और वाटर बॉडीज में बारिश का पानी जाएगा तब ग्राउंड वाटर रिचार्ज बढ़ेगा,ऐसा जिले के कुछ अनुभवी लोगो का कहना है।

**धरती से पानी की लूट**
पहले जिले में लगभग 120 से 150 तालाब हुआ करते थे। अब यह सिमट कर 50 से 60 ही रह गए हैं। शहर की नई कॉलोनियों और पुराने इलाकों में बिना वैज्ञानिक प्लानिंग के बोरवेल खोदे जा रहे हैं। कई घरों और अपार्टमेंट्स में एक ही एरिया में कई-कई बार बोरिंग की जा रहीं है। जिससे ग्राउंड वाटर का रिचार्ज कम हो रहा है। इससे धरती के अंदर पानी जमा होने वाली परत पर सीधा दबाव पड़ रहा है।

**रिमोट सेंसिंग से जल प्रबंधन**

NIT रायपुर के डॉ. डीसी झरिया और उनकी टीम के 5 सालों के अध्ययन में भूजल की असमान स्थिति सामने आई है। लगभग 490 वर्ग किमी क्षेत्र में किए गए इस अध्ययन के अनुसार, केवल करीब 25% हिस्से में ही उच्च भूजल उपलब्धता है, जबकि अधिकांश क्षेत्र मध्यम या कम श्रेणी में आता है। इस अध्ययन में जीआईएस, रिमोट सेंसिंग और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया, जिससे आने वाले समय में शहर के भूजल प्रबंधन के लिए सटीक योजना बनाने में मदद मिलेगी।

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